
बॉलीवुड फिल्म 'द केरल स्टोरी' पर बवाल थमने का नाम नहीं ले रहा है. फिल्म का ट्रेलर रिलीज होने के बाद से ही इस पर बवाल हो रहा है. फिल्म रिलीज होने के बाद ये बवाल और बढ़ गया.
'द केरल स्टोरी' केरल में कथित रूप से गायब हुईं लड़कियों के धर्म परिवर्तन कर आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट में शामिल होने की कहानी दिखाती है.
इस फिल्म को लेकर समाज भी दो धड़ों में बंट गया है. एक धड़ा वो है जो इस फिल्म को 'सच्चाई' बताता है, तो दूसरा धड़ा इसे 'प्रोपेगैंडा' बता रहा है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इस फिल्म को 'आतंकी साजिश का खुलासा' करने वाला बताया था.
बहरहाल, इस फिल्म को पश्चिम बंगाल में बैन कर दिया गया. इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई है. तमिलनाडु में भी सिनेमा थियेटरों के मालिकों ने फिल्म की स्क्रीनिंग करने से मना कर दिया है. लेकिन इसके उलट, तीन बीजेपी शासित राज्य- उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और मध्य प्रदेश में इस फिल्म को टैक्स फ्री कर दिया है.
टैक्स फ्री माने उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और मध्य प्रदेश में इस फिल्म की टिकट पर राज्य सरकार की ओर से टैक्स नहीं लिया जाएगा. हालांकि, बाकी दूसरे टैक्स लगेंगे.
कितना टैक्स लगता है?
2017 में जीएसटी आने से पहले फिल्मों पर एंटरटेन्मेंट टैक्स लगता था. ये हर राज्य में अलग-अलग होता था. उस समय अगर किसी फिल्म को टैक्स फ्री किया जाता था, तो उस पर लगने वाला एंटरटेन्मेंट टैक्स माफ हो जाता था.
लेकिन, जीएसटी आने के बाद एक रेट तय हो गया. इसे दो स्लैब में बांटा गया. मसलन, अगर किसी फिल्म की टिकट 100 रुपये से कम है तो उस पर 12% जीएसटी लगेगा और अगर किसी फिल्म की टिकट 100 रुपये से ज्यादा है तो उस पर 18% जीएसटी लिया जाएगा.
चूंकि, जीएसटी में केंद्र और राज्य सरकार, दोनों का अपना-अपना हिस्सा होता है तो इस हिसाब से 100 रुपये से कम टिकट 6-6% और उससे ज्यादा की टिकट पर 9-9% का टैक्स केंद्र और राज्य सरकारें लेती थीं.
इस हिसाब से, राज्य सरकारों ने 'द केरल स्टोरी' पर अपना टैक्स माफ किया है, जो 6 या 9 फीसदी होता है.
पर कोई फिल्म टैक्स फ्री कैसे होती है?
किसी फिल्म को टैक्स फ्री घोषित करने का पूरा फैसला राज्य सरकार पर निर्भर करता है. ट्रेड एनालिस्ट तरण आदर्श का कहना है कि किसी फिल्म का टैक्स फ्री होना उसकी थीम और अवेयरनेस जैसे फैक्टर्स पर डिपेंड करता है.
उदाहरण के लिए, 2017 में 'टॉयलेटः एक प्रेम कथा' फिल्म आई थी. इसे उत्तर प्रदेश सरकार ने टैक्स फ्री कर दिया था. इसी तरह अक्षय कुमार की फिल्म 'पैडमैन' को राजस्थान सरकार ने टैक्स फ्री कर दिया था. ये फिल्म सोशल एक्टिविस्ट अरुणाचलम मुरुगनंथम की बायोग्राफी थी.
तरण आदर्श बताते हैं, जब फिल्म की टिकट की कीमत कम होती है तो उससे दर्शकों को फायदा होता है. ज्यादा दर्शक उस फिल्म को देखने आते हैं. अगर फिल्म को लोग पसंद करते हैं तो उससे राज्य सरकार को फायदा होता है.
सिनेमा थियेटरों को फायदा या नुकसान?
सिनेमा हॉल के मालिकों का कहना है कि फिल्म के टैक्स फ्री होने का बहुत ज्यादा फायदा दर्शकों को नहीं मिलता है. उसकी वजह ये है कि टैक्स फ्री होने के बाद भले ही दर्शकों को स्टेट जीएसटी नहीं देना पड़ता, लेकिन सेंट्रल जीएसटी तो देना ही पड़ता है.
उनका कहना है कि जब एंटरटेन्मेंट टैक्स लगता था तो ज्यादा फायदा होता था. क्योंकि उससे पूरा एंटरटेन्मेंट टैक्स माफ हो जाता था.
हालांकि, टैक्स फ्री होने से सिनेमा थियेटरों के मालिकों का नुकसान होता है. ट्रेड एनालिस्ट अक्षय राठी का कहना है कि जब कोई फिल्म टैक्स फ्री होती है तो फिल्म इंडस्ट्री पर उसका निगेटिव असर पड़ता है. उनका कहना है कि सिनेमा थियेटर दर्शकों से तो पैसा नहीं ले सकते, लेकिन डिस्ट्रीब्यूटर्स को उन्हें भुगतान करना पड़ता है. उन्होंने कहा कि जीएसटी आने के बाद बहुत कुछ बदल गया है.
(इनपुटः रितिका, युद्धजीत शंकर दास)