क्या महाकुंभ के आखिरी दिन, यानी 26 फरवरी को एक और भगदड़ हुई थी, जिसमें पुलिस वालों ने श्रद्धालुओं पर डंडे तक बरसा दिए? सोशल मीडिया पर एक वीडियो शेयर करते हुए लोग कुछ ऐसा ही बोल रहे हैं. वीडियो में पुलिसकर्मियों के साथ लोगों की भारी भीड़ किसी इलाके से निकल रही है. देखते ही देखते पुलिस लाठीचार्ज कर देती है और ये लोग चीखते-चिल्लाते हुए भागने लगते हैं.
वीडियो पर लिखा है, “26 फरवरी को सुबह 3 बजे महाकुंभ में मची भगदड़. पुलिस वालों ने डंडे मारे.” इसका आर्काइव्ड वर्जन यहां देखा जा सकता है.
आजतक फैक्ट चेक ने पाया कि ये वीडियो प्रयागराज का नहीं, बल्कि पश्चिम बंगाल का है और नवंबर 2024 में हुई एक पुरानी घटना का है.
कैसे पता लगाई सच्चाई?
वीडियो के कीफ्रेम्स को रिवर्स सर्च करने पर हमें ये 15 नवंबर, 2024 के एक इंस्टाग्राम पोस्ट में मिला. प्रयागराज में महाकुंभ की शुरुआत 13 फरवरी, 2025 को हुई थी. इतना तो यहीं साफ हो जाता है कि ये वीडियो महाकुंभ शुरू होने से पहले का है.
इस पोस्ट में अंकुर बिस्वास नाम के एक शख्स ने कमेंट किया है कि ये वीडियो कृष्णानगर का है. कृष्णानगर, पश्चिम बंगाल के नदिया जिले का एक शहर है.
इसके बाद कीवर्ड सर्च की मदद से हमें इस घटना के बारे में छपी कुछ न्यूज रिपोर्ट्स मिलीं. नवंबर 2024 में छपी इन खबरों के मुताबिक ये घटना पश्चिम बंगाल के कृष्णानगर की है, जहां जगद्धात्री पूजा विसर्जन के दौरान पुलिस को लोगों की भारी भीड़ पर लाठीचार्ज करना पड़ा था.
दरअसल, 11 नवंबर, 2024 को जगद्धात्री पूजा के दौरान विसर्जन के लिए कुछ लोग बाघाडांगा बारवारी पूजा की मूर्ति को कृष्णानगर से राजबाड़ी ले जा रहे थे. जगद्धात्री पूजा के नियम के अनुसार मूर्ति का विसर्जन जलंगी नदी में होना था. लेकिन, रास्ते में कृष्णानगर के पोस्ट ऑफिस मोड़ पर कुछ लोगों की पुलिसकर्मियों से बहस और मारपीट हो गई, जिसके बाद पुलिस ने उनपर लाठीचार्ज कर दिया.
थोड़ा और खोजने पर हमें इसी इलाके का 11 नवंबर, 2024 का एक लाइव स्ट्रीम भी मिला. इसमें बताया गया है कि ये कृष्णानगर में जगद्धात्री पूजा विसर्जन का लाइव स्ट्रीम है. इस वीडियो में दिख रहा पीले रंग का बैनर और घंटाघर वायरल वीडियो में भी देखा जा सकता है. साफ है, वायरल वीडियो इसी जगह का है.
साफ है, पश्चिम बंगाल में नवंबर 2024 में हुई एक घटना को महाकुंभ के आखिरी दिन का बता कर लोगों में भ्रम फैलाया जा रहा है.