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कोराना महामारी के दौरान अगर आपको पता चले कि अस्पतालों में मरीजों की किडनी निकाली जा रही है तो आपको कैसा लगेगा? इसी तरह का विचलित कर देने वाला एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है. वीडियो में कुछ लोग डॉक्टरों के साथ मरीज की किडनी चुरा लेने को लेकर बहस कर रहे हैं.
फेसबुक पर वायरल इस वीडियो में अस्पताल के बिस्तर पर एक व्यक्ति का शव दिख रहा है और उसके पेट के निचले हिस्से में पट्टी बंधी है. वीडियो के साथ कहा जा रहा है कि ये घटना राजस्थान के कोटा में सुधा अस्पताल की है, जहां डॉक्टरों ने पहले पीड़ित को कोरोना संक्रमित घोषित किया और फिर उसकी किडनी निकाल ली.
लोगों ने इस वीडियो को शेयर करते हुए लिखा है, “ये विडियो राजस्थान में कोटा जिला, सुधा हॉस्पिटल का है, डॉक्टर लोग कोरोना पेशेंट बताकर किडनी निकाली है बंदे ने साफ वीडियो बनाकर दिखाया है सभी भाईयो से निवेदन है कि इस वीडियो अधिक से अधिक शेयर करें ताकि ऐसी हरकत करने वाले डॉक्टर को कड़ी से कड़ी सजा मिल सके एक गरीब परिवार को मदद और विश्वास हो सके”.
ये वीडियो ट्विटर पर भी खूब शेयर किया जा रहा है. कई फेसबुक यूजर्स ने भी ऐसा ही दावा किया है. इसका आर्काइव यहां देखा जा सकता है. इंडिया टुडे एंटी फेक न्यूज वॉर रूम (AFWA) ने पाया कि वायरल पोस्ट में किया जा रहा दावा भ्रामक है. ये वीडियो 2018 का है और इसका मौजूदा कोरोना महामारी से कोई लेना-देना नहीं है.
जिस व्यक्ति ने ये वीडियो बनाया है, उसे अस्पताल के स्टाफ पर चिल्लाते हुए सुना जा सकता है. “मुझे बेवकूफ बनाने की कोशिश मत करो. तुमने किडनी निकाली है. इनके पेट पर पट्टी क्यों बंधी है? इनके सिर में चोट थी, लेकिन पेट पूरी तरह ठीक था. तुमने पेट में चीरा लगाकर किडनी निकाली है. मैं ये वीडियो मीडिया को दूंगा ताकि सुधा अस्पताल का भंडा फूट जाए.”
AFWA की पड़ताल
इनविड टूल की मदद से वीडियो के कीफ्रेम सर्च करने पर हमने पाया कि ये वीडियो एक यूट्यूब चैनल पर 2018 में अपलोड किया गया था. हमें 2018 में छपी ‘राजस्थान पत्रिका’ की एक खबर भी मिली, जिसमें इस पूरी घटना के बारे में बताया गया है. इस रिपोर्ट के मुताबिक, बाबूलाल नाम के एक व्यक्ति को सड़क हादसे के बाद गंभीर अवस्था में कोटा के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया था. इलाज के दौरान बाबूलाल की मौत हो गई. मौत के बाद बाबूलाल के परिवार ने अस्पताल पर उनकी किडनी चुराने का आरोप लगाया था. हालांकि, शव के पोस्टमार्टम के बाद पुलिस ने किडनी गायब होने के दावे को खारिज कर दिया था.
पेट में चीरा लगाने का रहस्य
हमें ‘इंडिया टीवी’ का एक वीडियो मिला, जिसमें सुधा अस्पताल के डॉक्टर ने पूरी घटना पर सफाई पेश की थी. डॉक्टर ने कहा, “मरीज के ब्रेन में गंभीर चोट आई थी. इलाज के दौरान डॉक्टरों ने दिमाग की हड्डी निकाल कर पेट की चमड़ी में रख दी थी, बाद में मरीज के ठीक होने पर उसे वापस लगा दिया जाता है. इस प्रक्रिया को डिकम्प्रेसिव क्रेनिएकटमी कहते हैं. ये प्रक्रिया अक्सर सिर की गंभीर चोट के केस में इस्तेमाल की जाती है.”
किडनी चोरी का राज
हमने सुधा अस्पताल के डायरेक्टर डॉ आरके अग्रवाल से संपर्क किया. उन्होंने इस बात की पुष्टि की कि ये वीडियो 2018 में उनके अस्पताल में हुई एक घटना का है. उन्होंने कहा कि मृत व्यक्ति के परिवार वालों के आरोप पूरी तरह से झूठे थे. अस्पताल ने व्यक्ति के परिवार के खिलाफ एफआईआर भी दर्ज कराई थी. डॉ अग्रवाल ने हमें एफआईआर की कॉपी और मृतक की पोस्टमार्टम रिपोर्ट भी भेजी. रिपोर्ट में साफ लिखा है कि शव में दोनों किडनी अपनी जगह पर मौजूद हैं.
इस तरह ये दावा गलत है कि महामारी के दौरान डॉक्टर मरीजों की किडनी चोरी कर रहे हैं. AFWA पहले भी कोरोना महामारी की आड़ में मानव अंगों की तस्करी के दावे को खारिज कर चुका है.