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क्या The Kerala Story पर लगने वाला है बैन? जानिए, किन वजहों से फिल्म पर लटक सकती है पाबंदी की तलवार

रिलीज से पहले ही विवादों में आई 'द केरला स्टोरी' पर एक तबका बैन लगाने की मांग कर रहा है. हंगामे के बीच डायरेक्टर Sudipto Sen की इस फिल्म पर सेंसर बोर्ड की कैंची भी चली. कहा जा रहा है कि इसमें हिंदू देवी-देवताओं पर आपत्तिजनक बातें थीं, साथ ही केरल के एक पूर्व मुख्यमंत्री के इंटरव्यू का भी दृश्य था. अब फिल्म A सर्टिफिकेट के साथ आ सकती है.

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द केरल स्टोरी फिल्म को लेकर दो धड़े हो चुके हैं. (screeshot)
द केरल स्टोरी फिल्म को लेकर दो धड़े हो चुके हैं. (screeshot)

शुक्रवार को एक फिल्म आने वाली है- द केरल स्टोरी, जो ट्रेलर की रिलीज के साथ ही विवादों में घिर गई. मूवी में कथित तौर पर केरल की उन हजारों लड़कियों की कहानी है, जिसका ब्रेनवॉश करके पहले धर्म परिवर्तन कराया गया, और फिर ISIS आतंकी बना दिया गया. कहानी के आंकड़ों को कुछ लोग लोग हवा-हवाई बता रहे हैं. यहां तक कि इसे इस्लामोफोबिया फैलाने वाला भी कह रहे हैं.

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खुद केरल सरकार इसके सपोर्ट में खड़ी नहीं लग रही. इस बीच सेंसर यानी सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन (CBFC) ने इसमें काटछांट भी की. तो क्या फिल्म को बैन भी किया जा सकता है? जानिए, भारत में फिल्म पर पाबंदी लगाने के क्या हैं नियम-कायदे. 

इन ग्राउंड्स पर किया जा सकता है बैन

हमारे यहां, 1952 के सिनेमैटोग्राफ अधिनियम के तहत CBFC ये काम करता है. उसके पास ताकत होती है कि वो किसी फिल्म में काटछांट करके कई सीन्स, डायलॉग्स हटा सके. यहां तक सेंसर अगर चाहे तो किसी फिल्म को रोक भी सकता है लेकिन इसके लिए कई पैमाने हैं. जैसे अगर कोई मूवी देश की एकता और शांति के लिए खतरा है तो बोर्ड उसे बेहिचक बैन कर सकता है. इसी तरह फिल्म में कुछ ऐसा हो, जो लोगों में क्राइम के लिए दिलचस्पी बढ़ाए या क्राइम के लिए उकसाए तो भी सेंसर किया जा सकता है. 

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the kerala story movie controversy over women religious conversion and their move towards isis
हर देश के पास अपना सेंसर बोर्ड है. सांकेतिक फोटो (Getty Images)

सर्टिफिकेशन के दौरान होती है प्रोसेस

फिल्म बनने के बाद सेंसर बोर्ड के पास पहुंचती है, जिसमें ये पक्का होता है कि उसे कौन सा सर्टिफिकेट दिया जाए, यानी किस उम्र के लोग देख सकते हैं. इसी समय बोर्ड ये भी तय कर सकता है कि फिल्म रिलीज भी हो सकती है, या उसमें किसी बदलाव की जरूरत है. कई बार बाद में अपील आने पर भी नए सिरे से प्रोसेस हो सकती है. 

फिल्म बनाने वाले भी कर सकते हैं फरियाद

यहां बोर्ड के पास अकेली ताकत नहीं. अगर फिल्ममेकर को सेंसर बोर्ड की किसी बात पर एतराज है, वो फिल्म को वैसे का वैसा रिलीज करना चाहे तो भी रास्ता है. इसके लिए वो फिल्म सर्टिफिकेशन अपेलेट ट्रिब्यूनल (FCAT) के पास जा सकता है. ये अलग संस्था है, जो सेंसर बोर्ड के फैसलों के खिलाफ भी सुनवाई करती है. अगर यहां भी बात फिल्ममेकर की मर्जी से अलग हो तो वो कोर्ट जा सकता है. 

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फिल्म बैंडिट क्वीन का एक दृश्य.

