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फैक्ट चेक: सात पुरानी तस्वीर के जरिये किसान आंदोलन में खालिस्तानियों की मौजूदगी का दावा

इंडिया टुडे एंटी फेक न्यूज़ वॉर रूम ने पाया कि तस्वीर के साथ किया जा रहा दावा भ्रामक है. ये तस्वीर साल 2013 में ऑपरेशन ब्लू स्टार की 29वीं वर्षगांठ पर अमृतसर के स्वर्ण मंदिर में खींची गई थी. इस तस्वीर का मौजूदा किसान आंदोलन से कोई संबंध नहीं है.

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आजतक फैक्ट चेक

दावा
तस्वीर में देखा जा सकता है कि कैसे किसान आंदोलन की आड़ में प्रदर्शनकारी खालिस्तान बनाने की मांग कर रहे हैं.
सोशल मीडिया यूजर्स
सच्चाई
तस्वीर साल 2013 में ऑपरेशन ब्लू स्टार की 29वी वर्षगांठ पर अमृतसर के स्वर्ण मंदिर में खींची गई थी. इस तस्वीर का मौजूदा किसान आंदोलन से कोई संबंध नहीं है.

कृषि कानूनों के खिलाफ चल रहे किसान आंदोलन में खालिस्तानी एंगल होने की बात उठ रही है. कुछ लोगों का आरोप है कि ये आंदोलन खालिस्तानियों की ओर से प्रायोजित है. इसी के मद्देनजर सोशल मीडिया पर एक तस्वीर काफी शेयर की जा रही है. तस्वीर में एक सिख खालिस्तान के समर्थन में पोस्टर दिखाते हुए नजर आ रहा है. पोस्टर में अंग्रेजी में लिखा है, "हम खालिस्तान चाहते हैं." इस तस्वीर को मौजूदा किसान आंदोलन से जोड़ा जा रहा है. दावा किया जा रहा है कि किसान आंदोलन की आड़ में प्रदर्शनकारी खालिस्तान बनाने की मांग कर रहे हैं.

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इंडिया टुडे एंटी फेक न्यूज़ वॉर रूम (AFWA) ने पाया कि तस्वीर के साथ किया जा रहा दावा भ्रामक है. ये तस्वीर साल 2013 में ऑपरेशन ब्लू स्टार की 29वीं वर्षगांठ पर अमृतसर के स्वर्ण मंदिर में खींची गई थी. इस तस्वीर का मौजूदा किसान आंदोलन से कोई संबंध नहीं है.

इस तस्वीर को शेयर करते हुए लोग कैप्शन में लिख रहे हैं, "इनका आंदोलन किसान आंदोलन नहीं है इनका मकसद खालिस्तान बनाना- इसके पीछे कहीं न कहीं काँग्रेस और आपिया -गिरगिट है". फेसबुक के अलावा इस तस्वीर को गलत दावे के साथ ट्विटर पर भी पोस्ट किया जा रहा है. पोस्ट का आर्काइव यहां देखा जा सकता है.

रिवर्स सर्च करने पर हमें ये तस्वीर Getty Images की वेबसाइट पर मिली. यहां दी गई जानकरी के मुताबिक, तस्वीर स्वर्ण मंदिर के 'अकाल तख्त' पर 6 जून 2013 को खींची गई थी. स्वर्ण मंदिर में हर साल 6 जून को घल्लूघारा दिवस मनाया जाता है. इस दिन यहां 1984 में हुए ऑपरेशन ब्लू स्टार में मारे गए लोगों को याद किया जाता है.

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2013 में ऑपरेशन ब्लू स्टार को 29 साल हुए थे और इसी दौरान ये तस्वीर खींची गई थी. तस्वीर में खालिस्तान के समर्थन में पोस्टर लिए दिख रहा व्यक्ति सिखों के एक उग्र संगठन का कार्यकर्ता है. ये तस्वीर न्यूज एजेंसी AFP के फोटोग्राफर नरिंदर नानू ने खींची थी. कई और भी विश्वसनीय वेबसाइट पर ये तस्वीर इसी जानकारी के साथ दी गई है. यहां इस बात की पुष्टि हो जाती है कि वायरल तस्वीर सात साल से ज्यादा पुरानी है और और इसका मौजूदा किसान आंदोलन से कोई लेना-देना नहीं है.

अगर बात करें खालिस्तान वाले एंगल की, तो बीजेपी के कुछ नेताओं का कहना है कि विरोध कर रहे किसानों का एक वर्ग खालिस्तान समर्थक है. न्यूज़ रिपोर्ट्स के अनुसार, बीजेपी नेता दुष्यंत कुमार गौतम ने आरोप लगाया है कि किसान आंदोलन में पाकिस्तान और खालिस्तान के समर्थन में नारे लगाए जा रहे हैं. कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में ये भी बताया गया है कि किसान आंदोलन के दौरान पंजाब के बरनाला में प्रदर्शनकारियों ने रेलवे ट्रैक पर खालिस्तान जिंदाबाद के नारे लगाए. प्रदर्शनकारियों के हाथों में अलगाववादी नेता जरनैल सिंह भिंडरावाला के बैनर-पोस्टर भी देखे गए.

खालिस्तान आंदोलन 1980 के दशक में चला एक सिख अलगाववादी आंदोलन था. इस आंदोलन में पंजाब क्षेत्र में ‘खालिस्तान’ (खालसा की भूमि) नाम से एक अलग स्वायत्त राज्य की मांग की गई थी, इसलिए इसका नाम खालिस्तान आंदोलन पड़ा था.
 

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