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फैक्ट चेक: बेसहारा हुई बहनों को अधिकारी ने दिया मदद का भरोसा, लेकिन नहीं कही 5 लाख देने की बात

इंडिया टुडे एंटी फेक न्यूज वॉर रूम (AFWA) ने पाया कि पोस्ट के साथ किया जा रहा दावा भ्रामक है. एसडीएम से मिलने आई लड़की को पीएससी की कोचिंग के लिए 5 लाख रुपये देने की बात सच नहीं है. हालांकि एसडीएम ने इन बच्चियों की पढ़ाई में मदद करने और एक बेटी के लिए कोचिंग संस्थानों से बात करने का आश्वासन जरूर दिया था.

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आजतक फैक्ट चेक

दावा
मध्य प्रदेश के एक अधिकारी ने पति की मृत्यु के बाद एक महिला की बेटियों को पढ़ाई में मदद का भरोसा दिया और एक बेटी को कोचिंग के लिए 5 लाख रुपये देने की बात कही.
सोशल मीडिया यूजर्स
सच्चाई
वायरल पोस्ट भ्रामक है. एसडीएम सौरभ मिश्रा ने महिला की बेटियों को मदद का भरोसा जरूर दिया है, लेकिन 5 लाख तक की आर्थिक मदद देने की बात नहीं कही है.

सोशल मीडिया पर वायरल एक तस्वीर के जरिये मध्य प्रदेश के एक एसडीएम की खूब तारीफ की जा रही है. इस तस्वीर में एक व्यक्ति को एक महिला और दो बच्चियों के साथ देखा जा सकता है. तस्वीर के साथ दावा किया जा रहा है कि मध्य प्रदेश में टीकमगढ़ के एसडीएम सौरभ मिश्रा अपने पति का मृत्यु प्रमाणपत्र बनवाने आई महिला की आपबीती सुनकर भावुक हो गए. उन्होंने महिला की दो बेटियों की पढ़ाई और एक बेटी को पीएससी कोचिंग के लिए 1 से 5 लाख तक रुपये देने की जिम्मेवारी ले ली. पोस्ट में एसडीएम की सराहना की गई है. कमेंट सेक्शन में भी लोग एसडीएम साहब की दरियादिली और इंसानियत की मिसाल दे रहे हैं.

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इंडिया टुडे एंटी फेक न्यूज वॉर रूम (AFWA) ने पाया कि पोस्ट के साथ किया जा रहा दावा भ्रामक है. एसडीएम से मिलने आई लड़की को पीएससी की कोचिंग के लिए 5 लाख रुपये देने की बात सच नहीं है. हालांकि एसडीएम ने इन बच्चियों की पढ़ाई में मदद करने और एक बेटी के लिए कोचिंग संस्थानों से बात करने का आश्वासन जरूर दिया था.

इस पोस्ट को फेसबुक और ट्विटर पर कई यूजर्स ने शेयर किया है. पोस्ट का आर्काइव यहां देखा जा सकता है.

क्या है सच्चाई?

वायरल पोस्ट की पड़ताल के लिए हमने सबसे पहले टीकमगढ़ के एसडीएम सौरभ मिश्रा से संपर्क किया. उन्होंने बताया कि कुछ दिन पहले राजकुमारी प्रजापति नाम की महिला अपने पति के मृत्यु प्रमाण पत्र का आवेदन देने मेरे दफ्तर में आई थीं. उनके साथ उनकी तीन बेटियां भी थीं. उसके पति का कोरोना से निधन हो गया था. बातचीत के दौरान उसकी बेटियों में मुझे काफी प्रतिभा दिखी. वे आगे पढ़ना भी चाहती हैं. लेकिन उन्होंने आर्थिक तंगी के चलते आगे पढ़ाई जारी रखने में असमर्थता जताई. इस पर हमने 12वीं में पढ़ने वाली बड़ी बेटी नैंसी प्रजापति से कहा कि अगर आप इंदौर या भोपाल में ग्रेजुएशन के साथ PSC की तैयारी करना चाहो तो हम वहां कोचिंग के लिए मदद करने की कोशिश कर सकते हैं.

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सौरभ मिश्रा ने बताया कि 2016 में जब मुझे PSC में पहली रैंक मिली तो भोपाल में कई कोचिंग संचालकों से अच्छे संबंध बन गए. आए दिन मैं आर्थिक रूप से कमजोर और प्रतिभावान बच्चों को उनके पास भेजता हूं तो कोचिंग संचालक फीस माफ कर देते हैं या कम कर देते हैं. ऐसे कई बच्चे तो अधिकारी भी बन गए. इसी तरह मैंने इस बच्ची नैंसी प्रजापति को भी कोचिंग दिलाने में मदद की बात की थी.

उन्होंने साफ किया कि PSC कोचिंग की फीस के तौर पर 5 लाख तक रुपये देने की बात बिल्कुल निराधार है. हमने किसी भी सरकारी योजना या अपनी सैलरी से 5 लाख तक पैसे देने की बात नहीं कही है. हालांकि महिला की दो छोटी बेटियां निशा और महक जो स्कूल में पढ़ती हैं, उनके स्कूल या टूयूशन फीस में थोड़ी बहुत मदद की पेशकश जरूर की थी.

इसके बाद हमने तस्वीर में दिख रही लड़कियों और उनकी मां राजकुमारी प्रजापति से भी बात की. राजकुमारी ने बताया कि अपने पति का मृत्यु प्रमाणपत्र बनवाने के लिए उनके ऑफिस मिलने गए थे तब उन्होंने हमारे हालात को देखकर हमारी दो छोटी बेटियों की स्कूल और टूयूशन फीस के लिए मदद देने की बात कही थी. साथ ही मेरी बड़ी बेटी से कहा था कि अगर वह आगे कॉलेज या कोचिंग में पढ़ना चाहे तो वे मदद करने की कोशिश करेंगे.

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उन्होंने हमें तीनों बहनों की कुछ तस्वीरें भी भेजीं, जिन्हें नीचे देखा जा सकता है.  

हमारी तफ्तीश में ये साबित हो जाता है कि टीकमगढ़ के एसडीएम की ओर से PSC कोचिंग के लिए 5 लाख तक का फंड देने की बात निराधार है.  हालांकि, ये सच है कि एसडीएम सौरभ मिश्रा ने इन लड़कियों को आगे की पढ़ाई में मदद करने की बात कही है.

(टीकमगढ़ से सुधीर कुमार जैन के इनपुट के साथ)

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