9 दिसंबर को अरुणाचल प्रदेश में चीन के सैनिकों ने एक बार फिर वास्तविक नियंत्रण रेखा यानी एलएसी को पार करके भारतीय सीमा में घुसपैठ करने की कोशिश की. भारतीय सैनिकों ने इस कोशिश को नाकाम कर दिया. इसमें दोनों तरफ से कुछ सैनिकों के घायल होने की खबर आई है.
इससे पहले जून 2020 में, लद्दाख की गलवान घाटी में भारत और चीनी सैनिकों के बीच एक बड़ी हिंसक झड़प हुई थी. शुक्रवार की घटना के बाद सोशल मीडिया पर एक तस्वीर शेयर की जा रही है, जिसके बारे में कुछ लोग दावा कर रहे हैं कि ये झड़प में मारे गए भारतीय सैनिकों की तस्वीर है.
इस तस्वीर में वर्दी पहने हुए कुछ जवान बिस्तर पर लेटे हुए हैं. उनके आसपास खड़े कुछ जवान अपने साथियों को देख रहे हैं. एक ट्विटर यूजर ने इस तस्वीर को पोस्ट करते हुए लिखा, 'चीन के साथ हुई झड़प में मारे गए भारतीय सैनिक.'
इस पोस्ट का आर्काइव्ड वर्जन यहां देखा जा सकता है.
इंडिया टुडे फैक्ट चेक ने पाया कि भारत-चीन के सैनिकों के बीच हुई इस ताजा झड़प में किसी भी भारतीय सैनिक के मारे जाने की कोई खबर नहीं है. सात साल पुरानी ये तस्वीर साल 2015 की है. तब छत्तीसगढ़ में माओवादियों के साथ हुई झड़प में घायल स्पेशल टास्क फोर्स (STF) के कुछ जवान शहीद हो गये थे और कुछ घायल हुए थे.
कैसे पता लगाई सच्चाई?
जब हमने इस तस्वीर को रिवर्स सर्च किया तो इसके साथ हमें साल 2015 की कुछ मीडिया रिपोर्ट्स मिलीं. इन रिपोर्ट्स के मुताबिक 11 अप्रैल, 2015 में छत्तीसगढ़ के सुकमा में, STF और माओवादियों के बीच मुठभेड़ हुई थी.
‘इंडिया टुडे’ की रिपोर्ट के मुताबिक इस मुठभेड़ में STF के सात जवान मारे गए थे और कुछ घायल हुए थे. इस झड़प में घायल हुए जवानों की तस्वीर को ही भारत-चीन के बीच हुई झड़प में मारे गए भारतीय सैनिकों की तस्वीर बताकर पेश किया जा रहा है.
9 दिसंबर को हुई भारत-चीन सैनिकों की इस झड़प को लेकर 13 दिसंबर को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने राज्यसभा में बयान भी दिया.
उन्होंने बताया, 'चीनी सैनिकों ने तवांग सेक्टर में एलएसी पर यथास्थिति को बदलने की इकतरफा कोशिश की जिसे भारतीय सैनिकों ने नाकाम कर दिया.'
उनके मुताबिक इस घटना में दोनों ओर के सैनिक घायल भी हुए लेकिन किसी भी भारतीय सैनिक की न तो मृत्यु हुई और न ही कोई सैनिक गंभीर रूप से घायल हुआ है.