सोशल मीडिया पर 40 सेकेंड का एक वीडियो शेयर किया जा रहा है. दावे के मुताबिक इस वीडियो में दिखाया गया है कि सेना के अफसरों ने किस तरह एक घर के टेरेस पर जाकर ‘आतंकवादी’ से एके 47 छीनने के बहादुर कारनामे को अंजाम दिया. वीडियो में देखा जा सकता है कि एक शख्स बंदूक हाथ में लिए दूसरे टेरेस पर खड़े पुलिसवाले से बात कर रहा है.
वीडियो देखकर ऐसा लगता है कि पुलिसवाला बंदूक वाले शख्स को बातों में उलझाए रखने की कोशिश कर रहा है. तभी सादा कपड़ों में एक शख्स पीछे से दबे पांव आता है और बंदूक वाले से बंदूक पकड़ लेता है. छीनाझपटी में एके47 से गोलियां चलती हैं. इसी बीच कुछ और पुलिसवाले भीं वहां पहुंच जाते हैं और बंदूक वाले शख्स पर काबू पा लेते हैं.
वीडियो को ट्विटर और फेसबुक पर बड़ी संख्या में शेयर किया गया है. हमने जब दावे की सच्चाई जानने के लिए फेसबुक पर सर्च किया तो कई नतीजे सामने आए.
इंडिया टुडे फैक्ट चेक टीम ने अपनी पड़ताल मे वीडियो के दावे को झूठा पाया. ना तो बंदूक हाथ में लिए खड़ा शख्स आतंकवादी था और ना ही उससे बंदूक छीनने वाले भारतीय सेना से थे. जांच से पता चला कि ये वीडियो मार्च 2012 का है.
वीडियो के दावे की सच्चाई को लेकर कई नेट यूजर्स ने शक जताते हुए सवाल भी किए. फेसबुक यूजर अर्जुन माझी FRz ने अपने कमेंट में कहा कि वीडियो पुंछ का है और जिसके हाथ में AK47 है वो आतंकवादी नहीं है. हमने पड़ताल में पाया कि वीडियो में जो दिख रहा है, उस घटना पर टाइम्स ऑफ इंडिया समेत कई मीडिया हाउसों ने मार्च 2012 में रिपोर्टिंग भी की थी.
हमने श्रीनगर स्थित अपने संवाददाता से इस वीडियो को लेकर संपर्क किया तो उसने बताया कि ये घटना छह साल पुरानी है और जम्मू-कश्मीर के पुंछ जिले की है. बंदूक लिए खड़े शख्स की पहचान सेना के जवान ताहिर खान के तौर पर हुई और जिन लोगों ने उसकी पिटाई की वो स्थानीय पुलिसकर्मी थे.
पुलिस ने बताया, ‘खान को अपनी पत्नी पर शक था कि उसके किसी के साथ अवैध संबंध हैं. खान गुस्से में आपा इतना खो बैठा था कि अपनी पत्नी को जान से मारना चाहता था. वो राइफल के साथ पुंछ में आया था और अपनी पत्नी की तलाश कर रहा था. पत्नी तो उस वक्त भागने में कामयाब रही थी.
लेकिन खान की ओर से की गई अंधाधुंध फायरिंग में दो लोगों की मौत हो गई थी और दो अन्य घायल हो गए थे. सभी तथ्यों को जोड़ने से इस नतीजे पर पहुंचा गया कि वीडियो में किया गया दावा ना सिर्फ झूठा था बल्कि ये घटना भी छह साल पुरानी थी.