कुछ मामले ऐसे हैं, जहां किसी तरह की अपील या जिरह काम नहीं आती और फिल्म बैन कर दी जाती है. जैसे बोर्ड के साथ मिलकर किसी राज्य की सरकार ये फैसला कर सकती है कि मूवी में बताई गई बातें दंगा-फसाद फैला सकती हैं, या नियम टूट सकते हैं. कोर्ट या उसके किसी फैसले के खिलाफ बोलने वाली मूवीज को भी बैन कर दिया जाता है. वैसे ये बैन आमतौर पर कुछ समय के बाद हटा दिए जाते हैं, जब सरकार को भरोसा हो जाए कि ऐसा नहीं होगा. 

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किन फिल्मों पर लग चुका है बैन?

शेखर कपूर की फिल्म बैंडिट क्वीन को अश्लील और आपत्तिजनक बताते हुए रिलीज से पहले ही बैन कर दिया गया था. बाद में ए सर्टिफिकेट के साथ ये जारी हो सकी. अनुराग कश्यप की मुंबई दंगों पर बनी फिल्म ब्लैक फ्राईडे को भी बहुत ज्यादा डार्क मानते हुए रोका गया था. मुंबई हाईकोर्ट के क्लीयरेंस के बाद ही ये रिलीज हो सकी. यौन संबंधों पर बनी कई फिल्मों पर रोक लगी, जो कुछ समय या लंबे समय बाद रिलीज हो गईं. वहीं अनुराग कश्यप की पहली फिल्म पांच कभी भी भारत या दूसरे किसी देश में भी जारी नहीं हो सकी. CBFC ने इसमें भद्दी भाषा और बेहद हिंसक सीन्स की बात कहते हुए पर्दे पर आने से पहले ही साल 2004 में रोक दिया था. इसके बाद कई बार कोशिशों के बाद भी इसे ग्रीन सिग्नल नहीं मिला. 

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किसी फिल्म से अगर धार्मिक भावनाएं आहत होने की आशंका हो, तो भी बैन लग सकता है. सांकेतिक फोटो (screenshot)

विदेशों में कैसे काम करता है सेंसर बोर्ड?

सेंसर बोर्ड अमेरिका में भी काम करता है और यूके में भी. अमेरिका में मोशन पिक्चर एसोसिएशन (MPA) फिल्मों को रेट और क्लासिफाई करता है. वहीं, यूके में ब्रिटिश बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन (BBFC) काम संभालता है. दोनों जगहों पर कुछ हेरफेर के साथ नियम वही हैं. 

- फिल्म अगर सांस्कृतिक, साहित्यिक या किसी भी ढंग से अश्लील है तो उसपर बैन लगाया जा सकता है. पोर्न फिल्में अलग श्रेणी में आती हैं, जिसक अलग दर्शक होते हैं. 

- अगर फिल्म में फैक्ट से छेड़छाड़ हो, जैसे इतिहास में कोई बदलाव दिखे, या किसी महान हस्ती की जिंदगी के बारे में गलत दिखाया जाए तब भी बैन लग सकता है. 

- देश की सुरक्षा पर खतरा हो सकती फिल्म को कोई भी देश किसी हाल में रिलीज नहीं होने देता. जैसे अगर किसी फिल्म से सेंसिटिव मिलिट्री जानकारी लीक होती दिखे, या क्लासिफाइड जानकारी पब्लिक डोमेन में आ जाए तो भी बैन तय है.

- मूवी अगर कॉपीराइट के नियमों को तोड़ती दिख रही हो तो भी सेंसर उसे रोक देता है. इसमें कुछ सीन भी हो सकते हैं, या फिर डायलॉग भी. इनमें बदलाव के बाद फिल्म रिलीज हो सकती है. 

- यूनाइटेड किंगडम में उन फिल्मों पर भी पाबंदी लग सकती है, जो किसी भी तरह से आतंकवाद या आतंकियों को सही बताए. जैसे कहा जाए कि किसी खास हालात का शिकार होकर फलां ने आतंकी चोला पहन लिया, तो ये दलील यूके में नहीं चलेगी. 

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किन देशों में सबसे सख्त माना जाता है सेंसर?

वैसे तो हर देश अपने लिहाज से उन सारी चीजों में काटछांट करता है, जो आपत्तिजनक हों, लेकिन ज्यादातर जगहों पर फिल्ममेकर्स को अपने मुताबिक काम की छूट मिलती है. दूसरी तरफ उत्तर कोरिया, चीन, इरान और सऊदी अरब के बारे में माना जाता है कि वहां फिल्म बनाना तलवार की धार पर चलने जैसा है. जैसे चीन को ही लें तो वहां कई चीजें राजनैतिक मामला मान ली जाती हैं. अगर कोई फिल्ममेकर तिब्बत या ताइवान या तियानमेन चौक नरसंहार पर फिल्म बनाने की सोचे तो फिल्म किसी हाल में रिलीज नहीं हो सकेगी.

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