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200 करोड़ की शादी से ED के रडार पर Mahadev Betting App... इसमें कैसे फंस गए रणबीर कपूर?

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने बॉलीवुड एक्टर रणबीर कपूर को समन जारी किया है. उन पर महादेव बेटिंग ऐप के प्रमोटरों से पैसे लेने का आरोप है. महादेव बेटिंग ऐप के खिलाफ ईडी मनी लॉन्ड्रिंग की जांच कर रही है. ये ऐप 200 करोड़ की शादी के बाद ईडी के रडार पर आ गई थी.

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ईडी ने रणबीर कपूर को समन भेजा है. (फाइल फोटो)
ईडी ने रणबीर कपूर को समन भेजा है. (फाइल फोटो)

इस साल फरवरी में संयुक्त अरब अमीरात में एक शादी होती है. इस शादी में 200 करोड़ रुपये कैश खर्च किए जाते हैं. प्राइवेट जेट से रिश्तेदार भारत से यूएई आते हैं. नाच-गाना होता है. बड़े-बड़े सेलेब्रिटीज परफॉर्म करते हैं. 

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किसी शादी में इतनी रईसी दिखाई जाए और वो जांच के दायरे में न आए, ऐसा हो नहीं सकता. हुआ भी यही. प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की इस पर नजर पड़ी. और फिर खुलासा हुआ मनी लॉन्ड्रिंग के एक बड़े नेटवर्क का.

ये शादी सौरभ चंद्राकर की थी. सौरभ छत्तीसगढ़ के भिलाई का रहने वाला है. सौरभ ने अपने दोस्त रवि उप्पल के साथ मिलकर 'महादेव ऑनलाइन ऐप' शुरू की थी. इस ऐप पर ऑनलाइन सट्टा लगाया जाता है. 

सौरभ और उसका साथी रवि उप्पल तो दुबई से ही इस ऐप को चलाते हैं. लेकिन इससे अब बॉलीवुड सेलेब्रिटीज की मुसीबतें बढ़नी शुरू हो गईं हैं.

बुधवार को ईडी ने बॉलीवुड एक्टर रणबीर कपूर को समन भेजा है. उन्हें छह अक्टूबर को रायपुर स्थित ईडी दफ्तर में पूछताछ के लिए बुलाया है. हालांकि, रणबीर कपूर ने दो हफ्ते का समय मांगा है.

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रणबीर कपूर को क्यों भेजा समन?

ईडी के मुताबिक, रणबीर पर महादेव ऐप को ऑनलाइन प्रमोट करने के लिए प्रमोटर्स से पैसे लेने का आरोप है.

एजेंसी ने बताया कि समन भेजने से पहले कई बार रणबीर से संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला.

न्यूज एजेंसी ने सूत्रों के हवाले से बताया है कि 14-15 सेलेब्रिटीज ईडी के रडार पर हैं और जल्द ही उन्हें भी समन जारी किया जा सकता है.

क्या है पूरा मामला?

फरवरी 2023 में सौरभ चंद्राकर ने यूएई के रास अल-खैमा में शादी है. आरोप है कि इस शादी में महादेव ऐप के प्रमोटरों ने 200 करोड़ रुपये नकद खर्च किए.

परिवार के सदस्यों को नागपुर से यूएई ले जाने के लिए प्राइवेट जेट किराये पर लिए गए थे. इस शादी में नामचीन हस्तियों को बुलाया गया था.

ईडी के मुताबिक, इस शादी के लिए वेडिंग प्लानर्स, डांसर्स और डेकोरेटर्स वगैरह को मुंबई से बुलाया गया था. और इन सबको कैश पेमेंट के लिए हवाला का इस्तेमाल किया गया था.

डिजिटल सबूतों के आधार पर ईडी ने दावा किया है कि योगेश पोपट की आर-1 इवेंट्स प्राइवेट लिमिटेड को 112 करोड़ रुपये नकद दिए गए. इसके अलावा 42 करोड़ रुपये होटल बुकिंग्स पर खर्च हुए.

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ईडी का दावा है कि उसने योगेश पोपट, मिथिलेश और इससे जुड़े बाकी लोगों की तलाशी में 112 करोड़ रुपये की हवाला मनी के सबूत इकट्ठे किए हैं. इसके अलावा योगेश पोपट की निशानदेही पर 2.37 करोड़ रुपये की बेहिसाब नकदी भी बरामद की गई.

सौरभ चंद्रकार और रवि उप्पल.

जांच में अब तक क्या-क्या सामने आया?

