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फैक्ट चेक: जानिए बंगाल हिंसा के नाम पर वायरल तस्वीराें की सच्चाई

सोशल मीडिया पर एक पोस्ट वायरल हो रही है. जिसमें कुछ लोगों की दो तस्वीरें शेयर की गई हैं. दावा किया जा रहा है कि ये तस्वीरें बंगाल की हैं जहां बीजेपी कार्यकर्ता तोड़फोड़ और पथराव कर रहे हैं. इंडिया टुडे के एंटी फेक न्यूज वॉर रूम (AFWA) ने की इन वायरल हो रही तस्वीरों की पड़ताल.

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आजतक फैक्ट चेक

दावा
बंगाल में बीजेपी कार्यकर्ताओं की हिंसा करते हुए तस्वीरें.
फेसबुक पेज Pol Khol/पोल खोल
सच्चाई
वायरल तस्वीरें साल 2010 और 2012 की हैं और दोनों ही तस्वीरें बंगाल की नहीं हैं.

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लोकसभा चुनाव में पहले दौर से ही लगातार बंगाल से हिंसा की खबरें सामने आ रही हैं. हाल ही कोलकाता में बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह के रोड शो में भी जमकर बवाल हुआ. सोशल मीडिया पर इससे जुड़ा एक पोस्ट वायरल हो रहा है. इस फेसबुक पोस्ट में कुछ लोगों की दो तस्वीरें शेयर की गई हैं. दावा किया जा रहा है कि ये तस्वीरें बंगाल की हैं जहां बीजेपी कार्यकर्ता तोड़फोड़ और पथराव कर रहे हैं.

इंडिया टुडे के एंटी फेक न्यूज वॉर रूम (AFWA) ने पाया कि वायरल हो रही तस्वीरें न केवल कई साल पुरानी हैं, बल्कि इनका बंगाल से कोई लेना-देना नहीं है.

पोस्ट का आर्काइव्ड वर्जन यहां देखा जा सकता है.

फेसबुक पेज 'Pol Khol/ पोल खोल'   ने ये तस्वीरें पोस्ट करते हुए लिखा:

"ये हैं भाजपा के सीधे-साधे, भोले-भाले कार्यकर्ता जो एक स्वच्छ छवि वाले नेता 'अमित शाह' के इशारे पर शान्तिपूर्ण तरीके से बंगाल में रोड शो कर रहे हैं!"

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खबर लिखे जाने तक ये पोस्ट करीब 1400 बार शेयर की जा चुकी थी.

फेसबुक यूजर 'Shriram Bishnoi'  और 'DrKamlesh Indoriya'   ने भी ये तस्वीरें इसी दावे के साथ साझा की हैं.

AFWA ने पड़ताल में पाया:

इस तस्वीर में जहां एक व्यक्ति डंडे से ट्रक के सामने का शीशा तोड़ता नजर आ रहा है, वहीं दूसरा व्यक्ति हाथ में बीजेपी का झंडा लेकर खड़ा है. रिवर्स सर्च करने पर पता चला कि ये तस्वीर साल 2012 में झारखंड के जमशेदपुर में खींची गई थी. उस समय पेट्रोल की कीमतें बढ़ने के विरोध में तत्कालीन यूपीए सरकार के खिलाफ भारत बंद के दौरान ये प्रदर्शन किया गया था.

हिंदुस्तान टाइम्स की वेबसाइट पर 31 मई 2012 को प्रकाशित हुई फोटो स्टोरी में ये तस्वीर भी शामिल है. इसके कैप्शन में लिखा गया है कि भारत बंद के दौरान बीजेपी कार्यकर्ताओं ने गाड़ी में तोड़फोड़ की.

इस तस्वीर में हिंसक भीड़ दिखाई दे रही है और जमीन पर कई पत्थर भी नजर आ रहे हैं. तस्वीर में बायीं तरफ दिख रहे एक पोस्टर पर 'सेतु गोमती तट' और दायीं तरफ 'विशाल प्रदर्श' लिखा हुआ है और इस पोस्टर पर यूपी के उपमुख्यमंत्री दिनेश शर्मा की तस्वीर भी लगी हुई थी. ये पोस्टर लखनऊ में लगाए गए थे.  तस्वीर में एक व्यक्ति के हाथ में पोस्टर नजर आ रहा है जिस पर लिखा हुआ है "महंगाई पर रोक लगाओ वर्ना गद्दी छोड़ दो". तस्वीर में सफेद कुर्ते-पजामे में नजर आ रहा व्यक्ति दरअसल बीजेपी युवा मोर्चा का नेता अभिजात मिश्र है.

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'आजतक' ने अभिजात से संपर्क किया तो उन्होंने बताया कि ये तस्वीर वर्ष 2010 की है जब लखनऊ में बीजेपी कार्यकर्ताओं ने महंगाई के विरोध में केंद्र सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया गया था. उस समय केंद्र में यूपीए की सरकार थी. इस प्रदर्शन के दौरान राजनाथ सिंह को चोट भी आई थी. प्रदर्शनकारियों पर पुलिस ने आंसू गैस के गोले भी छोड़े थे."

'द हिंदू' में हमें 25 फरवरी 2010 को प्रकाशित हुआ इस प्रदर्शन का एक न्यूज आर्टिकल भी मिला. इस खबर में भी राजनाथ सिंह को हल्की चोट लगने और पुलिस के प्रदर्शनकारियों पर आंसू गैस छोड़ने का जिक्र किया गया है.

पड़ताल में साफ हुआ कि वायरल हो रही दोनों ही तस्वीरें बंगाल से नहीं हैं. ये तस्वीरें कई साल पुरानी हैं और चुनाव के वक्त जानबूझकर फैलाई जा रही हैं.

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