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'मंदिरों की संपत्ति से खत्म हो सरकारी कब्जा, दुर्गा पूजा पर 5 दिन छुट्टी', बांग्लादेश से किन अधिकारों के लिए लड़ रहे हैं चिन्मय प्रभु

बांग्लादेश में इस समय जबरदस्त तनाव है. हिंदू धर्म गुरु चिन्मय कृष्णा दास की गिरफ्तारी के बाद से विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं. उनकी रिहाई की मांग की जा रही है. भारत ने भी चिन्मय दास की गिरफ्तारी पर चिंता जताई है.

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चिन्मय दास प्रभु को 25 नवंबर को गिरफ्तार किया गया था. (फाइल फोटो)
चिन्मय दास प्रभु को 25 नवंबर को गिरफ्तार किया गया था. (फाइल फोटो)

बांग्लादेश में जब से शेख हसीना की सरकार का तख्तापलट हुआ है, तब से वहां अल्पसंख्यकों खासकर हिंदुओं पर हमले तेज हो गए हैं. हिंदू धर्मगुरु चिन्मय कृष्णा दास की गिरफ्तारी के बाद से जबरदस्त तनाव है. चिन्मय दास को 25 नवंबर को गिरफ्तार किया गया था. मंगलवार को चटगांव की अदालत ने उनकी जमानत अर्जी खारिज कर जेल भेज दिया.

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चिन्मय दास की गिरफ्तारी के बाद सांप्रदायिक तनाव बढ़ गया है. चटगांव में हिंदू मोहल्लों और मंदिरों पर कट्टरपंथियों का हमला हो रहा है.

चिन्मय दास बांग्लादेश में इस्कॉन से जुड़े रहे हैं. वो सम्मिलित सनातन जागरण जोत के प्रवक्ता भी हैं. उनकी गिरफ्तारी और बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे अत्याचारों को लेकर भारत ने चिंता जताई है. भारतीय विदेश मंत्रालय ने बयान जारी कर बांग्लादेश सरकार से हिंदुओं और सभी अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने को कहा है. 

विदेश मंत्रालय ने अपने बयान में कहा, अल्पसंख्यकों के घरों और दुकानों में आगजनी और लूटपाट के साथ-साथ मंदिरों को अपवित्र करने के कई मामले दर्ज किए गए हैं. इन घटनाओं के अपराधी अभी भी खुलेआम घूम रहे हैं, जबकि शांतिपूर्ण तरीके से वैध मांगें करने वाले धार्मिक नेता के खिलाफ आरोप लगाए जा रहे हैं.

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चिन्मय दास की गिरफ्तारी क्यों?

चिन्मय दास को तब गिरफ्तार किया गया था, जब वो ढाका से चटगांव आ रहे थे. उन्हें ढाका एयरपोर्ट पर गिरफ्तार कर लिया गया था. इस दौरान सादे कपड़ों में आए कुछ लोगों ने उन्हें जबरदस्ती वैन में बैठा लिया. उन लोगों ने खुद को बांग्लादेशी पुलिस का जासूस बताया था.

इस्कॉन के उपाध्यक्ष राधा रमन दास ने बताया कि बिना कुछ कारण बताए ही चिन्मय दास को जबरदस्ती वैन में डाल दिया गया.

बांग्लादेशी पुलिस ने चिन्मय दास पर देशद्रोह का आरोप लगाया है. उनपर अक्टूबर में एक विरोध प्रदर्शन के दौरान बांग्लादेशी झंडे का अपमान करने का आरोप है. ऐसा दावा है कि इस विरोध प्रदर्शन में भगवा ध्वज को बांग्लादेशी झंडे से ज्यादा ऊंचा फहराया गया था. हालांकि, राधा रमन दास ने इन आरोपों को खारिज किया है.

चिन्मय दास की गिरफ्तारी के बाद उनकी रिहाई की मांग को लेकर देशभर में विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं. इन प्रदर्शनों को दबाया जा रहा है. बांग्लादेश में जब से मोहम्मद युनूस की सरकार आई है तब से हिंदुओं पर हमले बढ़ गए हैं.

ऐसी क्या मांगें कर रहे थे चिन्मय दास?

1. अल्पसंख्यकों के उत्पीड़न से जुड़े मामले में तुरंत सुनवाई के लिए स्पेशल ट्रिब्यूनल बनाए जाए. पीड़ितों को मुआवजा और पुनर्वास मिले.

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2. अल्पसंख्यक समुदायों की सुरक्षा और अधिकारों की रक्षा के लिए एक कानून बनाया जाए.

3. अल्पसंख्यकों के लिए एक मंत्रालय बनाया जाए, ताकि अल्पसंख्यक समुदाय के मुद्दे और परेशानियों को उठाया जा सके.

4. कब्जाई गई देबोत्तर (मंदिर) की संपत्तियों को वापस किया जाए. मंदिरों और अल्पसंख्यकों के पूजा स्थलों की सुरक्षा के लिए कानून बने.

5. सभी स्कूलों, कॉलेजों और हॉस्टलों में अल्पसंख्यकों के लिए पूजा स्थल बनाए जाएं, ताकि वो भी पूजा कर सकें.

6. अल्पसंख्यक समुदायों के शैक्षणिक संस्थानों को बढ़ाया जाए. साथ ही साथ पाली और संस्कृत बोर्डों का आधुनिकिकरण किया जाए.

7. दुर्गा पूजा के लिए पांच दिन का पब्लिक हॉलीडे घोषित किया जाए, क्योंकि ये हिंदुओं के लिए काफी अहम त्योहार है.

बांग्लादेश में किस हालत में हैं अल्पसंख्यक?

बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों को निशाना बनाने का इतिहास लंबा रहा है, खासकर हिंदू समुदाय को. याद होगा कि दो साल पहले भी बांग्लादेश में हिंदू विरोधी भावनाएं भड़क गई थीं, जिसके बाद कई हिंदुओं की हत्या भी कर दी गई थी.

हाल ही में, शेख हसीना के इस्तीफे के बाद सैकड़ों जगहों से हिंदुओं पर हमले के मामले सामने आए हैं. इस्कॉन टेम्पल और दुर्गा मंदिरों को निशाना बनाया गया है. हिंदुओं के घरों और दुकानों में तोड़फोड़ की गई है. दिनाजपुर में उपद्रवियों ने एक श्मशान घाट पर भी कब्जा कर लिया था.

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अभी तो हिंदुओं पर हो रही हिंसा के मामले सामने आ भी जा रहे हैं, लेकिन वहां दशकों से इनके साथ उत्पीड़न हो रहा है. हिंदू अमेरिकन फाउंडेशन का दावा है कि 1964 से 2013 के बीच एक करोड़ से ज्यादा हिंदू बांग्लादेश छोड़कर भाग गए हैं. फाउंडेशन का कहना है कि हर साल 2.30 लाख हिंदू बांग्लादेश छोड़ रहे हैं.

बांग्लादेश में गैर-मुस्लिमों की आबादी तेजी से घटी है. 1951 में बांग्लादेश (तब पूर्वी पाकिस्तान) में गैर-मुस्लिम आबादी 23.2% थी. यहां आखिरी बार 2011 में जनगणना हुई थी. उसमें सामने आया था कि बांग्लादेश में गैर-मुस्लिमों की आबादी घटकर 9.4% हो गई है.

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