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फैक्ट चेक: नागपुष्प का रहस्य, क्या सच में 36 साल बाद ही खिलते हैं ये फूल?

'36 साल बाद खिलता है नागपुष्प, पिछली भोर 3.30 मिनट पर ये मानसरोवर में खिला' फेसबुक यूजर उत्पल कुमार बोस ने 2016 में इसी दावे के साथ ये पोस्ट शेयर की, लेकिन 3 साल बाद एक बार फिर ये तस्वीर शेयर की जाने लगी है.

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आजतक फैक्ट चेक

दावा
36 साल बाद एक बार खिलता है नागपुष्प
फेसबुक यूजर 'उत्पल बोस'
सच्चाई
ये तस्वीर समुद्री जीव सी पेन की है किसी पेड़ या पौधे की नहीं.

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'36 साल बाद खिलता है नागपुष्प, पिछली भोर 3.30 मिनट पर ये मानसरोवर में खिला' फेसबुक यूजर उत्पल कुमार बोस ने 2016 में इसी दावे के साथ ये पोस्ट शेयर की, लेकिन 3 साल बाद एक बार फिर ये तस्वीर शेयर की जाने लगी है. खबर लिखे जाने तक 16 हजार लोगों ने इसे साझा किया है.

इस पोस्ट का आर्काइव यहां देखा जा सकता है.

इंडिया टुडे एंटी फेक न्यूज वॉर रूम ने पाया कि ये दावा पूरी तरह गलत है. ये कोई हिमालय का पेड़ नहीं, बल्कि समुद्र के भीतर पाया जाने वाला जीव है जिसे 'सी पेन' के नाम से भी जाना जाता है.

2016 में अंतरराष्ट्रीय फेक चेकिंग बेवसाइट 'Snopes ' ने भी ये खबर छापी थी और इस दावे का खंडन किया था.

रिवर्स सर्च के जरिए हमें असली तस्वीर का पता चल गया. असली तस्वीर Gordon B Bowbrick ने 2013 में ली थी.

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'सी पेन ' समुद्र के भीतर पाए जाने वाले एक प्रकार के जंतु हैं जैसे कोरल. इन्हें 'Anthozoa 'के नाम से भी जाना जाता है. 

इस जंतु का नाम सी पेन इसलिए पड़ा, क्योंकि ये पंख फैला सकते हैं. इसे दुनिया के तकरीबन हर क्षेत्र में गहरे समंदर या किनारे की ओर देखा जा सकता है जहां डाइविंग की जाती है.

वहीं, नागपुष्प एक संस्कृत शब्द है जिसका वैज्ञानिक नाम 'Mesua ferrea' है.

ये एक सदाबहार पेड़ है और इसके फूल हर साल गर्मी के मौसम में उगते हैं. इसलिए 36 साल में एक बार हिमालय में उगने का दावा झूठा है. साथ ही वायरल तस्वीर नागपुष्प की नहीं, बल्कि एक समुद्री जीव की है न कि किसी पौधे की.

क्या आपको लगता है कोई मैसैज झूठा ?
सच जानने के लिए उसे हमारे नंबर 73 7000 7000 पर भेजें.
आप हमें factcheck@intoday.com पर ईमेल भी कर सकते हैं
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