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कट्टर इस्लामिक मुल्क UAE ने कैसे बनाई उदार देश की इमेज, माइनोरिटी को कितनी छूट है वहां?

बुधवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी संयुक्त अरब अमीरात (UAE) में पहले हिंदू मंदिर का उद्घाटन करेंगे. यूएई आधिकारिक तौर पर मुस्लिम मुल्क तो है, लेकिन इसने अपने यहां आतंकवाद को पनपने नहीं दिया. यहां तक कि मुस्लिम ब्रदरहुड जैसे चरमपंथी गुट को इसने टैरर लिस्ट में डाल दिया. मॉडरेट छवि वाले इस देश में माइनोरिटी पर हिंसा तो नहीं होती, लेकिन पूरी छूट भी नहीं है.

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यूएई में कल भव्य मंदिर का उद्घाटन होने जा रहा है. (Photo- PTI)
यूएई में कल भव्य मंदिर का उद्घाटन होने जा रहा है. (Photo- PTI)

यूएई की राजधानी अबू धाबी का पहला हिंदू मंदिर चर्चा में है. लगभग 27 एकड़ में फैले स्वामीनारायण मंदिर परिसर की बेहद खास बात ये है कि खुद यूएई सरकार ने इसके लिए जमीन दान की. माना जा रहा है कि इतने भव्य हिंदू धर्मस्थल का बनना यूएई और भारत के रिश्तों को और मजबूत करेगा. हालांकि ये भी सच है कि यूएई बाकी इस्लामिक देशों से अलग है. यहां तक कि मिडिल ईस्ट में राजनैतिक गुट माने जाते कई संगठनों को उसने अपने यहां बैन कर दिया ताकि देश कट्टरता से बचा रहे. 

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आबादी में ज्यादातर बाहरी नागरिक

अमीरात में दुनिया के बहुत से देशों के नागरिक काम की तलाश में आते रहते हैं. खासकर यहां के दुबई और अबू धाबी शहरों में ज्यादा आबादी बाहरी लोगों की है. यूएई की करीब 9.1 मिलियन जनसंख्या में केवल 11 प्रतिशत ही वहां के नागरिक हैं, बाकी विदेशी लोग हैं. इसमें मुस्लिम सबसे ज्यादा हैं. माइनोरिटी में क्रिश्चियन आबादी सबसे ज्यादा है, जिसके बाद हिंदू, सिख बुद्धिस्ट और बाकी धर्मों के लोग भी शामिल हैं. 

इस्लाम है ऑफिशियल मजहब

इस्लाम संयुक्त अरब अमीरात का आधिकारिक धर्म है. इसे सुरक्षित रखने के लिए यहां पर ईशनिंदा और इस्लाम से किसी और धर्म में जाने को लेकर कड़े कानून रहे. कोई भी मुस्लिम वहां धर्म परिवर्तन नहीं कर सकता. हालांकि यहां का संविधान नॉन-मुस्लिमों को अपने धर्म की प्रैक्टिस की आजादी देता है, जो कि बाकी इस्लामिक देशों से अलग है. 

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united arab emirates hindu temple inauguration pm narendra modi and status of minority photo Unsplash

क्या वाकई अल्पसंख्यकों को बराबरी का हक

कई रिपोर्ट्स ये भी कहती हैं कि ये सारी छूट या आजादी जैसी बातें हाथी के दांत की तरह हैं. असल में हिंदुओं या किसी भी धार्मिक माइनोरिटी को सार्वजनिक तौर पर अपने धर्म से जुड़ी रस्में मनाने या त्यौहार सेलिब्रेट करने पर मनाही है. यूएस स्टेट डिपार्टमेंट ने भी इस बारे में साल 2017 में एक रिपोर्ट जारी की थी, जो दावा करती है कि यूएई में अल्पसंख्यक केवल अपने घरों या इमारतों के भीतर धार्मिक रीति-रिवाजों का पालन कर सकते हैं. 

धार्मिक कामकाज के लिए जमीन नहीं

यूएई की कट्टरता की एक झलक इस बात से दिखती है कि वहां माइनोरिटी जमीन का मालिकाना हक नहीं पा सकती, खासकर धार्मिक कामों के लिए.

