इन दिनों देश की राजनीति में 'मछली' शब्द चर्चा में बना हुआ है. पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी 'मछली' को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बीजेपी पर हमलावर हो गईं हैं.
मछली को ममता बनर्जी ने बंगाल की अस्मिता से जोड़ दिया है और अब इसे बीजेपी के खिलाफ इस्तेमाल करने में जुट गईं हैं.
सोमवार को कूचबिहार की रैली में ममता बनर्जी ने कहा कि 'बीजेपी सुबह की चाय के साथ 'गोमूत्र' पीने को कहेगी. दोपहर के खाने के साथ 'गोबर' खाने को कहेगी. आप क्या खाते हैं? ये सब बीजेपी तय करेगी.'
इसके साथ ही तृणमूल कांग्रेस ने अपने 'मां-माटी और मानुष' के नारे में एक और 'एम' जोड़ दिया है, जिसका मतलब 'माछ' यानी मछली है.
राजनीति में कैसे हुई मछली की एंट्री?
इसकी शुरुआत हुई बिहार के पूर्व डिप्टी सीएम तेजस्वी यादव के एक वीडियो से. तेजस्वी के साथ इस वीडियो में VIP पार्टी के प्रमुख मुकेश सहनी भी थे. इस वीडियो में तेजस्वी मछली खाते नजर आ रहे थे.
ये वीडियो 8 अप्रैल का था, लेकिन इसे 9 अप्रैल को सोशल मीडिया पर पोस्ट किया गया. इसके बाद तेजस्वी को बीजेपी ने घेर लिया.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी तेजस्वी पर हमला करते हुए कहा, 'नवरात्र के समय इस वीडियो को दिखा-दिखाकर किसको खुश कर रहे हैं?' पीएम मोदी ने कहा था, कुछ लोगों को जनता की भावनाओं से कुछ लेना-देना नहीं है. इनको लोगों की भावनाओं से खिलवाड़ करने में मजा आता है.
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टीएमसी ने बनाया मुद्दा
लोकसभा चुनाव में टीएमसी ने मछली को मुद्दा बना लिया है. ममता बनर्जी ने एक रैली में कहा कि अब वो तय करेंगे कि आपको लंच और डिनर में क्या खाना है?
एक अंग्रेजी अखबार की रिपोर्ट के मुताबिक, टीएमसी जल्द ही 'बीजेपी हटाओ, माछ-भात खाओ' कैंपेन भी शुरू कर सकती है.
टीएमसी सांसद और ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी ने एक रैली में कहा, 'प्रधानमंत्री को शायद इस बारे में पता नहीं है कि बंगाली परिवारों में कुछ धार्मिक कार्यक्रम माछ और मंगशो (मांस) के बिना अधूरे माने जाते हैं.'
टीएमसी के राज्यसभा सांसद डेरेक ओ'ब्रायन ने भी इसे लेकर तंज कसा. दरअसल, अभिषेक बनर्जी ने एक्स पर लिखा था कि आईटी टीम ने उनके चॉपर की तलाशी ली थी और उन्हें कुछ नहीं मिला. इस पर डेरेक ओ'ब्रायन ने कहा कि क्या आईटी की टीम 'फिश सैंडविच' को ढूंढ रहे थे?
बंगाल के लिए अहम है मछली!
दरअसल, पश्चिम बंगाल में मछली रसोई की शान मानी जाती है. वहां कई त्योहारों और धार्मिक कार्यक्रमों में भी मछली खाई जाती है.
2018 में ममता सरकार ने 'एकुशे अन्नपूर्णा' नाम से एक योजना शुरू की थी, जिसके तहत बंगाल में प्रसिद्ध डिश 'माछेर झोल' यानी मछली-चावल मात्र 21 रुपये में उपलब्ध कराया जाता है.
मछली बंगाल की संस्कृति का अहम हिस्सा है. बंगाल में सबसे ज्यादा हिलसा मछली खाई जाती है. सरस्वती पूजा के दौरान हिलसा मछली खाई जाती है. काली पूजा के भोग में भी मछली को शामिल किया जाता है.
टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी ने कहा, 'प्रधानमंत्री कहते हैं कि जो लोग नवरात्रि में मछली खाते हैं, वो हिंदू नहीं हैं. वो मुगल हैं. मेरा उनसे सवाल है कि क्या उन्हें पता है कि बंगाल में कई सारे हिंदू परिवारों में दुर्गा पूजा और काली पूजा की रस्में माछ (मछली) और मंगशो (मांस) के बिना पूरी नहीं होतीं.'
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बंगाल में कितने लोग मछली खाते हैं?
2019 से 2021 के बीच हुए नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे (NFHS) के आंकड़ों के मुताबिक, भारत की 72 फीसदी आबादी ऐसी है, जो मछली खाती है.
इस सर्वे में सामने आया था कि त्रिपुरा, मणिपुर, असम और अरुणाचल प्रदेश की 99 फीसदी से ज्यादा आबादी मछली खाती है. पश्चिम बंगाल में 98.60 फीसदी आबादी मछली खाती है.
वर्ल्ड फिश इंडिया की फरवरी 2024 में आई रिपोर्ट बताती है कि 2005-06 से 2019-21 के बीच भारत में मछली खाने वालों की आबादी 66 फीसदी से बढ़कर 72 फीसदी के पार चली गई है. वहीं, इस दौरान पश्चिम बंगाल में मछली काने वालों की आबादी 97.45 फीसदी से बढ़कर 98.60 फीसदी हो गई है.
इसी रिपोर्ट के मुताबिक, पश्चिम बंगाल की लगभग 66 फीसदी आबादी ऐसे है, जो हर हफ्ते कम से कम एक बार मछली खाती है. हालांकि असम, त्रिपुरा और ओडिशा अब भी आगे हैं.
बंगाली लोगों की पसंद है हिलसा
पश्चिम बंगाल के लोगों की सबसे पसंदीदा मछली हिलसा है. हिलसा को सबसे अच्छी किस्म की मछली माना जाता है. ये मछली बांग्लादेश से भारत आती है. दुर्गा पूजा के दौरान इनकी खपत भी काफी बढ़ जाती है. पिछले साल दुर्गा पूजा के दौरान भारत के मछली व्यापारियों ने लगभग चार हजार मीट्रिक टन हिलसा मछली बांग्लादेश से खरीदी थी.
बांग्लादेश से आने वाली हिलसा मछली की सबसे ज्यादा खपत बंगाल में ही होती है. हिलसा मछली को खरीदने के लिए बांग्लादेश और भारत, दोनों ही सरकारों से मंजूरी लेनी होती है. 2022 में बांग्लादेश ने 2,900 मीट्रिक टन हिलसा मछली के आयात को मंजूरी दी थी. हालांकि, इसमें से 1,300 मीट्रिक टन मछली का ही आयात हुआ था.