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फैक्ट चेक: ये रतन टाटा के नहीं, अटल बिहारी वाजपेयी के अंतिम संस्कार की तस्वीर है

उद्योगपति रतन टाटा के निधन के बाद उनके अंतिम संस्कार की बताकर एक तस्वीर सोशल मीडिया पर काफी वायरल हो रही है. आजतक ने इस वायरल तस्वीर का फैक्ट चेक किया है...

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आजतक फैक्ट चेक

दावा
ये उद्योगपति रतन टाटा के अंतिम संस्कार की तस्वीर है.
सोशल मीडिया यूजर्स
सच्चाई
ये रतन टाटा नहीं बल्कि पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के अंतिम संस्कार की तस्वीर है. टाटा का अंतिम संस्कार विद्युत शवदाह गृह में हुआ है.

उद्योगपति रतन टाटा के निधन के बाद उनके अंतिम संस्कार की बताकर एक तस्वीर सोशल मीडिया पर काफी वायरल हो रही है. फोटो में एक चिता जलती दिख रही है, जिसके पास कई लोग खड़े हैं.

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फोटो के साथ कैप्शन में लिखा है, “ये जल रहा है हुस्न शवाब, जवानी, अभिमान, नफरते, धर्म समाज, दौलत, शौहरत, तरक्की, लडाई, झगड़े अब किस चीज़ का घमंड हैं”. फोटो को रतन टाटा के निधन से जोड़कर इंस्टाग्राम और फेसबुक पर कई लोग शेयर कर चुके हैं. यूट्यूब पर भी कई यूजर्स ने फोटो को इसी दावे के साथ शेयर किया है.

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आजतक फैक्ट चेक ने पाया कि ये रतन टाटा नहीं बल्कि पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के अंतिम संस्कार की फोटो है. टाटा का अंतिम संस्कार विद्युत शवदाह गृह में हुआ है.

कैसे पता की सच्चाई?

वायरल तस्वीर को रिवर्स सर्च करने पर हमें ऐसी कई खबरें मिलीं जिनमें इसे अटल बिहारी वाजपेयी के अंतिम संस्कार का बताया गया है. वाजपेयी का निधन 16 अगस्त 2018 को दिल्ली के एम्स में हुआ था. अगले दिन दिल्ली स्थित राष्ट्रीय स्मृति स्थल में वो पंचतत्‍व में विलीन हुए थे. वाजपेयी की दत्तक पुत्री नमिता भट्टाचार्या ने उन्हें मुखाग्नि दी थी जिन्हें वायरल तस्वीर में भी देखा जा सकता है.

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इसी समय की कई अलग-अलग तस्वीरों को अन्य न्यूज रिपोर्ट्स में देखा जा सकता है. इस तरह ये बात साफ हो जाती है कि ये फोटो रतन टाटा के अंतिम संस्कार की नहीं है.

रतन टाटा का निधन 9 अक्टूबर को 86 साल की उम्र में मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में हुआ था. उनका अंतिम संस्कार मुंबई के वर्ली इलाके में स्थित एक विद्युत शवदाह गृह में हुआ. टाटा, पारसी धर्म से आते थे. जहां पारसी समुदाय के लोगों का अंतिम संस्कार किया जाता है उस जगह को टावर ऑफ साइलेंस या दखमा कहा जाता है. पारसी रीति रिवाजों के तहत, टावर ऑफ साइलेंस में शव को आसमान के नीचे ऐसी जगह पर रखा जाता है जहां बहुत सारे गिद्ध हों और वो शरीर का मांस खा लें. लेकिन गिद्धों की संख्या में आई कमी की वजह से अब पारसी समुदाय के लोगों ने अपने अंतिम संस्कार के तरीके में बदलाव किया है. एबीपी न्यूज की खबर के अनुसार, इसी वजह से टाटा का अंतिम संस्कार इस प्रक्रिया से नहीं किया गया.
 

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