ईडी ने 15 सितंबर को एक प्रेस रिलीज जारी की थी. इसमें बताया था कि ईडी ने भोपाल के धीरज आहूजा और विशाल आहूजा की मेसर्स रैपिड ट्रैवल्स की तलाशी ली थी.

ये कंपनी महादेव ऐप के प्रमोटरों, परिवार, कारोबार से जुड़े लोगों और उन सभी सेलेब्रिटीज के लिए टिकट बुक करने का काम करती थी जो महादेव ऐप, रेड्डी अन्ना ऐप और फेयप्ले डॉट कॉम जैसी सट्टेबाजी वेबसाइट को एंडोर्स करते थे.

ईडी के मुताबिक, सट्टेबाजी के जरिए जो नकद कमाई होती थी, उसे आहूजा ब्रदर्स बड़ी चतुराई से मेन टिकट प्रोवाइडर्स के पास जमा करवा देते थे. और बाकी वॉलेट बैलेंस से टिकटों की बुकिंग करते थे. ये भी पता चला है कि महादेव ग्रुप के कई कार्यक्रमों का ट्रैवल अरेंजमेंट रैपिड ट्रैवल्स ही संभालती थी.

ये कंपनी संभालती थी हवाला कारोबार

ईडी ने महादेव ऐप के मनी लॉन्ड्रिंग के कारोबार में शामिल लोगों की पहचान भी की है. ईडी ने बताया कि कोलकाता का विकास छापरिया, महादेव ऐप के सारे हवाला कारोबार को संभाल रहा था.

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ईडी ने विकास छापरिया और उसके साथी गोविंद केडिया के ठिकानों पर तलाशी ली थी. इस दौरान पता चला कि केडिया की मदद से छापरिया ने अपनी कंपनियों- परफेक्ट प्लान इन्वेस्टमेंट, एग्जिम जनरल ट्रेडिंग और टेकप्रो आईटी सॉल्यूशन में फॉरेन पोर्टफोलियो इन्वेस्टमेंट के जरिए भारतीय शेयर बाजार में भारी निवेश किया था.

ईडी ने उनके ठिकानों के साथ-साथ उनके सहयोगियों के ठिकानों की भी तलाशी ली और पाया कि छापरिया ने विदेशी पोर्टफोलियो निवेश के साथ-साथ मेसर्स टेकप्रो आईटी सॉल्यूशंस एलएलसी, मेसर्स परफेक्ट प्लान इंवेस्टमेंट्स एलएलपी और मेसर्स एक्ज़िम जनरल ट्रेडिंग एफजेडसीओ जैसी अपनी संस्थाओं के जरिए, भारतीय शेयर बाज़ार में भारी निवेश किया.

महादेव ऐप मामले में छापेमारी के दौरान ईडी ने ढाई करोड़ जब्त किए थे.

महादेव ऐप और सौरभ चंद्राकार की कहानी

बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक, सौरभ चंद्राकार के पिता भिलाई में नगर निगम के दफ्तर में अफसर थे. उसने अपने पिता के पैसों से जूस का कारोबार शुरू किया. इसी दौरान उसने सट्टा बाजार में पैर जमाना शुरू किया.

इसके बाद सौरभ ने अपने दोस्त रवि उप्पल के साथ मिलकर ऑनलाइन सट्टा ऐप 'महादेव बुक' शुरू की. ईडी के मुताबिक, 2019 में सौरभ और रवि ने अपना पूरा कारोबार दुबई से चलाना शुरू कर दिया. 

उनके कारोबार को बढ़ाने में राज्य के पुलिसकर्मियों ने भी मदद की. अगस्त में ईडी ने छत्तीसगढ़ पुलिस के एएसआई चंद्रभूषण वर्मा को भी गिरफ्तार किया था.

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अब तक कितनी जांच हुई?

ईडी से पहले छत्तीसगढ़ पुलिस ने महादेव ऐप के खिलाफ जांच शुरू कर दी थी. एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, इस मामले में छत्तीसगढ़ पुलिस ने अब तक 75 एफआईआर दर्ज की है. जबकि 429 आरोपियों को गिरफ्तार किया है.

15 सितंबर को जारी प्रेस रिलीज में ईडी ने बताया था कि इस मामले में अब तक रायपुर, भोपाल, मुंबई और कोलकाता के 39 ठिकानों पर छापेमारी की जा चुकी है. 

अब तक की छापेमारी के दौरान ईडी ने 417 करोड़ रुपये की संपत्ति को जब्त कर लिया है. इसके अलावा ईडी ने फरार संदिग्धों के खिलाफ गैर-जमानती वारंट भी जारी किया है.

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