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जब आवारा कुत्ते को लेकर दो देशों में मच गया था कत्लेआम, UN को देना पड़ा था सीजफायर का आदेश

TMC सांसद महुआ मोइत्रा और उनके पूर्व पार्टनर जय अनंत देहाद्राई के बीच हेनरी नाम के कुत्ते को लेकर लड़ाई चल रही है. ये तो दो लोगों के बीच विवाद है, लेकिन एक मामला ऐसा भी हुआ, जब स्ट्रे डॉग को लेकर दो देशों के बीच युद्ध हो गया था. दूसरे वर्ल्ड वॉर के ऐन बाद हुई इस जंग में भारी नुकसान भी हुआ था.

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स्ट्रे डॉग को लेकर भी ग्रीस और बुल्गेरिया में लड़ाई हो चुकी है. सांकेतिक फोटो (Unsplash)
स्ट्रे डॉग को लेकर भी ग्रीस और बुल्गेरिया में लड़ाई हो चुकी है. सांकेतिक फोटो (Unsplash)

महुआ मोइत्रा पर रिश्वत के बाद अब कुत्ता चोरी का भी आरोप लगा है. हेनरी नाम के रॉटविलर नस्ल के इस डॉग के बारे में वकील जय अनंत का कहना है कि असल में हेनरी को उन्होंने खरीदा था. अब महुआ ने कथित तौर पर उसे अगवा कर लिया है और जय पर CBI का केस वापस लेने का दबाव बना रही हैं.

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दो देश भी भिड़ चुके हैं

सोशल मीडिया पर हेनरी को दुलारती हुआ महुआ की कई वीडियो वायरल हैं. इस बीच जय 3 साल के अपने इस कुत्ते को वापस लेने के लिए जी-जान से लगे हुए हैं. ये तो हुआ ताजा फसाद. लेकिन कुत्तों को लेकर प्यार देशों के बीच भी लड़ाई करवा सकता है. ऐसा ही एक मामला वॉर ऑफ पेट्रिक के नाम से जाना जाता है. इसमें ग्रीस और बुल्गेरिया आपस में भिड़ गए थे. 

बार-बार हो रही थी जंग

ग्रीस और बुल्गेरिया के बीच रिश्ते 20वीं सदी की शुरुआत से ही बिगड़ने लगे थे. दोनों के बीच मैसेडोनिया को लेकर ठनी हुई थी. दोनों ही इसपर अपना-अपना दावा करते. इसी बात को लेकर साल 1904 में उनके बीच लड़ाई शुरू हुई, जो अगले चार सालों तक चलती रही. पहले विश्व युद्ध ने दबी हुई चिंगारी को फिर उकसा दिया और दोनों दोबारा लड़ पड़े. लड़ाई खत्म होने पर ऊपर से तो शांति दिखने लगी, लेकिन अंदर-अंदर दोनों देश एक-दूसरे के लिए शक और गुस्से से भरे हुए थे. 

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war over a stray dog in bulgaria and greece mahua moitra and jai anant fight over henry dog photo Getty Images
ग्रीस और बुल्गेरिया के बीच भी सीमा विवाद चलता रहा. सांकेतिक फोटो (Getty Images)

इस तरह हुई शुरुआत

अक्टूबर 1925 की बात है. ग्रीस और बुल्गेरिया दोनों ही के सिपाही अपने बॉर्डर पर पहला दे रहे हैं. सुबह का समय रहा होगा, तभी ग्रीस के एक सैनिक ने अपने इलाके से एक कुत्ते को बॉर्डर पार करते देखा. सेना के लोग आमतौर पर डॉग-लवर माने जाते हैं. देमिर कपाऊ बॉर्डर पर तैनात ये सैनिक भी कुछ ऐसा ही रहा होगा. कुत्ते को अपने इलाके में वापस लाने के लिए वो आगे बढ़ा और गलती से सीमा लांघकर बुल्गेरिया पहुंच गया. दूसरी तरफ के सैनिक ने इसे घुसपैठ मान लिया और गोली चला दी.

ग्रीक सैनिक की मौत के बाद मामला गरमाता चला गया और फिर जो हुआ, उसे इतिहास में 'वॉर ऑफ द स्ट्रे डॉग' के नाम से जाना जाता है. 

हर्जाना मांगने लगी ग्रीक सेना

बुल्गेरिया की तत्कालीन सरकार ने माना कि उनकी तरफ से कोई गलती हुई है. यहां तक कि उन्होंने मामले की जांच के लिए एक कमेटी बनाने तक की बात की. लेकिन ग्रीक के लेफ्टीनेंट जनरल थियोडोरॉस को बुल्गेरिया की बात हजम नहीं हुई. उन्होंने मान लिया कि दुश्मन देश ने जान-बूझकर उनके सैनिक को मारा है. उन्होंने बुल्गेरिया को चेतावनी दी कि 2 दिनों के भीतर वे जांच करके दोषी को सजा दें. साथ ही आधिकारिक माफी मांगें, और मृत सैनिक के परिवार को मुआवजा दें. 

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war over a stray dog in bulgaria and greece mahua moitra and jai anant fight over henry dog photo Unsplash
वॉर ऑफ द स्ट्रे डॉग को लेकर अब दोनों ही देश कोई बात नहीं करते. 

करने लगे घुसपैठ 

बुल्गेरिया को 24 घंटों के भीतर 2 करोड़ सत्तर लाख के करीब की राशि 24 घंटों के भीतर देनी थी. दूसरे विश्व युद्ध से थके हुए देश के पास न तो इतने पैसे थे, और न ही इतना कुछ झेलने की हिम्मत. उन्हें लगा कि एक मामूली स्ट्रे डॉग की आड़ में ग्रीस उनसे बदला दे रहा है. दोनों एक-दूसरे की सीमाओं में घुसने लगे और लड़ाई शुरू हो गई. ग्रीस ने मौका देखकर बुल्गेरिया के बॉर्डर पर कब्जा करना भी शुरू कर दिया, जिसे वो अपना मानता रहा था. 

सर्बिया भी लड़ाई में कूद पड़ा

जंग इन्हीं दो देशों तक सिमटी नहीं रही, बल्कि इसमें सर्बिया भी शामिल हो गया. वो ग्रीस के साथ बुल्गेरिया को तबाह करना चाहता था. इसके बदले में ग्रीस ने वादा किया कि वो उनके यहां बड़ा इनवेस्टमेंट करेगा. आम भाषा में कहें तो एक स्ट्रे डॉग की वजह से पूरा रायता फैल चुका था, जो किसी भी तरह से सिमटने में नहीं आ रहा था. 

लीग ऑफ नेशन्स ने दिया दखल

आखिरकार लीग ऑफ नेशन्स (संयुक्त राष्ट्र संघ का पुराना रूप, जिसमें बड़े यूरोपियन देश शामिल थे) को इसमें दखल देना पड़ा. उसने तुरंत सीजफायर का आदेश दिया. उन्होंने ग्रीस को बुल्गेरिया से हटने के साथ ही उसे 45 हजार डॉलर देने को भी कहा. लगभग एक हफ्ते चली इस लड़ाई में आधिकारिक तौर पर तो 50 सैनिक मारे गए, लेकिन माना जाता है कि हताहतों की संख्या इससे कहीं ज्यादा रही होगी. स्ट्रे डॉग के पीछे लड़ाई ने दोनों देशों को इतना शर्मिंदा कर दिया, कि वे इसका ठीक से दस्तावेजीकरण करने से भी बचते रहे. 

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