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फैक्ट चेक: मेरठ में बुजुर्ग ने खाट लगाकर नहीं रोका सीएम योगी का रास्ता, झूठे दावे के साथ वायरल हुआ वीडियो

सीएम योगी के इसी दौरे का एक वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है. वीडियो के साथ दावा किया जा रहा है कि बिजौली में नाराजगी जताते हुए एक बुजुर्ग ने अपनी गली में खाट लगाकर योगी को अंदर आने से रोक दिया.

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आजतक फैक्ट चेक

दावा
बिजौली में नाराजगी जताते हुए एक बुजुर्ग ने अपनी गली में खाट लगाकर योगी को अंदर आने से रोक दिया. 
सोशल मीडिया यूजर्स
सच्चाई
बिजौली में कोरोना मरीज होने के कारण गली में खाट बंधी गई थी जिससे कोई अंदर- बाहर ना जा सके. वीडियो में दिख रहे बुजुर्ग ने खुद ये बात कही है कि उन्होंने योगी आदित्यनाथ को नहीं रोका था.   

कोविड व्यवस्थाओं का जायजा लेने के लिए उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ राज्य के अलग-अलग हिस्सों में पहुंच रहे हैं. इसी कड़ी में योगी रविवार को मेरठ के बिजौली पहुंचे जहां उन्होंने स्वास्थ्य सेवाओं का निरीक्षण किया, साथ ही एक कोविड मरीज के परिवार का हाल भी जाना.

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सीएम योगी के इसी दौरे का एक वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है. वीडियो के साथ दावा किया जा रहा है कि बिजौली में नाराजगी जताते हुए एक बुजुर्ग ने अपनी गली में खाट लगाकर योगी को अंदर आने से रोक दिया. योगी के कई बार कहने पर भी बुजुर्ग ने रास्ता नहीं खोला जिसके बाद मुख्यमंत्री को वापस जाना पड़ा.

वीडियो को छत पर से बनाया गया है जिसमें एक गली में रास्ता रोकने के लिए खाट बांध दी गई है. खाट के एक तरफ योगी आदित्यनाथ कई अन्य लोगों के साथ खड़े हैं और दूसरी तरफ खड़े एक बुजुर्ग व्यक्ति से कुछ बात कर रहे हैं. वीडियो के आखिर में योगी बाकी लोगों के साथ वापस लौटते नजर आ रहे हैं.   

 

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इंडिया टुडे एंटी फेक न्यूज वॉर रूम (AFWA) ने पाया कि वीडियो के साथ किया जा रहा दावा भ्रामक है. बिजौली में कोरोना मरीज होने के कारण गली में खाट बंधी गई थी जिससे कोई अंदर- बाहर ना जा सके. वीडियो में दिख रहे बुजुर्ग ने खुद ये बात कही है कि उन्होंने योगी आदित्यनाथ को नहीं रोका था. मेरठ पुलिस की तरफ से भी इसे अफवाह बताया गया है.

इस वीडियो को भ्रामक दावे के साथ उत्तर प्रदेश यूथ कांग्रेस के एक नेता ओमवीर यादव ने ट्विटर पर पोस्ट किया. एक्ट्रेस और कांग्रेस नेता नगमा ने भी ट्विटर पर इसे पोस्ट किया है.  वीडियो के साथ कैप्शन में लिखा है "ब्रेकिंग न्यूज़- बस करो अब हमें आपकी ज़रूरत नहीं है- जनपद मेरठ के बिजौली गांव में एक बुजुर्ग ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को अपनी एक गली में खाट खड़ी कर जाने से रोक दिया मुख्यमंत्री जी के लाख कहने  पर भी बुजुर्ग ने रास्ता नहीं खोला और योगी जी को वापस जाना पड़ा !!"  सोशल मीडिया पर ये वीडियो हजारों में शेयर हो चुका है. वायरल पोस्ट का आर्काइव यहां देखा जा सकता है. 

कैसे पता की सच्चाई? 
पड़ताल की शुरुआत में हमें मेरठ पुलिस का एक ट्वीट मिला जिसमें इस दावे का खंडन किया गया था. पुलिस का कहना है कि मुख्यमंत्री बिजौली के एक कंटेनमेंट जोन में एक कोविड पीड़ित परिवार के सदस्य से मिले और उनकी कुशलता पूछी. साथ ही, पुलिस ने लिखा है कि कंटेनमेंट जोन होने के कारण गली में खाट और रस्सी बंधी है. 

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इस संबंध में हमें 'हिंदुस्तान' की एक खबर भी मिली. खबर में बताया गया है कि योगी आदित्यनाथ गांव में निरंजन नाम के एक व्यक्ति से मिले थे जिनके घर दो लोग संक्रमित हैं. सीएम ने निरंजन से दवाइयां की उपलब्धता और सावधानियां बरतने को लेकर बात की. इस दौरान सीएम निरंजन के घर के ठीक बगल वाली गली में भी गए और वहां 74 साल के ताराचंद से बात की. 

सच्चाई जानने के लिए हमने निरंजन के भाई शिव कुमार त्यागी से संपर्क किया. शिव कुमार ने हमें बताया कि 16 मई को सीएम योगी उनके भाई निरंजन से मिले थे जिनके बेटे नितिन और बहू कोरोना संक्रमित हैं. शिव का कहना था कि वायरल वीडियो उन्हीं के घर के बगल वाली गली का है जब योगी वहां ताराचंद शर्मा नाम के एक बुजुर्ग व्यक्ति से मिले थे. 

शिव कुमार के अनुसार उस समय वे गली में योगी आदित्यनाथ से थोड़ी दूरी पर ही खड़े थे और वहां ऐसा कुछ नहीं हुआ था जैसे कि दावा किया जा रहा है. शिव कुमार ने बताया कि ताराचंद मास्क नहीं लगाए थे और इसी बात पर सीएम योगी ने उन्हें टोका और मास्क लगाने के लिए कहा. गली में खाट बंधी होने वाली बात पर शिव कुमार का कहना था कि बगल में कोरोना मरीज होने की वजह से वहां खाट लगाई गई है जिससे बच्चे बाहर ना जा पाए.     

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कुछ कीवर्ड की मदद से खोजने पर हमें एक यूट्यूब वीडियो भी मिला जिसमें ताराचंद खुद बता रहे हैं कि उन्होंने सीएम योगी को नहीं रोका था. वीडियो में बल्कि ताराचंद योगी आदित्यनाथ से मिलने पर अपनी खुशी जाहिर कर रहे हैं. ये वीडियो Motivational Technology नाम के यूट्यूब चैनल पर अपलोड किया गया है. हालांकि एक दूसरे वीडियो में ताराचंद ये जरूर बोल रहे हैं कि उन्हें पेंशन नहीं मिल रही और राशन भी पूरा नहीं दिया जा रहा. 

अगर वायरल वीडियो को भी ध्यान से देखें तो लोगों के हावभाव या बॉडी लैंग्वेज से ऐसा बिलकुल नहीं लगता कि गली में योगी के अंदर घुसने को लेकर कोई विवाद हो रहा हो. जबकि वीडियो में योगी के समर्थन में नारे सुनाई दे रहे हैं. यहां हमारी पड़ताल में साबित हो जाता है कि वीडियो को गलत दावे के साथ शेयर किया जा रहा है. ये दावा मनगढ़ंत है. 

(मेरठ से उस्मान चौधरी के इनपुट के साथ)

 

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