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उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने हलाल सर्टिफिकेट के साथ बेचे जाने वाले उत्पादों पर रोक लगा दी. ये रोक पूरे प्रदेशभर में रहेगी.
योगी सरकार ने ये फैसला 17 नवंबर को लखनऊ में दर्ज FIR के बाद लिया. हजरतगंज पुलिस थाने में दर्ज FIR में आरोप लगाया गया था कि वर्ग विशेष के बीच अपने उत्पादों की बिक्री बढ़ाने के लिए कुछ कंपनियां हलाल सर्टिफिकेट के साथ अपने उत्पाद बेच रहे हैं.
इसके बाद 19 नवंबर को यूपी सरकार ने हलाल सर्टिफाइड खाद्य उत्पादों के उत्पादन, वितरण, बिक्री और भंडारण पर पूरी तरह से रोक लगा दी है.
हालांकि, सरकार ने हलाल सर्टिफाइड खाद्य उत्पादों के निर्यात को इस प्रतिबंध से छूट दी है. यानी, हलाल सर्टिफाइड खाद्य उत्पादों का एक्सपोर्ट तो किया जा सकता है, लेकिन उन्हें यूपी में नहीं बेचा जा सकता.
पर ये रोक क्यों?
सरकार ने एक बयान जारी कर बताया कि हलाल सर्टिफिकेट जारी कर न सिर्फ 'अनुचित लाभ' कमाया जा रहा है, बल्कि ये समाज को बांटने की सोची-समझी साजिश भी है. सरकार ने इसे 'देशविरोधी गतिविधि' बताया है.
बयान में कहा गया है कि यूपी के भीतर हलाल सर्टिफाइड फूड प्रोडक्ट्स, कॉस्मेटिक प्रोडक्ट्स, मेडिकल इक्विपमेंट और दवाओं की उत्पादन, खरीद-बिक्री, भंडारण और वितरण पर रोक लगाई जा रही है.
सरकार ने आरोप लगाया है कि हलाल सर्टिफाइड उत्पादों की बिक्री से जो कमाई होती है, उसका कुछ हिस्सा असामाजिक या राष्ट्रविरोधी तत्वों को दिए जाने की आशंका भी है.
बयान में आगे कहा गया है, यूपी सरकार को हाल ही में जानकारी मिली है कि डेयरी आइटम्स, शक्कर, बेकरी प्रोडक्ट्स, पेपरमिंट ऑयल, रेडी-टू-ईट खाद्य उत्पादन और खाद्य तेल को हलाल सर्टिफिकेट का लेबल लगाकर बेचा जा रहा है. इसके अलावा कुछ दवाइयां, मेडिकल डिवाइसेस और कॉस्मेटिक प्रोडक्ट्स की पैकेजिंग पर भी हलाल सर्टिफाइड लिखा जा रहा है.
लेकिन ये हलाल है क्या?
हलाल असल में अरबी भाषा का शब्द है, जिसका मतलब होता है- 'जायज' या 'मुनासिब.' इस्लाम में खानपान से जुड़े मामले में दो शब्दों का इस्तेमाल होता है. पहला- हलाल. दूसरा- हराम.
हलाल से मतलब है जो इस्लामी परंपराओं और मान्यताओं के हिसाब से तैयार किया गया है. वहीं, हराम से मतलब उन चीजों से है जिनपर इस्लाम में प्रतिबंध है. जैसे- पोर्क (सुअर का मांस) और शराब.
भारत में हलाल का इस्तेमाल मांस काटने की एक तकनीक के लिए भी किया जाता है. इस्लाम में हलाल के जरिए ही चिकन या मटन काटा जाता है. इस तकनीक में जानवर के गर्दन की नस काट दी जाती है, ताकि धीरे-धीरे उसका सारा खून बह जाए और उसकी मौत हो जाए.
हलाल के अलावा मांस काटने की दूसरी तकनीक झटका है. झटका में जानवर की गर्दन पर झटके से वार किया जाता है और तुरंत उसकी मौत हो जाती है. मुस्लिम झटका मांस नहीं खाते हैं.
अब बात हलाल सर्टिफिकेट की...
मांस को तो हलाल सर्टिफिकेट के साथ बेचा जाता है. लेकिन अब मांस के अलावा दूसरे उत्पादों को भी हलाल सर्टिफिकेट के साथ बेचा जाने लगा है.
हालांकि, खाद्य उत्पादों या फिर मेडिकल से जुड़ी चीजों और दवाओं के लिए हलाल सर्टिफिकेट जारी करने के लिए कोई सरकारी अथॉरिटी नहीं है.
यूपी सरकार की ओर से जारी आदेश के मुताबिक, दवाओं, मेडिकल डिवाइसेस और कॉस्मेटिक प्रोडक्ट्स पर हलाल सर्टिफाइड लेबल करने का कोई सरकारी नियम नहीं है.
ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक एक्ट 1940 के तहत दवाओं, मेडिकल डिवाइसेस और कॉस्मेटिक प्रोडक्ट्स पर हलाल सर्टिफिकेशन का लेबल लगाना अपराध है.
वहीं, खाद्य उत्पादों को सर्टिफिकेशन फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड अथॉरिटी ही जारी करती है. यूपी सरकार के मुताबिक, खाद्य उत्पादों को हलाल सर्टिफाइड करने से न सिर्फ फूड क्वालिटी को लेकर कन्फ्यूजन की स्थिति पैदा होती है, बल्कि ये सरकारी नियमों का उल्लंघन भी है.
ये सारा बवाल कैसे शुरू हुआ?
हलाल सर्टिफिकेशन का ये सारा बवाल शैलेंद्र शाम नाम के व्यक्ति की शिकायत से शुरू हुआ. शैलेंद्र शर्मा ने लखनऊ के हजरतगंज थाने में शिकायत की थी.
अपनी शिकायत में शर्मा ने चेन्नई की हलाल इंडिया प्राइवेट लिमिटेड, दिल्ली की जमीयत उलेमा-ए-हिंद, मुंबई की हलाला काउंसिल ऑफ इंडिया और जमीयत उलेमा महाराष्ट्र के साथ-साथ अज्ञात कंपनियों और लोगों पर आरोप लगाया था.
शर्मा का कहना था कि कुछ कंपनियां और लोग एक वर्ग विशेष में अपनी बिक्री बढ़ाने के लिए हलाल सर्टिफिकेट जारी कर रही हैं. पूरे देश में हलाल सर्टिफाइड उत्पाद देखे जा सकते हैं, जो आस्था के साथ खिलवाड़ है.
उन्होंने आरोप लगाया था कि ये सब एक समुदाय विशेष के उत्पाद की बिक्री घटाने के लिए किया जा रहा है.
शर्मा ने दावा किया था कि इसके जरिए अनुचित लाभ में करोड़ों रुपये कमाए जा रहे हैं और इससे आतंकवादी संगठनों और राष्ट्रविरोधी संगठनों को फंडिंग किए जाने की आशंका है.
शर्मा की शिकायत पर पुलिस ने केस दर्ज कर लिया है. उनका बयान भी दर्ज किया जा चुका है. साथ ही अब हलाल सर्टिफिकेट जारी करने वाली कंपनियों और संस्थाओं को भी नोटिस भेजने की तैयारी है.