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15 अगस्त 2024. भारत अपनी आजादी की 78वीं सालगिरह मना रहा है. वहीं, पड़ोसी मुल्क अफगानिस्तान में तालिबान को दोबारा सत्ता हासिल करने के तीन साल पूरे हो रहे हैं. दोबारा सत्ता में आने के बाद तालिबान ने ढेर सारे वादे किए थे और दावा किया था कि इस बार उनका शासन पहली बार से अलग होगा. हालांकि, ऐसा हुआ नहीं.
अफगानिस्तान की अर्थव्यवस्था संकट से जूझ रही है, बुनियादी ढांचा ध्वस्त होता जा रहा है और गरीबी लोगों को मार रही है. लेकिन तालिबान को इससे फर्क नहीं पड़ता. अपने पहले शासन की तरह ही इस बार भी तालिबान के राज में कोड़े और पत्थर से मारने की सजा मिल रही है, महिलाओं को कॉलेज जाने और काम करने से रोका जा रहा है.
हालांकि, इन सबसे दुनिया का ध्यान हटाने के लिए तालिबान एक नई रणनीति पर काम कर रहा है. एक क्रूर और 90 के दशक के अफगानिस्तान की बजाय वो 'सुंदर' अफगानिस्तान दिखा रहा है.
2023 के आखिर में काबुल एयरपोर्ट पर दो तालिबानी सैनिकों ने ब्रिटिश यूट्यूबर हैरी जैगार्ड का स्वागत किया. एक वीडियो में वो कह रहे थे, 'मैं अमेरिका के कैलिफोर्निया की तुलना में काबुल में ज्यादा सुरक्षित महसूस कर रहा हूं. ये पागलपन है.'
अमेरिका में जन्मीं समांथा शिया यूट्यूब पर एक चैनल @SamanthaTaylorTravels चलाती हैं. उनके चैनल पर कई वीडियो हैं, जिनमें तालिबान राज की वाहवाही की गई है. बताया जाता है कि समांथा शादीशुदा हैं और पाकिस्तान में बस गईं हैं.
अफगानिस्तान में पर्यटकों की संख्या बढ़ाने के लिए तालिबान ट्रैवल इन्फ्लुएंसर को लुभा रहा है. ट्रैवल इन्फ्लुएंसर्स को 12 दिन के लिए 1.5 लाख रुपये से 13 लाख रुपये के टूर पैकेज पर 50% का डिस्काउंट ऑफर किया जा रहा है.
तालिबान की वापसी के बाद से महिलाओं के लिए अकेले यात्रा करने और सार्वजनिक स्थानों पर अन्य महिलाओं के साथ मिलना-जुलना मुश्किल हो गया है. उन्हें सिर से पैर तक बुर्का पहनना पड़ता है. वो बाहर तभी निकल सकती हैं, जब उनके साथ कोई पुरुष हो. हालांकि, ये सारे नियम विदेशी महिला पर्यटकों पर लागू नहीं होते.
दूसरे देशों से आने वाली महिला पर्यटक बाजार और रेस्टोरेंट में जाती हैं, किसी भी उम्र के पुरुषों के साथ मिलती-जुलती हैं. यहां तक कि हथियारबंद तालिबानी लड़ाकों के साथ तस्वीरें भी खिंचवाती हैं.
इंडिया टुडे की ओपन सोर्स इंटेलिजेंस टीम (OSINT) ने विदेशों से आने वाले ट्रैवल इन्फ्लुएंसर्स के एक ही तरह का पैटर्न देखा. इन सभी के साथ टूर गाइड होते हैं, जो उन्हें बताते रहते हैं कि क्या करना है और क्या नहीं. कहां जाना है, कहां नहीं. क्या फिल्माना है और क्या नहीं. उनके व्लॉग की कहानी एक जैसी है. सभी इन्फ्लुएंसर्स अफगानिस्तान को एक सेफ और अनोखी जगह के रूप में दिखाते हैं और तालिबान को स्वागत करने वाला बताते हैं. साथ ही लोगों से ये भी अपील करते हैं कि वो मीडिया में अफगानिस्तान को लेकर जो दिखाया जा रहा है, उस पर भरोसा न करें.
एक यूक्रेनी-अमेरिकी महिला अपने व्लॉग में कहती है, 'पर्यटकों को उस तरह के प्रतिबंध महसूस नहीं होते. हम जहां भी गए, हमारा स्वागत हुआ. क्या अफगानिस्तान सेफ है? ये इस बात पर निर्भर करता है कि ये सवाल आप किससे पूछते हैं.'
2021 में तालिबान की वापसी के बाद अफगानिस्तान में विदेशी पर्यटकों की संख्या में भी बढ़ोतरी देखी गई है. ऐसा इसलिए भी हो सकता है क्योंकि कई लोग दुनिया की अनोखी और खतरनाक जगहों की यात्रा करने में दिलचस्पी रखते हैं.
न्यूज एजेंसी एपी के मुताबिक, 2023 में अफगानिस्तान में करीब सात हजार विदेशी नागरिक आए थे. जबकि, 2021 में ये संख्या मात्र 691 थी. वहीं, 2022 में 2,300 विदेशी पर्यटकों ने अफगानिस्तान की यात्रा की थी. हालांकि, अमेरिका समेत दुनिया के कई देशों ने अपने नागरिकों को अफगानिस्तान न जाने की सलाह दी है.
रिपोर्ट्स बताती हैं कि तालिबान का टूरिस्ट डायरेक्टोरेट टूर ऑपरेटरों और गाइड को ट्रेनिंग दे रहा है, उन्हें महिला पर्यटकों के साथ बातचीत करने के तरीके भी सिखाए जा रहे हैं.
अफगानिस्तान के एकमात्र फाइव स्टार होटल 'द सेरेना' ने कई महीनों बाद फिर से वुमेन्स स्पा और सलून को विदेशी महिलाओं के लिए खोल दिया है.
नकारात्मक धारणाओं का मुकाबला करने और अंतर्राष्ट्रीय मान्यता हासिल करने के लिए तालिबान X (पहले ट्विटर), यूट्यूब और इंस्टाग्राम जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर प्रोपेगैंडा चला रहा है. ऐतिहासिक स्थलों और खूबसूरत जगहों की तस्वीरें और वीडियो पोस्ट किए जा रहे हैं. साथ ही तालिबान के राज में कनेक्टिविटी सुधरने का दावा भी किया जा रहा है.
तीसरी सालगिरह से पहले तालिबान समर्थक हैंडल सोशल मीडिया पर मिलिट्री एक्सरसाइज और अमेरिका की तरफ से छोड़े गए मिलिट्री इक्विपमेंट इस्तेमाल की तस्वीरें-वीडियो पोस्ट कर रहे हैं.