बांग्लादेश में इस्कॉन मंदिर के महंत चिन्मय कृष्ण दास की गिरफ्तारी के बाद से वहां लगातार हिंदुओं पर हमलों की खबरें सामने आई हैं. इसी बीच सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो गया है जिसे बांग्लादेश में एक काली मंदिर पर मुस्लिम समुदाय द्वारा किए गए हमले से संबंधित बताया जा रहा है.
वीडियो में भीड़ के बीच दो लोगों को काली मां की मूर्ति का सिर उखाड़ते हुए देखा जा सकता है. मूर्ति के बगल में एक और मूर्ति है जिसका सिर, धड़ से अलग दिख रहा है. इस वीडियो को शेयर करते हुए एक एक्स यूजर ने लिखा, “कल बांग्लादेश में मुसलमानों ने कालीबाड़ी यानी काली मंदिर पर हमला करके माता काली और तमाम हिंदू देवी देवताओं की मूर्तियों को नष्ट कर दिया और मंदिर के अंदर मौजूद हिंदू भक्तों को मारा गया 20 से ज्यादा हिंदू भक्त बुरी तरह घायल है लेकिन पूरी दुनिया बांग्लादेश में हिंदुओं के कत्लेआम पर खामोश है” वायरल वीडियो फेसबुक पर भी जमकर शेयर किया जा रहा है. ऐसे ही एक पोस्ट का आर्काइव्ड वर्जन यहां देखा जा सकता है.
आजतक फैक्ट चेक ने पाया कि न तो ये वीडियो बांग्लादेश का है, न ही किसी मंदिर में मूर्ति तोड़े जाने का. ये पश्चिम बंगाल के पूर्व बर्धमान जिले में हुई काली पूजा का वीडियो है.
कैसे पता चली सच्चाई?
वायरल वीडियो के कीफ्रेम्स को रिवर्स सर्च करने से ये हमें 29 नवंबर, 2024 के एक फेसबुक पोस्ट में मिला. यहां दी गई जानकारी के अनुसार ये वीडियो “सुल्तानपुर काली माता निरंजन” नाम की एक धार्मिक परंपरा से संबंधित है. साथ ही, यहां बताया गया है कि ये वीडियो खंडघोष नाम के एक गांव का है, जो पश्चिम बंगाल के पूर्वी वर्धमान जिले में है. 30 नवंबर के एक इंस्टाग्राम पोस्ट में भी हमें वायरल वीडियो से मिलता-जुलता एक दूसरा वीडियो मिला. यहां भी इसे काली माता निरंजन की परंपरा के संदर्भ में ही शेयर किया गया है.
इन जानकारियों की मदद से कीवर्ड सर्च करने पर हमें 26 नवंबर, 2024 का एक फेसबुक पोस्ट मिला, जिसमें वायरल वीडियो से मिलता-जुलता एक अन्य वीडियो है. ये फेसबुक पोस्ट सुल्तानपुर किरणमयी पाठगृह नाम के अकाउंट से किया गया है. इस अकाउंट पर दी गई जानकारी के अनुसार, ये पश्चिम बंगाल के पूर्वी वर्धमान जिले के सुल्तानपुर गांव में स्थित एक लाइब्रेरी है. पोस्ट में बांग्ला भाषा में लिखे कैप्शन के अनुसार ये 12 साल में एक बार होने वाली काली माता पूजा के वीडियो हैं. इसका आयोजन सुल्तानपुर किरणमयी लाइब्रेरी और सुल्तानपुर गांव के निवासियों ने किया था.
फेसबुक पोस्ट में वायरल वीडियो वाली जगह पर ही काली माता की पूजा होते हुए देखी जा सकती है. हमने इन दोनों वीडियो की तुलना भी की, जिसे आप नीचे देख सकते हैं.
इसके बाद हमने सुल्तानपुर की इस लाइब्रेरी के सदस्य देवाशीश से बात की. उन्होंने हमें बताया कि वायरल वीडियो सुल्तानपुर के काली मंदिर का ही है.
उन्होंने ये भी बताया, “26 नवंबर, 2024 को सभी श्रद्धालु सुल्तानपुर काली मंदिर में काली माता निरंजन के लिए इकट्ठा हुए थे, ये पूजा 12 साल में एक बार होती है. हम काली मां की 13 फुट ऊंची मूर्ति की पूजा करते हैं. इसके बाद परंपरा के तहत सभी श्रद्धालु मूर्ति के अलग-अलग हिस्सों को लेकर विसर्जित करते हैं. ऐसा इसलिए भी किया जाता है क्योंकि ये मूर्ति काफी ऊंची और भारी होती है और मंदिर का दरवाजा छोटा है.”
हमें फेसबुक पर सुल्तानपुर के इसी मंदिर के कई वीडियो मिले जिनमें श्रद्धालुओं को काली मां की मूर्ति के अलग-अलग हिस्सों को विसर्जन के लिए ले जाते हुए देखा जा सकता है. इन लोगों को नाचते और जश्न मनाते हुए भी देखा जा सकता है.
हमने इस मंदिर को गूगल मैप्स पर भी खोजा. सुल्तानपुर काली मंदिर के फेसबुक वीडियो और गूगल मैप्स पर मौजूद तस्वीरों की तुलना करने से भी इस बात की तस्दीक होती है कि वायरल वीडियो बांग्लादेश का नहीं बल्कि पश्चिम बंगाल के सुल्तानपुर गांव का है.
हमने खंडघोष पुलिस के सब-इंस्पेक्टर राकेश रोशन से भी वायरल वीडियो के बारे में बात की. उन्होंने भी यही कहा कि ये काली माता की पूजा करने की कई सालों पुरानी परंपरा है. उन्होंने आजतक फैक्ट चेक को बताया, “सबसे पहले मंदिर का पुजारी काली मां की मूर्ति के सिर को विसर्जित करता है. इसके बाद बाकी श्रद्धालु मूर्ति के अलग-अलग हिस्से लेते हैं, उत्सव मनाते हुए एक यात्रा निकालते हैं और उन्हें विसर्जित करते हैं."