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उत्तरकाशी की सिलक्यारा सुरंग में 41 मजदूरों को फंसे हुए आज 12 दिन हो गए हैं. इन मजदूरों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए तेजी से ऑपरेशन चल रहा है.
यहां मौजूद नोडल अफसर नीरज खैरवाल ने बताया कि सारे मजदूर ठीक हैं और मेंटल हेल्थ एक्सपर्ट लगातार उनसे बात कर रहे हैं.
बुधवार तक 45 मीटर तक खुदाई हो चुकी थी. आज सुबह से अब तक 1.8 मीटर ड्रिलिंग और हो चुकी है. अब तक कुल 46.8 मीटर तक ड्रिलिंग हो चुकी है.
सुरंग के बाहर 41 एम्बुलेंस खड़ी हुई हैं. मजदूरों के बाहर आते ही इन्हें सबसे पहले एम्बुलेंस में ही ले जाया जाएगा. और उसके बाद अस्पताल.
एक-एक करके बाहर आएंगे मजदूर
एक बार जब रेस्क्यू पाइप मजदूरों तक पहुंच जाएगा तो उसके बाद NDRF की टीम एक-एक करके सभी मजदूरों को बाहर निकालेगी.
NDRF की 21 सदस्यों की एक टीम मजदूरों को बाहर निकालने के लिए तैयार है. इनके पास ऑक्सीजन पैक मास्क हैं. साथ ही खास पहियों वाले स्ट्रेचर हैं. इन्हीं स्ट्रेचर पर लेटाकर रेस्क्यू पाइप के जरिए बाहर निकाला जाएगा.
लेकिन इन सबसे पहले 800 मिलीमीटर के रेस्क्यू पाइप को NDRF और SDRF की टीम साफ करेगी, ताकि उसके अंदर जरा सा भी मलबा या मिट्टी न रह जाए.
800 मिमी का पाइप काफी है?
NDRF के डीजी अतुल करवाल ने बताया कि मजदूरों को निकालने के लिए 800 मिमी का रेस्क्यू पाइप काफी है.
उन्होंने 800 मिमी पाइक की चौड़ाई 32 इंच है, जो काफी है. उन्होंने दावा किया कि अगर इसकी चौड़ाई 22 से 24 इंच होती, तब भी मजदूरों को निकाल लिया जाता. हमारी टीम ने इसकी रिहर्सल भी की है.
60 मीटर का होगा रेस्क्यू पाइप
मशीनों के जरिए सुरंग के अंदर कुल 57 मीटर की ड्रिलिंग की जानी है. हालांकि, इसे 60 मीटर तक बढ़ाया जाएगा, ताकि थोड़ा स्पेस मिल सके.
डीजी करवाल ने बताया कि स्टील का 6 मीटर लंबा एक और पाइप डाला जा रहा है, ताकि पूरी लंबाई 60 मीटर की हो जाए.
बाहर आने में और कितना समय?
पीएमओ के पूर्व सलाहकार भास्कर खुल्बे ने बताया कि बुधवार रात ड्रिलिंग के दौरान लोहे का एक स्ट्रक्चर सामने आ गया था, जिस कारण ऑपरेशन रोकना पड़ा. हालांकि, आज सुबह उसे हटा दिया गया है, जिसके बाद ड्रिलिंग का काम फिर से शुरू हो गया है.
भास्कर खुल्बे के मुताबिक, अगर सबकुछ ठीक रहा तो अगले 12 से 14 घंटे में मजदूरों तक पहुंचा जा सकेगा. जब रेस्क्यू पाइप से दूसरा छोर नजर आने लगेगा, तब NDRF की टीम इसके जरिए मजदूरों के पास पहुंचेगी.
टीम के पास कम ऊंचाई वाले स्ट्रेचर हैं. इस पर मजदूरों को लेटाया जाएगा और फिर दूसरी तरफ से रस्सी के जरिए इसे खींचा जाएगा.
खुल्बे का कहना है कि सभी मजदूरों को एक-एक करके बाहर निकाला जाएगा. इस पूरी प्रक्रिया में तीन घंटे लग सकते हैं.
बाहर आने के बाद क्या होगा?
सुरंग के बाहर 41 एम्बुलेंस खड़ी हैं. मजदूर जैसे ही बाहर आएंगे, उन्हें सबसे पहले अस्पताल ले जाया जाएगा. चिन्यालीसौड़ में कम्युनिटी हेल्थ सेंटर में 41 बेड का एक स्पेशल वार्ड बनाया गया है.
अधिकारियों का कहना है कि अगर जरूरत पड़ेगी तो मजदूरों को दूसरे किसी अस्पताल में भेजा जाएगा. NDRF के डीजी का कहना है कि फंसे हुए मजदूरों की स्थिति ठीक है.
उन्होंने कहा, सुरंगों में काम करने वाले लोग मानसिक रूप से काफी मजबूत होते हैं और उन्हें पता है कि बाहर निकालने के लिए तेजी से ऑपरेशन चलाया जा रहा है. इसलिए वो आशावादी हैं.