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फैक्ट चेक: पीएम मोदी की ये तस्वीरें संत कबीर की मजार की हैं, किसी मस्जिद की नहीं

इंडिया टुडे एंटी फेक न्यूज़ वॉर रूम (AFWA) ने पाया कि तस्वीर के साथ किया जा रहा दावा भ्रामक है. तस्वीर में दिख रहा स्थल कोई मस्जिद नहीं, बल्कि भारत के प्रसिद्ध संत कवि कबीर दास की मजार है, जहां 2018 में पीएम मोदी ने चादर चढ़ाई थी.

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आजतक फैक्ट चेक

दावा
पीएम नरेंद्र मोदी और यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ मस्जिद में गए.
सोशल मीडिया यूजर्स
सच्चाई
तस्वीर में दिख रहा स्थल कोई मस्जिद नहीं, बल्कि संत कबीर दास की मजार है, जहां 2018 में पीएम मोदी ने चादर चढ़ाई थी.

सोशल मीडिया पर पीएम नरेंद्र मोदी की कुछ तस्वीरें वायरल हो रही हैं, जिनेमें वे एक कब्र पर चादर और माला चढ़ाते हुए दिख रहे हैं. तस्वीर में उनके साथ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी मौजूद हैं. कुछ लोग हैरानी दिखाते हुए तस्वीर के साथ दावा कर रहे हैं कि पीएम मोदी और योगी आदित्यनाथ एक मस्जिद गए.

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तस्वीरों के कोलाज को शेयर करते हुए कैप्शन में सोशल मीडिया यूजर लिख रहे हैं, "हैरान हूं गालिब तुम्हें मस्जिद में देख कर ऐसा भी क्या हुआ कि खुदा याद आ गया ।। यही काम कोई और नेता करें तो वो पाकिस्तानी हैं."

इंडिया टुडे एंटी फेक न्यूज़ वॉर रूम (AFWA) ने पाया कि तस्वीर के साथ किया जा रहा दावा भ्रामक है. तस्वीर में दिख रहा स्थल कोई मस्जिद नहीं, बल्कि भारत के प्रसिद्ध संत कवि कबीर दास की मजार है, जहां 2018 में पीएम मोदी ने चादर चढ़ाई थी.

फेसबुक पर ये पोस्ट काफी वायरल हो रही है. इस भ्रामक पोस्ट को 2019 में भी लोगों ने शेयर किया था. पोस्ट का आर्काइव यहां देखा जा सकता है. 

वायरल तस्वीर को रिवर्स सर्च करने पर हमें इससे जुड़े कई न्यूज आर्टिकल मिले. 28 जून, 2018 को पीएम मोदी योगी आदित्यनाथ के साथ संत कबीर नगर के मगहर में स्थित कबीर की समाधि पर पहुंचे थे. यहां संत कबीर की 500वीं पुण्यतिथि के मौके पर पीएम मोदी ने उनकी समाधि पर फूल और चादर चढ़ाई थी. इस दौरान उन्होंने संत कबीर अकादमी की आधारशिला रखी थी और एक रैली को भी संबोधित किया था.

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मस्जिद और मजार में फर्क होता है. मस्जिद में मुस्लिम समुदाय के लोग नमाज अदा करते हैं, वहीं मजार सूफी संतों की कब्र पर बनाए गए मकबरे को कहा जाता है. मजार को सिर्फ इस्लाम से नहीं जोड़ा जा सकता. संत कबीर 15वीं सदी के रहस्यवादी कवि और संत थे.

कबीर की मुख्य कृतियों में साखी, सबद और रमैनी हैं, जिनमें संकलित दोहे, पद और भजन काफी लोकप्रिय हैं. इसके अलावा, भारतीय साहित्य में कबीर दास को एक क्रांतिकारी कवि माना जाता है, जिन्होंने अपनी रचनाओं में जाति और धर्म से जुड़ी रूढ़ियों और कुरीतियों की खूब धज्जियां उड़ाई हैं.

यहां पर ये बात साफ है कि वायरल पोस्ट में कही गई बात भ्रामक हैं. पीएम मोदी और योगी आदित्यनाथ की ये तस्वीरें मजार की हैं, मस्जिद की नहीं. हालांकि, ऐसा नहीं है कि पीएम मोदी कभी मस्जिद न गए हों. सितंबर, 2018 में पीएम मोदी इंदौर स्थित सैफी मस्जिद गए थे. इस दौरान उन्होंने बोहरा समाज के एक कार्यक्रम में शिरकत की थी. 2018 में ही मोदी सिंगापुर की एक मस्जिद में भी गए थे.
 

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