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बिहार के विधानसभा चुनाव तीन चरणों में 28 अक्टूबर, 3 नवंबर और 7 नवंबर को होंगे. ये कोरोना काल में होने वाला देश का पहला बड़ा चुनाव होगा. तारीखों के ऐलान के बाद ही एक ओपिनियन पोल के नतीजा भी सामने आया जिसमें कहा गया कि नीतीश कुमार सातवीं बार बिहार के मुख्यमंत्री बन सकते हैं. इस ओपिनियन पोल के बाद नीतीश कुमार ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस भी की.
इन सबके बीच सोशल मीडिया पर एबीपी न्यूज का एक स्क्रीनशॉट वायरल हो रहा है जिसमें नीतीश कुमार के हवाले से लिखा है, “सवर्ण हमारा वोटर नहीं है जो हम उनकी परवाह करते- मुख्यमंत्री नीतीश कुमार”.
मजे की बात तो यह है कि थोड़े बहुत फेरबदल के साथ ऐसे ही बयान वाला एक स्क्रीनशॉट उनके प्रतिद्वंद्वी और विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव के हवाले से भी वायरल हो रहा है. इसमें लिखा है, “स्वर्ण हमारा वोटर नहीं जो हम समर्थन करते- तेजस्वी यादव”. इन दोनों स्क्रीनशॉट्स को नीचे देखा जा सकता है.
इंडिया टुडे के एंटी फेक न्यूज वॉर रूम (AFWA) ने पाया कि यह दावा गलत है. वायरल हो रहे दोनों स्क्रीनशॉट फर्जी हैं और नीतीश कुमार या तेजस्वी यादव ने इस तरह का कोई बयान नहीं दिया.
नीतीश कुमार से जुड़ा दावा फेसबुक पर यहां, यहां और यहां देखा जा सकता है. वहीं तेजस्वी यादव से जुड़ा दावा इस फेसबुक पोस्ट में किया गया है.
नीतीश और तेजस्वी से संबंधित दो पोस्ट्स का आर्काइव्ड वर्जन यहां और यहां देखा जा सकता है.
नीतीश कुमार से संबंधित पोस्ट को “सवर्ण सब याद है न नीतीश कुमार क्या बोले थे सवर्ण हमारा वोटर नही है” जैसे कैप्शन के साथ शेयर किया जा रहा है.
वहीं तेजस्वी यादव से संबंधित पोस्ट के साथ कैप्शन लिखा है, “जब आर्थिक रूप से कमजोर स्वर्णों को 10 प्रतिशत आरक्षण मिल रहा था तो तेजस्वी यादव ने विरोध करते हुए बोला था कि हम इसका समर्थन नहीं करते क्योंकि स्वर्ण हमारा वोटर नहीं है. तेजस्वी ने सवर्ण आरक्षण का फिर से किया विरोध, आबादी के अनुपात में रिजर्वेशन की उठाई मांग”.
स्क्रीनशॉट्स की हकीकत
वायरल स्क्रीनशॉट्स में फोटो और मुख्य खबर के अलावा बाकी सब एक-जैसा है. नीचे का टिकर यानी पतली पट्टी में लिखी खबर भी एक ही है- “अनुराग-प्रेरणा का चोरी-चोरी चुपके-चुपके”. इससे पता लगता है कि एक ही टेम्पलेट को एडिट करके दो स्क्रीनशॉट्स बनाए गए हैं. दोनों स्क्रीनशॉट्स में कई शब्द गलत लिखे हैं, जैसे- जाती, बिरोध, स्वर्ण, करगें आदि. जाहिर है, कोई भी न्यूज चैनल इतनी गलतियों के साथ न्यूज नहीं दिखाएगा.
हमें एबीपी न्यूज की वेबसाइट या यूट्यूब चैनल पर ऐसी कोई खबर नहीं मिली जिसमें नीतीश या तेजस्वी के ऐसे किसी बयान का जिक्र हो. हमने एबीपी न्यूज के इनपुट हेड संजय बरागटा से भी इस बारे में बात की. उन्होंने कहा कि एबीपी न्यूज पर इस तरह कोई खबर नहीं दिखाई गई है.
सवर्णों को लेकर क्या है नीतीश- तेजस्वी का नजरिया
हमने कीवर्ड सर्च के जरिये यह पता लगाने की कोशिश की कि क्या नीतीश कुमार या तेजस्वी यादव ने कभी कहा है कि सवर्ण उनका वोटर नहीं है और उन्हें उनकी परवाह नहीं है. हमें दोनों में से किसी का भी ऐसा कोई बयान नहीं मिला. हालांकि हमें सवर्णों पर उनकी राय को जाहिर करती कुछ रिपोर्ट मिलीं.
हमने पाया कि नीतीश कुमार ने साल 2011 में बिहार में सवर्ण आयोग का गठन किया था. ‘न्यूज 18’ की रिपोर्ट के अनुसार, यह आयोग बनाने वाला बिहार अकेला राज्य था.
वहीं, तेजस्वी यादव का सवर्णों से जुड़ा जो बयान सबसे ज्यादा चर्चा में रहा था, वह उन्होंने पिछले साल दिया था. ‘दि प्रिंट’ की रिपोर्ट के मुताबिक उन्होंने कहा था, ‘अगर 15 फ़ीसदी आबादी को 10 प्रतिशत आरक्षण तो फिर 85 फ़ीसदी आबादी को 90 प्रतिशत आरक्षण हर हाल में मिलना चाहिए. 10 प्रतिशत आरक्षण किस आयोग और सर्वेक्षण की रिपोर्ट के आधार पर दिया जा रहा है? सरकार विस्तार से बताए.’
यानी यह साफ है कि वायरल हो रहे स्क्रीनशॉट फर्जी हैं. नीतीश कुमार या तेजस्वी यादव ने सवर्णों के बारे में ऐसा कोई बयान नहीं दिया.