महाराष्ट्र चुनाव के मद्देनजर सोशल मीडिया पर आजतक का बताकर एक न्यूज क्लिप काफी शेयर की जा रही है. इस वीडियो में इस्लामिक संगठनों द्वारा महाराष्ट्र के विपक्षी गठबंधन “महा विकास अघाड़ी” (एमवीए) से की गई कथित मांगों के बारे में बताया जा रहा है.
वायरल वीडियो के अनुसार, “जमीयत उलेमा ए हिन्द”, “रजा एकेडमी” और “जमात ए इस्लामी” जैसे इस्लामिक संगठनों ने एमवीए के सामने पांच मांगें रखी हैं. वीडियो में ये भी बताया गया है कि इन मांगों को मान लेने के बाद ही ये संगठन मुस्लिम समुदाय को फतवा जारी करके विपक्षी गठबंधन को वोट देने के लिए कहेंगे.
आजतक के नाम से वायरल इस न्यूज क्लिप के अनुसार ये मांगें हैं- महाराष्ट्र का उपमुख्यमंत्री मुसलमान हो, मंत्रिमंडल में 25% सदस्यता मुसलमानों की हो, मुसलमानों को आरक्षण मिले, एमवीए वक्फ बोर्ड संशोधन अधिनियम का विरोध करे, और मदरसों को वित्तीय सहायता मिले.
इसके साथ ही सूत्रों के हवाले से ये भी कहा गया है कि एमवीए में शामिल उद्धव ठाकरे और शरद पवार ने इन मांगों को मान लिया है. वायरल वीडियो को कई यूजर्स एक्स पर शेयर कर चुके हैं.
आजतक फैक्ट चेक ने पाया कि ये न्यूज क्लिप फर्जी है. आजतक ने ऐसी कोई खबर नहीं चलाई है. इस्लामिक संगठनों ने भी इस बात की पुष्टि की है कि उन्होंने एमवीए से ऐसी कोई मांग नहीं की.
कैसे पता चली सच्चाई?
हमने वायरल वीडियो को गौर से देखा तो हमें नीचे की पट्टी पर चल रही खबर नजर आई. इसमें प्रधानमंत्री के वाराणसी दौरे और वहां महाकाल एक्सप्रेस के उद्घाटन के बार में बताया जा रहा है. थी. इस जानकारी के आधार पर सर्च करने पर हमें आजतक पर छपी 16 फरवरी 2020 की रिपोर्ट मिली. इसके अनुसार, पीएम मोदी 16 फरवरी 2020 को अपने संसदीय क्षेत्र वाराणसी के दौरे पर गए थे. इससे जुड़ा हमें एएनआई का एक ट्वीट भी मिला. यहां ये बात तो साफ हो गई कि वायरल न्यूज क्लिप अभी की नहीं बल्कि 2020 की है.
इसके अलावा हमें पता चला कि आजतक ने इस तरह की कोई वीडियो रिपोर्ट नहीं चलाई है. वीडियो को आगे देखने पर हमने पाया कि इस्लामिक संगठनों की मांगें लिखते हुए जिस फॉन्ट का इस्तेमाल किया गया है, वैसा फॉन्ट आजतक इस्तेमाल ही नहीं करता है.
हमने इसके बाद वीडियो में जिन तीन संगठनों का जिक्र किया गया है, उनसे जुड़े सदस्यों से बात की. जमीयत उलेमा ए हिन्द के प्रवक्ता अजीमुल्लाह ने हमसे कहा कि उनके संगठन ने ऐसी कोई मांग नहीं की है. साथ ही जमात ए इस्लामी के सेक्रेटरी शेख अब्दुल मुजीब और रजा एकेडमी के सेक्रेटरी मुस्तफा रजा ने भी यही कहा कि उनके संगठनों ने किसी राजनीतिक पार्टी से ऐसी कोई मांग नहीं की है.
इस तरह ये साफ हो जाता है कि आजतक की चार साल पुरानी न्यूज रिपोर्ट को एडिट करके फर्जी दावे के साथ शेयर किया जा रहा है.