सोशल मीडिया पर नशे में धुत दो पुलिसकर्मियों का एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है. वीडियो में एक पुलिसकर्मी को पुलिस की जीप पर बैठकर शराब का पैग बनाते हुए देखा जा सकता है, वहीं एक दूसरा जवान जीप से सटकर खड़ा हुआ है और नशे में अपना हाथ लहराते हुए कुछ बोल रहा है. दावा किया जा रहा है कि ये उत्तर प्रदेश का वीडियो है जहां पुलिस खुलेआम शराब पी रही है. दावे में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर भी निशाना साधते हुए कहा गया है कि योगी सरकार में यूपी की जनता गुंडों से नहीं बल्कि खाकी वर्दी वालों से ज्यादा डर रही है.
इंडिया टुडे एंटी फेक न्यूज़ वॉर रूम (AFWA) ने पाया कि वीडियो के साथ किया जा रहा दावा भ्रामक है. ये वीडियो उत्तर प्रदेश का ही है लेकिन योगी आदित्यनाथ के कार्यकाल से ठीक पहले का है.
इस वीडियो को ट्विटर और फेसबुक पर पोस्ट करते हुए यूजर्स कैप्शन में लिख रहे हैं, "योगी सरकार मैं यूपी की जनता गुंडों से नहीं खाकी वर्दी वालों से ज्यादा डर रही है 100 नंबर पुलिस को देखो शराब दिनदहाड़े खुलेआम पी रहे हैं ये है इन पुलिस वालों की ड्यूटी उत्तर प्रदेश जंगलराज जय हिंद भारत माता की जय.....".
2019 में भी यह वीडियो इसी दावे के साथ शेयर किया गया था.
कैसे की पड़ताल?
वीडियो को कीवर्ड की मदद से खोजने पर हमें इससे जुड़ी कुछ खबरें मिलीं. "न्यूज नेशन" की खबर के अनुसार, ये वीडियो यूपी के शामली का है जहां टिटौली चौकी के पास पुलिस के सिपाही खुलेआम ‘डायल 100’ गाड़ी के बौनट पर शराब रखकर पी रहे थे. "न्यूज नेशन" ने ये वीडियो 14 मार्च 2017 को अपलोड किया था.
इसके अलावा, "पंजाब केसरी" का भी इस मामले को लेकर यूट्यूब पर एक वीडियो देखा जा सकता है जिसे 15 मार्च 2017 को शेयर किया गया था. "पंजाब केसरी" के इस वीडियो में बताया जा रहा है कि पुलिसकर्मियों का वीडियो वायरल हो जाने के बाद उन्हें निलंबित कर दिया गया था. उस समय वीडियो पर कुछ और खबरें भी प्रकाशित हुई थीं.
यहां गौर करने वाली बात ये है कि यूपी विधानसभा चुनाव 2017 के नतीजे 11 मार्च को घोषित हुए थे और योगी आदित्यनाथ ने मुख्यमंत्री पद की शपथ 19 मार्च को ली थी. यानि कि वीडियो योगी के मुख्यमंत्री बनने के पहले का है और इसे योगी कार्यकाल की घटना नहीं कहा जा सकता.
यहां हमारी पड़ताल में साफ हो जाता है कि जिस वीडियो के जरिये योगी सरकार पर निशाना साधा जा रहा है वो उनके सीएम बनने के पहले का है. हालांकि, योगी कार्यकाल में भी इस तरह के कुछ मामले खबरों में आ चुके हैं.