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US Election 2024: अमेरिकी राष्ट्रपति की सैलरी कई गुना ज्यादा तो भारतीय राष्ट्रपति के पास ये स्पेशल पावर... जानें- दोनों देशों के प्रेसिडेंट्स में क्या फर्क

US Presidential Election 2024: अमेरिका को कुछ ही वक्त में नया राष्ट्रपति मिल जाएगा. हालांकि, राष्ट्रपति जनवरी 2025 में पद की शपथ लेंगे. अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप और कमला हैरिस के बीच कांटे की टक्कर देखने को मिल रही है. जब अमेरिका को नया राष्ट्रपति मिलने वाला है तो जानते हैं कि भारतीय राष्ट्रपति से अमेरिकी राष्ट्रपति कितने अलग होते हैं?

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अमेरिका के राष्ट्रपति व्हाइट हाउस में रहते हैं. (फोटो क्रेडिट- whitehouse.gov)
अमेरिका के राष्ट्रपति व्हाइट हाउस में रहते हैं. (फोटो क्रेडिट- whitehouse.gov)

US Presidential Election 2024: दुनिया के सबसे पुराने लोकतंत्र अमेरिका में राष्ट्रपति चुनाव हो रहे हैं. मुकाबला रिपब्लिकन डोनाल्ड ट्रंप और डेमोक्रेट कमला हैरिस के बीच है. वोटिंग शुरू हो गई है और कुछ ही वक्त में पता चल जाएगा कि दुनिया के सबसे ताकतवर मुल्क की सत्ता कौन संभालेगा.

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अमेरिका के राष्ट्रपति को दुनिया के सबसे ताकतवर नेता के रूप में देखा जाता है. उसकी वजह ये है कि अमेरिका न सिर्फ दुनिया का सबसे ताकतवर मुल्क है, बल्कि कई वैश्विक संस्थाओं पर भी उसका दबदबा है.

एक अमेरिकी राष्ट्रपति होने के नाते वो जो भी फैसले लेते हैं, उसका असर पूरी दुनिया पर दिखाई पड़ता है. यही कारण है कि अमेरिका में होने वाले राष्ट्रपति चुनाव पर भी दुनिया की नजरें बनी रहती हैं.

बहरहाल, अब जब कुछ ही समय में अमेरिका को नया राष्ट्रपति मिल जाएगा तो ऐसे में जानना दिलचस्प होगा कि भारत और अमेरिका के राष्ट्रपति में क्या फर्क होता है?

कैसे चुने जाते हैं राष्ट्रपति?

भारत से इतर अमेरिका के राष्ट्रपति चुनाव की प्रक्रिया काफी जटिल और दिलचस्प है. अभी अमेरिका में जो वोटिंग हो रही है, उसमें लोग सीधे कमला हैरिस या डोनाल्ड ट्रंप को वोट नहीं दे रहे हैं. बल्कि वो इलेक्टर्स चुन रहे हैं. यही इलेक्टर्स आगे चलकर राष्ट्रपति को चुनेंगे.

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अमेरिका के 50 राज्यों से 538 इलेक्टर्स चुने जाते हैं. इनसे इलेक्टोरल कॉलेज बनता है. जिस उम्मीदवार को 270 या उससे ज्यादा इलेक्टोरल कॉलेज मिलते हैं, वो राष्ट्रपति बन जाता है.

दूसरी ओर, भारत में राष्ट्रपति को राज्यसभा, लोकसभा और विधानसभा के सदस्य चुनते हैं. 2022 में जब राष्ट्रपति चुनाव हुए थे, तब राज्यसभा के 233, लोकसभा के 543 और विधानसभा के 4,033 सदस्यों ने वोट डाला था. इन सभी के वोट की वैल्यू 10,86,431 थी. हर राज्य के सांसदों और विधायकों के वोट की वैल्यू अलग-अलग होती है.

