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Fact Check: क्या BJP के विरोध में बिहार के गांव में लगा ये बोर्ड? जानें इसकी सच्चाई

सोशल मीडिया पर सड़क पर लगे एक बोर्ड की तस्वीर वायरल हो रही है. इस बोर्ड पर लिखा हुआ है कि भोजपुर के एक गांव उगना जगदीशपुर में बीजेपी वालों का आना सख्त मना है.

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आजतक फैक्ट चेक

दावा
बिहार के भोजपुर के एक गांव में लगे बोर्ड पर लिखा है कि बीजेपी वालों का आना सख्त मन है. अगर बीजेपी वाले गांव में आएंगे तो उनकी टांगे तोड़ दी जाएंगी.
सोशल मीडिया यूजर्स
सच्चाई
वायरल तस्वीर एडिटेड है. असली तस्वीर अक्टूबर 2018 की है जब यूपी के एक गांव में बीजेपी और सांसद महेश शर्मा के खिलाफ ये बोर्ड लगाया गया था. इस बोर्ड पर लिखा गया था कि बीजेपी वालों का गांव में आना मना है, लेकिन टांगे तोड़ देने वाली बात इसमें अलग से जोड़ी गई है.

सोशल मीडिया पर सड़क पर लगे एक बोर्ड की तस्वीर वायरल हो रही है. इस बोर्ड पर लिखा हुआ है कि भोजपुर के एक गांव उगना जगदीशपुर में बीजेपी वालों का आना सख्त मना है. यहां तक कि बोर्ड पर चेतावनी भी लिखी है कि अगर बीजेपी वाले गांव में आएंगे तो उनकी टांगे तोड़ दी जाएंगी. इस तस्वीर को शेयर करते हुए कुछ सोशल मीडिया यूजर्स तंज कर रहे हैं कि बीजेपी के अच्छे दिन शुरू हो गए हैं. बता दें कि भोजपुर बिहार का एक जिला है.

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बोर्ड पर लिखा है, "ग्राम उगना जगदीशपुर (भोजपुर) अगर बीजेपी वाले आएंगे तो टांग तोड़ दी जायेगी! BJP वालो का आना इस गांव में सख्त मना है." फेसबुक पर ये तस्वीर कई लोग पोस्ट कर चुके हैं. वायरल पोस्ट का आर्काइव यहां देखा जा सकता है.

इंडिया टुडे एंटी फेक न्यूज वॉर रूम (AFWA) ने पाया कि वायरल तस्वीर फर्जी है. ये तस्वीर अक्टूबर 2018 की है जब उत्तर प्रदेश के गौतमबुद्ध नगर के एक गांव में बीजेपी और सांसद महेश शर्मा के खिलाफ ये बोर्ड लगाया गया था. हालांकि, इस बोर्ड पर ये सच में लिखा गया था कि बीजेपी वालों का गांव में आना मना है, लेकिन टांगें तोड़ देने वाली बात इसमें एडिटिंग सॉफ्टवेयर की मदद से जोड़ी गई है.

कैसे पता की सच्चाई?

तस्वीर को रिवर्स सर्च करने पर हमें कुछ न्यूज रिपोर्ट्स मिलीं, जिनमें मूल तस्वीर मौजूद थी. 30 अक्टूबर 2018 को प्रकाशित हुई इन खबरों में बताया गया था कि ये बोर्ड गौतमबुद्ध नगर के ग्रेटर नोएडा में एक गांव कचैड़ा वारसाबाद में वहां के निवासियों ने लगाया था. बोर्ड पर ग्रामवासियों ने लिखा था, "ग्राम कचैड़ा वारसाबाद गौतमबुद्ध नगर (U.P.), सांसद महेश शर्मा द्वारा गोद लिया गया गांव, BJP वालो का आना इस गांव में सख्त मना है। समस्त ग्रामवासी".

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क्या था मामला?

"द इंडियन एक्सप्रेस" की खबर के अनुसार, ये बोर्ड गांव के बाहर उस समय लगाया गया था जब स्थानीय प्रशासन और एक रियल स्टेट समूह के कर्मचारियों ने कथित रूप से किसानों की खड़ी फसल बर्बाद कर दी थी. गांववालों का कहना था कि फसल बर्बाद करने से रोकने पर उन्हें पुलिस की लाठियां खानी पड़ीं. पुलिस ने कुछ गांववालों को कानून व्यवस्था बिगाड़ने को लेकर गिरफ्तार भी किया था.

दरअसल, किसानों और रियल स्टेट समूह के बीच ये विवाद काफी समय से चला आ रहा था. रियल स्टेट समूह ने गांव की ये जमीन साल 2005-06 में खरीद ली थी. लेकिन ग्रामवासियों के मुताबिक कंपनी ने जमीन पर काम शुरू नहीं किया और इसलिए किसान उस पर खेती करते रहे. एक दिन अधिकारी बिना नोटिस दिए जमीन खाली करवाने आ गए और लाखों की फसल पर खुदाई की मशीन चला दी.

विवाद को सुलझाने के लिए गांववालों ने सांसद महेश शर्मा को फोन किया लेकिन उनको मदद नहीं मिली. इसी बात से निराश और गुस्सा हो कर गांववालों ने ये बोर्ड लगा दिया. महेश शर्मा ने "सांसद आदर्श ग्राम योजना" के तहत इसी गांव को गोद लिया था. इस मामले में महेश शर्मा का कहना था कि बोर्ड सिर्फ एक व्यक्ति ने लगाया था जो राजनीति से प्रेरित था. मामले में समाजवादी पार्टी के नेता को हिरासत में भी लिया गया था.

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कचैड़ा वारसाबाद की इस तस्वीर को पहले भी एडिट करके शेयर किया जा चुका है. फर्जी तस्वीर बनाने वाले बोर्ड पर गांव का नाम या पार्टी का नाम बदल देते हैं जिससे भ्रम फैलता है.

यहां साबित हो जाता है कि जिस तस्वीर के साथ छेड़छाड़ की गई है. असली तस्वीर में बोर्ड पर बीजेपी का विरोध तो किया गया है लेकिन टांगे तोड़ने वाली बात नहीं लिखी गई. साथ ही, असली तस्वीर लगभग तीन साल पुरानी है. हालांकि, किसान आंदोलन के चलते पिछले महीनों के दौरान ऐसी खबरें जरूर आई हैं कि कई जगह गांव वालों ने बीजेपी नेताओं की गांव में एंट्री बैन कर दी और इसको लेकर बकायदा पोस्टर-बोर्ड लगाए गए हैं.

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