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फैक्ट चेक: इंफ्रास्ट्रक्चर के खिलाफ लड़ने की राहुल गांधी के अटपटे बयान की ये है सच्चाई

जब हमने इस बयान की सच्चाई पता लगाई तो पाया कि ये क्लिप 5 अगस्त को राहुल गांधी की एक प्रेस कॉफ्रेंस में कही गयी बात से काट कर निकाली गई है. इस अधूरे और छोटे से हिस्से को इस तरह से काट कर शेयर किया जा रहा है, जिससे ये बात अटपटी लगती है.

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आजतक फैक्ट चेक

दावा
कांग्रेस के नेता राहुल गांधी ने अपने बयान में कहा है कि वो हिंदुस्तान के पूरे इंफ्रास्ट्रचर के खिलाफ लड़ रहे हैं.
सोशल मीडिया यूजर्स
सच्चाई
ये राहुल गांधी के पूरे बयान का एक छोटा हिस्सा है. अपने पूरे बयान में उन्होंने आरोप लगाया था कि देश के तमाम इंस्टीट्यूशंस निष्पक्ष रहने की बजाय सरकार के साथ हैं.

सोशल मीडिया पर कांग्रेस नेता राहुल गांधी के बयान का एक हिस्सा इस तरह से वायरल हो रहा है जिसे सुनकर आप चक्कर में पड़ सकते हैं. चार सेकेंड की इस वीडियो क्लिप में राहुल कह रहे हैं, 'हम हिंदुस्तान के पूरे इंफ्रास्ट्रक्चर के खिलाफ लड़ रहे हैं.' 

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इस क्लिप को शेयर करते हुए सोशल मीडिया पर कई यूजर्स तंज कस रहे हैं.

 
एक ट्विटर यूजर ने लिखा, 'जहां एक ओर मोदी जी नए कश्मीर में नया इंफ्रास्ट्रक्चर खड़ा करके कश्मीर को बदल रहे हैं और सुनए पप्पू क्या कह रहा है. ये है ठग लीडर राहुल गांधी का दुर्लभ कबूलनामा !!!'

 


जब हमने इस बयान की सच्चाई पता लगाई तो पाया कि ये क्लिप 5 अगस्त को राहुल गांधी की एक प्रेस कॉफ्रेंस में कही गयी बात से काट कर निकाली गई है. इस अधूरे और छोटे से हिस्से को इस तरह से काट कर शेयर किया जा रहा है जिससे ये बात अटपटी लगती है.
 
दरअसल, उन्होंने आरोप लगाया था कि इस समय देश के तमाम संस्थानों पर आरएसएस और बीजेपी का कब्जा है और संस्थानों के इस पूरे इंन्फ्रास्ट्रक्चर को विपक्ष की आवाज दबाने के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है. लिहाजा उनकी लड़ाई पूरे इंफ्रास्ट्रक्चर के खिलाफ है.
 

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कैसे पता लगाई सच्चाई?  

राहुल गांधी के बयान की ये क्लिप एक प्रेस कॉफ्रेंस का हिस्सा लग रही है. कीवर्ड से खोजने पर हमें आसानी से 5 अगस्त, 2022 की ये प्रेस कॉफ्रेंस मिल गई. इसकी जानकारी कई मीडिया रिपोर्ट्स में भी है. 

 
राहुल की इस प्रेस कॉन्फ्रेंस का पूरा वीडियो कांग्रेस पार्टी के ऑफिशियल यूट्यूब चैनल पर भी मौजूद है. 

 
इस प्रेस कॉन्फ्रेंस दौरान एक सवाल के जवाब में राहुल का कहना था, 'किसी लोकतंत्र में जब विपक्ष लड़ता है तो वो इंस्टीट्यूशंस के बल पर लड़ता है. जो देश का लीगल, ज्यूडिशियल स्ट्रक्चर होता है, जो देश का इलेक्टोरल स्ट्रक्चर होता है, जो देश की मीडिया होती है उसके बल पर विपक्ष खड़ा होता है. वो सब जो इंस्टिट्यूशंस हैं वो सब के सब सरकार को पूरा सपोर्ट दे रहे हैं.'

 
राहुल आगे कहते हैं, 'क्यूंकि सरकार ने अपने लोग इंस्टिट्यूशंस में बिठाए हुए हैं. हिंदुस्तान का आज हर इंस्टिट्यूशन आजाद नहीं है. हिंदुस्तान का हर इंस्टिट्यूशन आज आरएसएस के कंट्रोल में है. आरएसएस का एक व्यक्ति हर इंस्टिट्यूशन में बैठा है. तो हम एक राजनैतिक पार्टी से नहीं लड़ रहे हैं.'


'हम हिंदुस्तान के पूरे इंफ्रास्ट्रक्चर के खिलाफ लड़ रहे हैं. जब हमारी सरकार होती थी इंफ्रास्ट्रक्चर न्यूट्रल रहता था. हम इंफ्रास्ट्रक्चर को कंट्रोल नहीं करते थे. दो राजनीतिक पार्टियों, तीन पार्टियों की लड़ाई होती थी. आज इंफ्रास्ट्रक्चर सरकार का पूरा का पूरा एक पार्टी के साथ है.'

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ये कोई पहला मौका नहीं है जब राहुल गांधी ने देश के इंस्टीट्यूशंस पर बीजेपी के हक में पक्षपात करने का आरोप लगाया हो.

साल 2019 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस की हार के बाद पार्टी के अध्यक्ष पद से इस्तीफा देते हुए भी उन्होंने ऐसी ही बात कही थी.  

राहुल गांधी


अपने इस्तीफे में उन्होंने लिखा था, 'हमने 2019 के चुनाव में एक पॉलिटिकल पार्टी के खिलाफ लड़ाई नहीं लड़ी. बल्कि हम देश की पूरी मशीनरी और उन संस्थानों के खिलाफ भी लड़ रहे थे, जिन्हें विपक्ष के खिलाफ तैनात किया गया. यह साफ है कि एक समय गौरव का अहसास कराने वाले निष्पक्ष इंस्टीट्यूशंस अब भारत में नहीं रहे.'


साफ है, राहुल गांधी अक्सर देश के इंस्टीट्यूशंस पर पक्षपाती होने का आरोप लगाते हैं. उनके ऐसे ही एक आरोप लगाने वाले बयान के वीडियो को काट कर उन पर निशाना साधा जा रहा है.

(रिपोर्ट- सुमित कुमार दुबे )

 

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