सुप्रीम कोर्ट के फैसले से पहले दशकों तक इस बात पर बहस चलती रही कि अयोध्या में विवादित स्थल पर मंदिर था या नहीं. लेकिन कोर्ट में इतनी लंबी लड़ाई के बाद अब राम मंदिर का निर्माण क्या बाबरी मस्जिद वाली जगह से तीन किलोमीटर दूर हुआ? सोशल मीडिया पर गूगल मैप्स के एक स्क्रीनशॉट के जरिए कुछ ऐसा ही दावा किया जा रहा है.
यहां तक कि शिवसेना नेता (उद्धव ठाकरे गुट) संजय राउत ने भी ये कहा कि बीजेपी का नारा था कि “मंदिर वहीं बनाएंगे” लेकिन मंदिर तो वहां नहीं बना जहां बाबरी मस्जिद गिराई थी. वो तो तीन किलोमीटर दूर बन रहा है.
तमाम लोग बाबरी मस्जिद से दूर मंदिर बनने की बात कहते हुए गूगल मैप्स का एक स्क्रीन शॉट शेयर कर रहे हैं. इस स्क्रीनशॉट में गूगल मैप्स के सैटेलाइट व्यू में दो जगहों को मार्किंग से दिखाया गया है. एक जगह पर “श्री रामजन्म भूमि मंदिर” लिखा है, वहीं दूसरी जगह “बाबर मस्जिद”. सैटेलाइट इमेज के हिसाब से दोनों जगहों के बीच खासी दूरी है.
इसके साथ फजील अहमद नाम के तथाकथित “मुस्लिम स्कॉलर” का एक वीडियो भी काफी वायरल हो रहा जो कुछ ऐसा ही दावा कर रहे हैं. एक पत्रकार से बातचीत में वो बोल रहे हैं कि हिंदू पक्ष ने मस्जिद वाली जगह के लिए इतनी लड़ाई की, मस्जिद को तोड़ भी दिया लेकिन राम मंदिर उस स्थल से तीन किलोमीटर दूर बना रहे हैं. इसलिए मस्जिद वाली जगह मुस्लिम समुदाय वापस दे दी जाए.
अयोध्या में 22 जनवरी 2024 को होने वाले राम मंदिर के प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम की हलचल के बीच ट्विटर, फेसबुक और इंस्टाग्राम पर ये पोस्ट सैकड़ों यूजर्स शेयर कर चुके हैं.
तीन किलोमीटर दूर मंदिर बनने की बात है एकदम बेबुनियाद
कारसेवकों ने 6 दिसंबर 1992 को अयोध्या में बनी सदियों पुरानी बाबरी मस्जिद के ढांचे को गिरा दिया था. खबरों के मुताबिक ढांचा धराशायी होने के बाद उस जगह पर एक चबूतरा बना कर तिरपाल के नीचे रामलला की मूर्ति को स्थापित कर दिया गया. ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि कोर्ट की तरफ तब तक वहां किसी भी तरह के निर्माण पर पूरी तरह से रोक थी.
तब से लेकर नवंबर 2019 में सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने तक रामलला इसी अस्थाई ढांचे में विराजमान थे और लोग यहीं पर जाकर पूजा-अर्चना करते थे.
लेकिन 2019 में सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में ये जगह हिन्दू पक्ष को सौंप दी और 2020 से यहां राम मंदिर बनना शुरू हो गया. इस बात की पुष्टि गूगल अर्थ की सैटेलाइट इमेज से भी होती है.
अगर “गूगल अर्थ” पर राम जन्मभूमि वाली जमीन की 2020 से पहले की तस्वीरें देखें तो यहां ज्यादा बदलाव नहीं दिखता. इन तस्वीरों में तिरपाल के नीचे अस्थाई ढांचे वाली वह जगह भी दिखती है जहां रामलला विराजमान थे. लेकिन 2020 से ही यहां मंदिर के निर्माण होते हुए देखा जा सकता है. इससे ये बात साबित हो जाती है कि जहां बाबरी मस्जिद थी उसी जगह पर मंदिर निर्माण हुआ है.
तो फिर गूगल मैप्स वाले स्क्रीनशॉट का क्या चक्कर है?
वायरल स्क्रीनशॉट में “बाबर मस्जिद” नाम की एक जगह बताई गई है जो राम मंदिर जन्मस्थल से थोड़ी दूरी पर है. जब हमने भी चेक किया तो वाकई गूगल मैप्स दोनों जगहों को अलग- अलग बता रहा है.
लेकिन जब हमने “बाबर मस्जिद” वाली जगह को गूगल मैप्स की जगह “गूगल अर्थ” पर देखा तो इस जगह का नाम सीता राम बिरला मंदिर दिख रहा है. इसके साथ में यहां इस मंदिर की एक फोटो भी मौजूद है जो सैटेलाइट इमेज से मेल खाती है.
दरअसल, गूगल मैप्स पर ये सुविधा उपलब्ध है कि यूजर किसी भी जगह को किसी भी नाम से टैग कर सकता है. ये नाम तब तक दिखेगा जब तक कोई इसे गलत रिपोर्ट ना कर दे. ये सुविधा गूगल मैप पर इसलिए दी जाती है कि लोग अपने लोकल बिजनेज को मैप पर दिखा सकें. लेकिन कई बार लोग इसमें गलत जानकारी और गलत फोटो लगा देते हैं जिसे लोगों की शिकायत के बाद सुधार दिया जाता है.
क्या वाकई इस जगह के आसपास कोई मस्जिद है?
इस बात को पुख्ता करने के लिए हमने आज तक संवाददाता बनवीर सिंह को ठीक उसी जगह भेजा जिसे वायरल फोटो में बाबर मस्जिद दिखाया जा रहा है. उन्होंने पाया कि यहां पर सिर्फ एक छोटा सा खंडहर है. सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड कमेटी, अयोध्या के अध्यक्ष आजम कादरी ने हमें बताया कि यह खंडहर क़ुतुबर रहमान मस्जिद दरगाह के हैं. हमारे संवाददाता ने इस खंडार की हमें कुछ तस्वीर भी भेजीं जिन्हें यहां देखा जा सकता है.
इस बात की पुष्टि हमें बाबरी मस्जिद के पक्षकार रहे इकबाल अंसारी ने भी की. अंसारी का कहना था कि जो जगह बिरला मंदिर के पास मौजूद है वो क़ुतुबर रहमान दरगाह की है. उनका भी यही कहना था कि यह दावा एकदम बेबुनियाद है कि राम मंदिर, बाबरी मस्जिद वाली जगह से दूर बन रहा है. इकबाल अंसारी का घर भी राम जन्मभूमि स्थल से काफी नज़दीक है.