इसके अलावा, भारत में जब राष्ट्रपति पद के लिए चुनाव होता है तो हर पार्टी या गठबंधन अपनी तरफ से उम्मीदवार का ऐलान करता है. इसके लिए पार्टी या गठबंधन में कोई चुनाव नहीं होता. लेकिन अमेरिका में राष्ट्रपति उम्मीदवार बनने के लिए भी पार्टी के भीतर वोटिंग होती है.

अमेरिका में शपथ की तारीख

भारत में राष्ट्रपति का कार्यकाल 5 साल तो अमेरिका में 4 साल तय है. भारत में कोई व्यक्ति कितनी भी बार राष्ट्रपति चुनाव लड़ सकता है. लेकिन अमेरिका में किसी भी व्यक्ति को दो से ज्यादा कार्यकाल नहीं मिलता. यानी, अमेरिका में कोई व्यक्ति बहुत से बहुत 8 साल तक राष्ट्रपति रह सकता है.

अमेरिका में अभी चुनाव हो जाएंगे, लेकिन नए राष्ट्रपति का शपथ ग्रहण जनवरी 2025 में होगा. अमेरिका में 20 जनवरी 2025 को राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति का शपथ ग्रहण होगा.

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जबकि, भारत में ऐसी कोई तारीख तय नहीं है. भारत में नए राष्ट्रपति तब शपथ लेते हैं, जब पुराने का कार्यकाल खत्म हो जाता है. जैसे- पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद का कार्यकाल 24 जुलाई 2022 को खत्म  हो गया था तो उनके बाद 25 जुलाई को द्रोपदी मुर्मू ने राष्ट्रपति पद की शपथ ली थी.

ये पावर सिर्फ भारतीय राष्ट्रपति के पास

भारतीय संविधान के अनुच्छेद 361 के तहत राष्ट्रपति जब तक पद पर हैं, तब तक वो किसी भी अदालत के प्रति जवाबदेह नहीं हैं. किसी राष्ट्रपति को न तो गिरफ्तार किया जा सकता है और न ही हिरासत में लिया जा सकता है और न ही कोई अदालत कोई आदेश जारी कर सकती है. राष्ट्रपति को सिविल और क्रिमिनल, दोनों ही मामलों में छूट मिली है. हालांकि, पद से हटने के बाद उन्हें गिरफ्तार या हिरासत में लिया जा सकता है.

लेकिन अमेरिका में ऐसा नहीं है. अमेरिका का संविधान राष्ट्रपति को सिविल मामलों में तो छूट देता है, लेकिन अवैध या आपराधिक गतिविधियों में उन्हें आरोपों का सामना करना पड़ सकता है. इतना ही नहीं, राष्ट्रपति के खिलाफ जांच भी की जा सकती है.

इसी तरह, भारत के राष्ट्रपति को महाभियोग के जरिए हटाया जाता है. इसके लिए राज्यसभा और लोकसभा, दोनों सदनों से दो तिहाई बहुमत से महाभियोग प्रस्ताव को पास कराना जरूरी है. जबकि, देशद्रोह, भ्रष्टाचार या गंभीर अपराध के आरोप लगने पर ही अमेरिकी राष्ट्रपति के खिलाफ महाभियोग लाया जा सकता है. 

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इसके अलावा, अमेरिकी संविधान में 1967 में 25वां संशोधन जोड़ा गया था, जिसके बाद राष्ट्रपति को उनकी कैबिनेट भी हटा सकती है. 25वां संशोधन कहता है कि अगर कैबिनेट को लगता है कि राष्ट्रपति अब पद को नहीं संभाल सकते तो बहुमत के साथ एक प्रस्ताव लाकर उन्हें हटाया जा सकता है. इस प्रस्ताव पर उपराष्ट्रपति के हस्ताक्षर भी जरूरी हैं.

काम में क्या अंतर?

