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चंडीगढ़ मेयर चुनाव में गड़बड़ी करने वाले अनिल मसीह कौन हैं? पहले भी विवादों में रहे

Who is Anil Masih: सुप्रीम कोर्ट ने चंडीगढ़ मेयर चुनाव को लेकर बड़ा फैसला दिया है. सुप्रीम कोर्ट ने चंडीगढ़ मेयर चुनाव के लिए आम आदमी पार्टी और कांग्रेस के साझा उम्मीदवार कुलदीप कुमार को विजेता घोषित कर दिया है. इस पूरे चुनाव में सबसे ज्यादा चर्चा रिटर्निंग ऑफिसर अनिल मसीह हैं.

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अनिल मसीह का बैलेट पेपर से छेड़छाड़ करते वीडियो सामने आया था.
अनिल मसीह का बैलेट पेपर से छेड़छाड़ करते वीडियो सामने आया था.

Who is Anil Masih: चंडीगढ़ में हुए मेयर चुनाव पर सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला दिया है. सुप्रीम कोर्ट ने चंडीगढ़ मेयर चुनाव में आम आदमी पार्टी के उम्मीदवार कुलदीप कुमार को विजेता घोषित कर दिया है.

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चंडीगढ़ में मेयर चुनाव के लिए 30 जनवरी को वोटिंग हुई थी. उसमें बीजेपी के मनोज सोनकर को 16 वोट मिले थे. आम आदमी पार्टी और कांग्रेस के साझा उम्मीदवार कुलदीप कुमार को 12 वोट मिले थे. आठ वोट को रिटर्निंग ऑफिसर अनिल मसीह ने अवैध करार दिया था.

इस चुनाव के बाद कांग्रेस और आप ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया. चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की अगुवाई वाली बेंच ने 5 फरवरी को सुनवाई के दौरान अनिल मसीह पर तीखी टिप्पणी की थी. सुप्रीम कोर्ट ने चंडीगढ़ मेयर चुनाव के दौरान जो हुआ, उसे लोकतंत्र की 'हत्या' और 'मजाक' बताया था.

इस पूरे वाकये में रिटर्निंग ऑफिसर अनिल मसीह चर्चा में रहे. अनिल मसीह को कोर्ट ने अवमानना का नोटिस भी दिया है. अनिल मसीह ने भी अदालत में माना है कि उन्होंने बैलेट पेपर में क्रॉस का निशान बनाया था.

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पर ये अनिल मसीह हैं कौन?

53 साल के अनिल मसीह पर चंडीगढ़ मेयर चुनाव में बैलेट पेपर से धोखाधड़ी करने का आरोप है. कुछ सालों पहले ही उन्होंने बीजेपी ज्वॉइन की थी.

मसीह बीजेपी के अल्पसंख्यक मोर्चा से जुड़े रहे हैं. बताया जाता है कि 2021 में चंडीगढ़ नगर निगम चुनाव के दौरान वार्ड-13 से बीजेपी से टिकट मिलने की उम्मीद थी, लेकिन मिला नहीं. 

हालांकि, अगले ही साल बीजेपी ने उन्हें चंडीगढ़ नगर निगम के लिए मनोनीत कर दिया. मसीह चंडीगढ़ नगर निगम के उन 9 पार्षदों में से एक हैं, जिन्हें मनोनीत किया गया है. ऐसे पार्षदों के पास वोटिंग का अधिकार नहीं होता.

इससे पहले साल 2021 में ही बीजेपी ने मसीह को अल्पसंख्यक मोर्चा का महासचिव नियुक्त कर दिया था. हालांकि,मेयर चुनाव के बाद विवादों में आने के कारण बीजेपी ने मसीह को पद से हटा दिया था.

पहले भी विवादों में रहे हैं मसीह

अनिल मसीह का नाम पहले भी विवादों में रहा है. हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, 2018 में चर्च में अभद्र भाषा का इस्तेमाल करने के बाद उनकी एंट्री पर रोक लगा दी गई थी.

रिपोर्ट बताती है कि चर्च ऑफ नॉर्थ इंडिया (CNI) की कमेटी मीटिंग के दौरान मसीह ने कथित रुप से गाली-गलौज की थी. इसके बाद उन्हें चर्च की सभी एक्टिविटी में शामिल होने पर रोक लगा दी गई थी.

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हालांकि, दो साल बाद सीएनआई के बिशप डेंजल पीपुल्स ने उन पर लगी रोक को हटा दिया था.

हॉस्टल की मैनेजर हैं मसीह की पत्नी

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अनिल मसीह की पढ़ाई एक सरकारी स्कूल से हुई. उसके बाद चंडीगढ़ के सेक्टर 10 स्थित डीएवी कॉलेज से उन्होंने ग्रेजुएशन किया.

उनकी पत्नी पंजाब इंजीनियरिंग हॉस्टल के एक गर्ल्स हॉस्टल में मैनेजर हैं. उनका परिवार हॉस्टल कैम्पस में ही रहता है.

बताया जाता है कि बीते कुछ सालों से अनिल मसीह कोई जॉब नहीं कर रहे थे. वो पूरी तरह से राजनीति पर अपना ध्यान लगा रहे हैं.

क्या हुआ था मेयर चुनाव में?

चंडीगढ़ नगर निगम में कुल 35 पार्षद हैं. और एक यहां की सांसद किरण खेर का वोट भी है. इस तरह से कुल 36 वोट हैं. मेयर चुनाव में जीत के लिए 19 वोट की जरूरत है.

बीजेपी के पास अपने 14 पार्षदों और एक सांसद को मिलाकर कुल 15 वोट थे. जबकि, आम आदमी पार्टी के पास 13 और कांग्रेस के पास 7 पार्षद हैं. अकाली दल के एक पार्षद ने भी बीजेपी को समर्थन दिया था.

आम आदमी पार्टी और कांग्रेस ने मिलकर कुलदीप कुमार को उम्मीदवार बनाया था. जबकि, बीजेपी की ओर से मनोज सोनकर थे. कुलदीप कुमार को 20 और मनोज सोनकर को 16 वोट मिले थे. 

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लेकिन रिटर्निंग ऑफिसर अनिल मसीह ने कुलदीप कुमार को मिले 20 में से 8 वोटों को अवैध करार दे दिया. इस तरह से कुलदीप कुमार के 12 और मनोज सोनकर के 16 वोट हो गए. 

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