यही वजह है कि अमीरात में ताकतवर पदों और आबादी के बाद भी अल्पसंख्यक अपनी मर्जी से धार्मिक स्थल नहीं बना सकते. वे ऐसा तभी कर सकते हैं, जब सरकार जमीन डोनेट करे या लीज पर दे. यही मामला स्वामीनारायण मंदिर के साथ भी देखा गया. सरकार ने खुद ये जमीन डोनेट की थी. अल्पसंख्यक या गैर-नागरिक कई शर्तों के साथ जमीन खरीद सकते हैं. निश्चित जगहों पर ही उन्हें प्रॉपर्टी लेने की छूट है.

united arab emirates hindu temple inauguration pm narendra modi and status of minority photo PTI

मॉडरेट इस्लामिक इमेज पर किया काम 

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इस्लामिक स्टेट के बढ़ने के दौरान अमीरात में एक बदलाव दिखा. इस समेत ज्यादातर अरब देशों ने मॉडरेट इस्लाम की बात शुरू की. यानी धर्म में कट्टरता उतनी ही हो, जितने से काम न बिगड़े. वॉशिंगटन पोस्ट का एक आर्टिकल कहता है कि ये सब तामझाम इसलिए किया गया ताकि अमीर देशों से संबंध बने रहे और इकनॉमी के साथ डिप्लोमेटिक रिश्ता भी सही रहे. 

धार्मिक कट्टरता रोकने के लिए अलग विभाग

देश की मुस्लिम होकर भी कट्टरपंथ से दूर रहने वाली इमेज तब और चमकी, जब वहां की सरकार ने मिनिस्ट्री ऑफ टॉलरेंस एंड कोएग्जिस्टेंस बना दिया.

अबू धाबी स्थित ये मंत्रालय एक साथ मिलकर रहने पर जोर देता है. साथ ही ये पक्का करता है कि सभी धर्मों के लोग अपनी रिलीजियस आजादी का भरपूर इस्तेमाल कर सकें. ये अलग बात है कि इस मंत्रालय पर भी मुस्लिम चरमपंथ पर आंखें बंद रखने का आरोप लगता रहा. कई शोध ये मानते हैं कि मॉडरेट इस्लाम असल में राजनैतिक संबंध बहाल रखने का तरीका है. 

आम मुस्लिम नागरिक के लिए भी कई नियम-कायदे

मस्जिदों में दान लेने या बुक्स या ऑडियो बांटने से पहले स्थानीय प्रशासन से इजाजत लेनी होती है. प्रशासन समय-समय पर खुद जांच करता है कि इमाम फ्राइडे प्रेयर में क्या कह रहे हैं. मस्जिदों के बाहर धार्मिक शिक्षा भी नहीं दी जा सकती. 

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टैररिस्ट गुटों पर दिखाई सख्ती

इसमें भी कोई शक नहीं कि यूएई ने अपने देश के भीतर आतंकवाद पर लगाम कसे रखी. साल 2011 में जब पूरे मिडिल ईस्ट में तख्तापलट और बगावत जैसी घटनाएं हो रही थीं, तभी इस देश ने अपने यहां इस्लामिक चरमपंथ के खिलाफ मुहिम शुरू कर दी. उसने एक के बाद एक कई गुटों पर पाबंदी लगा दी, जिनके बारे संदेह था कि वे दंगा-फसाद या लोगों को उकसाने का काम कर सकते हैं. 

मुस्लिम ब्रदरहुड पर पाबंदी

अपने एंटी-टैररिज्म लॉ के जरिए उसने मुस्लिम ब्रदरहुड संगठन को बैन कर दिया. मिस्र के सबसे पुराने और सबसे बड़े इस्लामिक संगठन पर आरोप लगता रहा कि वो अरब समेत दुनियाभर में इस्लामी कानून लाना चाहता है. संगठन पर आतंकवाद को बढ़ावा देने का भी आरोप लगता रहा. इसे ही यूएई ने बैन करने के साथ हर उस संगठन को अपने यहां से खत्म कर दिया, जिसके तार इससे जुड़े हुए थे.

लेकिन इसका एक पहलू और भी है. यूएई ने भले ही अपने भीतर आतंकी गुटों को पनपने नहीं दिया, लेकिन उसपर आरोप लगता है कि वो पाकिस्तान और अफगानिस्तान समेत कई मुस्लिम देशों में टैरर फंडिंग करता है ताकि वे दूसरे देशों को कमजोर बनाए रखें. कई बार आतंकी गुटों को विदेशी फंडिंग में इसका भी नाम आता रहा. 

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