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उत्तर-पूर्वी दिल्ली से कांग्रेस उम्मीदवार कन्हैया कुमार पर हुए हमले को लेकर इन दिनों सोशल मीडिया पर एक तस्वीर काफी वायरल हो रही है. इस तस्वीर में कन्हैया कुमार को आंखें बंद करके बेड पर लेटा देखा जा सकता है.
फोटो के साथ कहा जा रहा है कि कन्हैया की ये तस्वीर उनको थप्पड़ मारे जाने के बाद की है. कन्हैया के विरोधी फोटो को शेयर करते हुए लिख रहे हैं कि एक थप्पड़ में कन्हैया का ये हाल हो गया.
एक फेसबुक यूजर ने कैप्शन में लिखा है, “हरियाणा कांग्रेस स्टार प्रचारक ये भारत के टुकड़े करने का सपने देखने वाला जिहादी को एक सनातनी के थप्पड़ ने लेटा दिया हैं”. फेसबुक एक्स और इंस्टाग्राम पर ये फोटो कई लोग शेयर कर चुके हैं. वायरल पोस्ट का आर्कइव्ड वर्जन यहां देखा जा सकता है.
17 मई को दिल्ली में कन्हैया कुमार को प्रचार के दौरान दक्ष चौधरी नाम के एक आदमी ने थप्पड़ मार दिया था. उन पर सियाही भी फेंकी गई थी. हमालवर के साथ एक अन्य शख्स भी मौजूद था. हमले के बाद दक्ष चौधरी की खूब पिटाई भी हुई. कांग्रेस और कन्हैया ने आरोप लगाए हैं कि दक्ष, उत्तर-पूर्वी दिल्ली बीजेपी उम्मीदवार मनोज तिवारी का खास आदमी है.
आजतक फैक्ट चेक ने पाया कि ये फोटो अभी की नहीं बल्कि 2016 की है जब कन्हैया कुमार की भूख हड़ताल पर बैठने के कारण तबीयत बिगड़ गई थी.
फोटो को रिवर्स सर्च करने से ही इसकी सच्चाई सामने आ गई. हमें 7 मई 2016 की ‘एनडीटीवी’ की एक खबर मिली जिसमें ये फोटो इस्तेमाल की गई है. ये मामला उस समय का है जब 9 फरवरी 2016 को दिल्ली के जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में कथित तौर पर देश विरोधी नारे लगे थे.
इस विवाद के बाद एक हाई लेवल कमेटी का गठन हुआ था जिसने 25 अप्रैल 2016 को कन्हैया कुमार और उनके कुछ साथियों की सजा का ऐलान किया था. कन्हैया उस समय जेएनयू छात्र संघ के अध्यक्ष थे. कन्हैया पर दस हजार का फाइन लगाया गया था, वहीं उनके साथी उमर खालिद और अनिर्बान भट्टाचार्य को एक सेमेस्टर के लिए निलंबित कर दिया गया था.
इसी सजा के खिलाफ कन्हैया और उनके साथी छात्र भूख हड़ताल पर बैठ गए थे. कई दिनों की हड़ताल के बाद कन्हैया की हालत बिगड़ने लगी थी. इसी के बाद उन्हें जेएनयू के हेल्थ सेंटर में भर्ती कराया गया था. बाद में उन्हें एम्स भी ले जाया गया.
ये फोटो उसी समय की है. इसे लेकर उस समय कई खबरें छपी थीं जिनमें कन्हैया की अलग-अलग एंगल से ली गई तस्वीरें देखी जा सकती हैं. तबीयत खराब हो जाने के बाद कन्हैया ने भूख हड़ताल खत्म कर दी थी.