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युद्ध रोकने के लिए हमास ने रख दी 3 चरणों वाली शर्तें, क्यों मुश्किल है इजरायल का राजी होना?

फिलिस्तीनी आतंकी गुट हमास ने कहा कि वो इजरायल के साथ समझौता करने को तैयार है. कब्जे में रखे बंधक भी लौटा दिए जाएंगे, लेकिन इसके लिए तीन चरणों में डील होगी. हर फेज की कंडीशन के पूरा होने पर ही वो आगे बढ़ेगा. सीजफायर की इन शर्तों को फिलहाल इजरायल की मंजूरी मिलती नहीं दिख रही.

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इजरायल और हमास के बीच लड़ाई को 7 महीने हो चुके.
इजरायल और हमास के बीच लड़ाई को 7 महीने हो चुके.

हमास और इजरायल के बीच जंग छिड़े पूरे 7 महीने हो चुके. इस दौरान गाजा पट्टी बुरी तरह से तबाह हो चुकी. डेटा कह रहे हैं कि बीते वक्त में गाजा में 35 हजार मौतें हो चुकीं. दोनों के बीच सुलह-समझौता कराने में दुनिया के कई देश लगे हुए हैं. पहली बार हमास ने सीजफायर पर हामी तो भरी, लेकिन साथ ही तीन चरणों की शर्तें रख दीं. अंदेशा जताया जा रहा है कि हमास के पक्ष में जाती इन कंडीशन्स को यहूदी देश शायद ही मान सके.

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क्या है पहले चरण में

इसमें 40 दिनों के सीजफायर की बात है. इस दौरान 33 इजरायली बंधकों को रिहा किया जाएगा लेकिन बदले में इजरायल को भी अपनी जेलों में बंद फिलिस्तीनी कैदियों को छोड़ना होगा. ये एक तरह से होस्टेज-प्रिजनर डील है. 

इसी फेज में एक और शर्त है, जिसके तहत इजरायल की सेना आंशिक तौर पर गाजा पट्टी छोड़ देगी, ताकि दक्षिण से उत्तरी गाजा की तरफ आना-जाना हो सके. उत्तरी गाजा वो हिस्सा है, जहां इजरायली सेना दावा कर रही है कि उसने हमास के ढांचे को पूरी तरह से खत्म कर दिया है. 

दूसरे फेज की क्या कंडीशन्स

सीजफायर को और 42 दिन आगे बढ़ाया जाए. ये आगे स्थाई युद्धविराम तक जा सकता है. गाजा पट्टी से इजरायली सेना को पूरी तरह से हटाने की बात भी इस फेज का हिस्सा है. हमास इस समय सारे बंधकों को रिहा कर देगा, लेकिन बदले में इजरायली जेलों से प्रो-हमास कैदी छोड़ जाएं. 

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three phase ceasefire deal hamas israel photo Reuters

क्या है तीसरे और आखिरी चरण में

इस समय हमास को फिलिस्तीनी सुरक्षा कैदियों के शवों के बदले में उन लोगों के शवों को सौंपने होंगे जो 7 अक्टूबर को मारे गए थे या कैद जिनकी मौत हो गई. इस लेनदेन के बाद गाजा पट्टी में रिकंस्ट्रक्शन का काम किया जाए, जैसा कि कतर, इजिप्ट और यूनाइटेड नेशन्स वादा कर रहे हैं. हमास ये भी चाहता है कि गाजा पट्टी पर इजरायली सेना ने जो नाकेबंदी की हुई है, वो पूरी तरह से खत्म हो जाए. 

शर्तें आने के साथ ही राफा पर शुरू हमले

हमास की शर्तों वाली डील आने के साथ ही जंग और तेज हुई लगने लगी. सोमवार रात दक्षिणी गाजा के राफा इलाके में कई ब्लास्ट हुए. इससे एक दिन पहले ही इजरायली आर्मी ने राफा को खाली करने के लिए वहां बसे लोगों को नोटिस भेजा था. राफा वो हिस्सा है, जहां गाजा के उत्तरी हिस्से से भागे हुए फिलिस्तीनी नागरिक बसे हैं. इजरायली सेना को यकीन है कि राफा में हजारों हमास लड़ाके हैं, साथ ही दर्जनों बंधक भी यहां छिपाए हुए होंगे क्योंकि फिलिस्तीन के पास फिलहाल इससे सुरक्षित जगह नहीं. 

इजरायल की हामी में क्या दिक्कतें

कुल मिलाकर फिलहाल दोनों के बीच युद्धविराम पटरी से उतरता दिख रहा है. इजरायल के पास इसके अपने कारण हैं. शर्तों में सेना को हटाने की बात है, जिसपर इजरायल पहले भी कई बार इनकार कर चुका. उसे डर है कि सेना के हटते ही हमास फिर से फलने-फूलने लगेगा और महीनों की कवायद बेकार हो जाएगी. 

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three phase ceasefire deal hamas israel photo Reuters

होस्टेज-प्रिजनर डील भी मुश्किल हो सकती है. असल में हमास कुछ बंधकों के बदले अपने सैकड़ों लोगों को इजरायली जेलों से छोड़ने की मांग करता रहा. फिलहाल इजरायल के भीतर 19 जेलें हैं, जहां फिलिस्तीनी रखे जाते हैं. इसके अलावा वेस्ट बैंक में जेल है. इनमें से बहुतेरे पत्थरबाजी, इजरायली लोगों और प्रॉपर्टी को नुकसान पहुंचाने की वजह से जेल में हैं. वहीं हमास, फतह, इस्लामिक जिहाद और पॉपुलर फ्रंट से जुड़े आतंकी भी हैं. इन्हें रिहा करना इजरायल के लिए खतरा बन सकता है. 

गाजा में क्या है स्थिति

जमीनी और हवाई हमलों से उत्तरी गाजा पूरी तरह तबाह हो चुका, जबकि मध्य का कुछ हिस्सा बाकी है. दक्षिणी हिस्से राफा में हमलों की शुरुआत मानी जा रही है. इस बीच अलग-अलग सूत्र दावा कर रहे हैं कि इजरायली हमलों में गाजा पट्टी समेत हमास के 35 हजार से ज्यादा लोग मारे गए. वैसे यूनाइटेड नेशन्स की तुर्किए की साइट में मार्च में ये आंकड़ा 31 हजार से ज्यादा था.  वहीं 72 हजार से ज्यादा जख्मी हुए. इजरायली सेना के मुताबिक, दोतरफा हमलों में उसके 247 सैनिक खत्म हुए, जबकि डेढ़ हजार के करीब सैनिक जख्मी हैं.

UN के मुताबिक, गाजा में नाकेबंदी और हमलों की वजह से राशन-पानी नहीं पहुंच पा रहा. इसकी वजह से हर चार में से एक शख्स खाने की कमी से जूझ रहा है. हवाई हमलों से रिहायशी इमारतें ध्वस्त हो रही हैं. हालात ऐसे हैं कि सवा दो मिलियन आबादी वाली पट्टी में 80% लोग घरों से बाहर शिविरों में रहने को मजबूर हैं.

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