पाकिस्तान नौसेना ने मंगलवार को दावा किया कि एक भारतीय पनडुब्बी पाकिस्तान की जल सीमा के तरफ बढ़ती देखी गई और उसने घुसपैठ की कोशिशों को नाकाम कर दिया। अपने दावे को सही ठहराने के लिए पाक नेवी ने एक वीडियो क्लिप भी जारी किया जिस पर लिखा था भारतीय पनडुब्बी का असली फुटेज.
इंडिया टुडे एंटी फेक न्यूज वॉर रूम (AFWA) ने पड़ताल में पाया कि पाकिस्तान का यह दावा भ्रामक है. पाकिस्तान सरकार जिस वीडियो क्लिप के आधार पर यह दावा कर रही है, असल में वो वीडियो पुराना है, इस क्लिप को सच बनाने के लिए उस पर ग्राफिक्स के जरिए छेड़छाड़ की गई है.
पाकिस्तान सरकार के आधिकारिक तौर पर भारतीय नौसेना पर आरोप लगाने से पहले ही मंगलवार सुबह से पाकिस्तानी मीडिया में ये वीडियो ब्रेकिंग न्यूज के तौर पर चलाया जा रहा था. इतना ही नहीं वहां सोशल मीडिया पर भी ये खबर वायरल होने लगी थी कि पाकिस्तान नेवी ने भारतीय सबमरीन के पाकिस्तानी जल क्षेत्र में घुसने के प्रयास को नाकाम कर दिया है.
पाकिस्तानी मीडिया ने ये वीडियो चलाना शुरू कर दिया और दावा किया कि पाकिस्तान सरकार ने सबूत के तौर पर वीडियो मुहैया करवाया है. ऐसा होने के काफी देर बाद इमरान सरकार ने आधिकारिक बयान भी जारी किया. मंगलवार दोपहर पाकिस्तान की इंफॉर्मेशन मिनिस्ट्री ने पहले ट्वीट किया, उसके बाद वहां के डायरेक्टर जनरल पब्लिक रिलेशंस (नेवी) ने ये वीडियो पोस्ट करते हुए स्टेटमेंट जारी किया.
कुल 50 सेकंड के इस वीडियो में पहले कुछ सेकेंड तक सबमरीन की कुछ तस्वीरें नजर आती हैं जिन्हें पाकिस्तानी जल क्षेत्र में दाखिल होने की कोशिश करने वाली भारतीय पनडुब्बी की फाइल फोटो बताया जाता है. इसके बाद पानी में एक पनडुब्बी का मास्ट यानी (सबमरीन का ऊपरी हिस्सा) आगे बढ़ता नजर आता है. इसके बाद 43 सेकंड के वीडियो पर एक बैंड भी दिखाई देता है जिस पर लिखा गया है "एक्चुअल फुटेज ऑफ डिटेक्टेड इंडियन सबमरीन." वीडियो पर नजर आ रही एविएशन डिटेल्स में तारीख, समय और जियोलोकेशन कोऑर्डिनेट्स दिखाई देते हैं. इसके अनुसार यह वीडियो 4 मार्च 2019 की रात 8 बजकर 35 मिनट का है.
भारत में कई सोशल मीडिया यूजर्स ने इस वीडियो को साल 2016 का बताया जब पाकिस्तान ने ऐसा ही दावा किया था कि भारतीय पनडुब्बी ने पाकिस्तानी जल क्षेत्र में घुसने का प्रयास किया. भारत ने उस समय भी इन दावों का खंडन किया था. अंतर्राष्ट्रीय मीडिया ने इस घटना को प्रमुखता से छापा था. पाकिस्तान के डॉन न्यूज ने भी 18 नवंबर 2016 को इस वीडियो को कथित रूप से यह कहते हुए प्रसारित किया था कि पाकिस्तान सरकार ने उन्हें यह वीडियो दिया है.
हमें इस वायरल हो रहे 43 सेकंड के वीडियो में कई समानताएं नजर आईं. साल 2016 वाले फुटेज में फ्लाइट डेटा मौजूद नहीं था, हालांकि पूरे वीडियो पर वही बैंड नजर आया जिस पर लिखा था "एक्चुअल फुटेज ऑफ डिटेक्टेड इंडियन सबमरीन."
साल 2016 और 2019 दोनों ही बार पाकिस्तान ने केवल 43 सेकंड का छोटा वीडियो दिखाया जिन पर एक जैसा बैंड था. वीडियो को ध्यान से देखने पर ये साफ होता है कि ये एक ही वीडियो के दो अलग अलग हिस्से हैं.
अब सवाल ये उठता है कि वीडियो पर समय, तारीख और जियोलोकेशन दर्शाने वाला फ्लाइट डेटा कहां से आया? इसकी पड़ताल करने पर हमने पाया कि किसी भी वीडियो पर फ्लाइट डेटा लगाना आसान काम है. इसके लिए "डैशवेयर" नाम के सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल किया जा सकता है और इससे न केवल कुछ मिनट में फ्लाइट डेटा लगाया जा सकता है बल्कि इसे स्क्रीन पर नजर आ रहे डेटा के साथ सिंक भी किया जा सकता है.
यूट्यूब पर किसी वीडियो पर फ्लाइट डेटा लगाने के लिए कई ट्यूटोरियल वीडियोज भी उपलब्ध हैं.
भारत सरकार ने पाकिस्तान के इस दावे को सिरे से नकारते हुए इसे भ्रामक और दुषप्रचार करार दिया है.