भारत में राष्ट्रपति के पास सीमित शक्तियां होती हैं. भारत में वास्तविक शक्तियां प्रधानमंत्री के पास होती हैं. भारतीय राष्ट्रपति केंद्रीय कैबिनेट की सलाह पर ही काम करते हैं. हालांकि, वो तीनों सेनाओं के सुप्रीम कमांडर होते हैं. भारत में कोई भी बिल तभी कानून बनता है, जब राष्ट्रपति उस पर हस्ताक्षर करते हैं.

जबकि, अमेरिका में ऐसा नहीं है. अमेरिका में राष्ट्रपति ही सुप्रीम पावर होते हैं. वो बिना सलाह के भी कोई कानून या आदेश पारित कर सकते हैं. अमेरिकी राष्ट्रपति सिर्फ सरकार ही नहीं, बल्कि देश के भी मुखिया होते हैं. लेकिन भारत में सरकार का मुखिया प्रधानमंत्री होता है.

अमेरिकी राष्ट्रपति चाहें तो संसद के किसी भी बिल या प्रस्ताव को वीटो लगाकर रोक सकते हैं. हालांकि, संसद दो-तिहाई बहुमत से उस वीटो को रद्द भी कर सकती है.

इतना ही नहीं, अगर किसी देश पर परमाणु हमला करना है तो भारत में उसका आदेश सिर्फ प्रधानमंत्री दे सकते हैं. जबकि, अमेरिका में परमाणु हमले का आदेश देने का अधिकार राष्ट्रपति के पास होता है.

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सैलरी में भी बड़ा फर्क

अमेरिकी राष्ट्रपति और भारतीय राष्ट्रपति की सैलरी में जमीन-आसमान का अंतर होता है. भारत के राष्ट्रपति को सालाना 60 लाख रुपये की सैलरी मिलते हैं. इसके अलावा राष्ट्रपति को फ्री मेडिकल, टेलीफोन बिल, आवास, बिजली समेत कई सारे भत्ते भी मिलते हैं.

राष्ट्रपति को आने-जाने के लिए Mercedes-Benz S 600 Pullman Guard गाड़ी मिलती है. राष्ट्रपति के पास स्पेशल गार्ड होते हैं, जिन्हें प्रेसिडेंशियल बॉडीगार्ड कहा जाता है. इनकी संख्या 86 होती है.

जबकि, अमेरिकी राष्ट्रपति की सालाना तनख्वाह 4 लाख डॉलर यानी 3.36 करोड़ रुपये होती है. उन्हें खर्च के लिए अलग से सालाना 50 हजार डॉलर (42 लाख रुपये) मिलते हैं. राष्ट्रपति जब पहली बार व्हाइट हाउस में एंट्री करते हैं तो उन्हें 1 लाख डॉलर (करीब 84 लाख रुपये) मिलते हैं, जिससे वो घर को अपने हिसाब से सजा सकें. इसके अलावा, अमेरिकी राष्ट्रपति को एंटरटेन्मेंट और बाकी खर्चों के लिए 19 हजार डॉलर (करीब 16 लाख रुपये) मिलते हैं.

अमेरिकी राष्ट्रपति की सिक्योरिटी सीक्रेट सर्विस के एजेंट संभालते हैं. वो एयरफोर्स वन विमान से यात्रा करते हैं. अमेरिकी राष्ट्रपति अपनी लिमोजिन कार में ही सफर करते हैं. इसे 'द बीस्ट' नाम दिया गया है. इस कार को अमेरिकी कंपनी जनरल मोटर्स ने तैयार किया है. इसे दुनिया की सबसे सुरक्षित कार माना जाता है. ये कार इतनी सुरक्षित है कि इस पर न्यूक्लियर अटैक और केमिकल अटैक तक का असर नहीं होता. इस कार में मशीन गन, टियर गैस सिस्टम, फायर फाइटिंग और नाइट विजन कैमरा जैसे इक्विपमेंट होते हैं. जरूरत पड़ने पर कार से दुश्मन पर हमला भी किया जा सकता है.

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