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फैक्ट चेक: पुलिस का मनचलों को एंबुलेंस में बंद करने के वीडियो का ये है सच

सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है. इस वीडियो के साथ दावा किया जा रहा है कि तमिलनाडु में पुलिस ने बेवजह सड़कों पर घूम रहे मनचलों को काबू करने के लिए यह तरीका अपनाया है.

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आजतक फैक्ट चेक

दावा
तमिलनाडु पुलिस लॉकडाउन में बेवजह घूमने वाले मनचलों को कंट्रोल करने के लिए उन्हें नकली कोरोना मरीज के साथ एंबुलेंस में बंद कर रही है.
सोशल मीडिया यूजर्स
सच्चाई
तमिलनाडु पुलिस ने यह वीडियो जागरूकता फैलाने के लिए बनाया है. वीडियो में सब लोग एक्टिंग कर रहे हैं, यह असल घटना नहीं है.

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सोशल मीडिया पर एक मजेदार वीडियो वायरल हो रहा है. वीडियो में लॉकडाउन के दौरान बाइक पर घूम रहे कुछ युवकों को पुलिस चेकपोस्ट पर रोकती है. युवकों ने मास्क भी नहीं पहने हैं, ऐसे में पुलिसकर्मी उन्हें एक एंबुलेंस में बंद कर देते हैं जिसमें पहले से ही एक मरीज लेटा दिखता है. इसके बाद युवक एंबुलेंस से बाहर निकले की कोशिश करते हैं, लेकिन पुलिसकर्मी उन्हें अंदर धकेलते हैं.

इस वीडियो के साथ दावा किया जा रहा है कि तमिलनाडु में पुलिस ने बेवजह सड़कों पर घूम रहे मनचलों को काबू करने के लिए यह तरीका अपनाया है. पुलिस ऐसे लोगों को नकली कोरोना पेशेंट के साथ एंबुलेंस में बंद कर रही है.

वायरल हो रहा यह वीडियो असल में तमिलनाडु के तिरुपुर जिले का है. यहां पुलिस ने जागरूकता फैलाने के लिए यह वीडियो शूट किया है, ताकि लोगों को स्थिति की गंभीरता को समझाया जा सके.

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पोस्ट का आर्काइव्ड वर्जन यहां देखा जा सकता है.

वीडियो के अंत में भी पुलिसकर्मी तमिल भाषा में यह बताती हैं कि इस वीडियो के जरिये यह बताने की कोशिश की जा रही है कि आप घरों में रहें और सुरक्षित रहें. वीडियो के अंत में पुलिसकर्मियों के साथ तीनों युवक भी मास्क पहने खड़े नजर आते हैं.

वीडियो के पीछे की कहानी जानने के लिए आजतक ने तिरुपुर जिले की एसपी आईपीएस दिशा मिश्रा से बात की. उन्होंने बताया कि यह वीडियो दो-तीन दिन पहले ही शूट किया गया था. वीडियो शूट करने के पीछे मकसद लोगों को यह समझाना था कि जब तक वायरस का खतरा किसी को नजर नहीं आ रहा, तब तक लोग इसे हलके में लेते हैं, लेकिन जैसे ही उन्हें यह खतरा दिखता है वे अपनी जान बचाने के लिए इधर-उधर भागते हैं.

वीडियो में भी एक्टिंग कर रहे युवक बिना मास्क पहने बेखौफ घूमते नजर आते हैं, लेकिन जैसे ही उन्हें एंबुलेंस में बंद किया जाता है जिसमें पहले से ही नकली कोरोना पेशेंट लेटा होता है, वे अपनी जान बचाने के लिए भागने का प्रयास करते हैं.

मिश्रा ने आजतक को वीडियो का एक और वर्जन भेजा, जिसकी शुरुआत में डिसक्लेमर दिया गया है. इस डिसक्लेमर में साफ लिखा है कि यह वीडियो सभी एतियाती उपाय बरतने के बाद शूट किया गया है और इसका मकसद केवल लोगों को जागरूक करना है. वायरल वीडियो से यह डिसक्लेमर हटा दिया गया है.

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डिसक्लेमर के साथ पूरा वीडियो यहां देखा जा सकता है.

पड़ताल में साफ हुआ कि वायरल वीडियो कोई सच्ची घटना नहीं है, बल्कि यह जागरूकता फैलाने के लिए तमिलनाडु पुलिस की ओर से शूट किया गया एक वीडियो है जिसमें दिख रहे लोग एक्टिंग कर रहे हैं.

क्या आपको लगता है कोई मैसैज झूठा ?
सच जानने के लिए उसे हमारे नंबर 73 7000 7000 पर भेजें.
आप हमें factcheck@intoday.com पर ईमेल भी कर सकते हैं
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