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सोशल मीडिया पर काली मां की एक जली हुई मूर्ति की कई तस्वीरें वायरल हो रही हैं. इन तस्वीरों के साथ दावा किया जा रहा है कि पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले में इस कृत्य के पीछे मुस्लिम समुदाय के असामाजिक तत्वों का हाथ है.
बीजेपी सांसद अर्जुन सिंह ने ये तस्वीरें ट्वीट करते हुए लिखा है, “दीदी की जिहादी राजनीति अब हिंदू धर्म और संस्कृति को नष्ट करने पर तुली है. देखिए कैसे एक धार्मिक समूह ने पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद इलाके में एक मंदिर पर हमला करके उसे नष्ट किया और मां काली की मूर्ति को जला दिया. शर्मनाक.”
इंडिया टुडे से बात करते हुए मंदिर के अधिकारियों ने इस घटना के सांप्रदायिक होने से इनकार किया. उन्होंने कहा कि वे अभी तक इस बारे में निश्चित नहीं हैं कि आग कैसे लगी. कई सोशल मीडिया यूजर्स ने सीधा आरोप लगाया है. सांसद अर्जुन सिंह के ट्वीट का आर्काइव्ड वर्जन यहां देखा जा सकता है.
AFWA की पड़ताल
इंडिया टुडे से बात करते हुए मंदिर समिति के सचिव सुखदेव बाजपेयी ने कहा, “मंदिर से कुछ भी चोरी नहीं हुआ है जैसा कि कुछ लोग दावा कर रहे हैं. ज्यादातर संभावना है कि देवी काली की मूर्ति में दुर्घटनावश आग लग गई. हमने कोई एफआईआर दर्ज नहीं कराई है क्योंकि हम झूठा शक नहीं करना चाहते.”
इसके पहले मुर्शिदाबाद पुलिस ने अर्जुन सिंह के ट्वीट का जवाब देते हुए मुर्शिदाबाद के आलमपुर गांव में स्थित इस मंदिर समिति की ओर से जारी एक बयान शेयर किया.
इस बयान में कहा गया है, “31 अगस्त की रात में काली मां की मूर्ति में आग लग गई. इस इलाके में हिंदू और मुसलमानों के बीच सौहार्दपूर्ण संबंध हैं. हमें नहीं लगता कि ये घटना मजहबी नफरत का नतीजा हो सकती है. न तो मंदिर में कोई तोड़फोड़ हुई है, न कोई चीज चोरी हुई है. लेकिन कुछ लोग इस घटना को सांप्रदायिक रंग दे रहे हैं. हम आप सभी से अपील करते हैं कि शांति भंग न करें. प्रशासन हमारी मदद कर रहा है.”
इस बयान को शेयर करते हुए मुर्शिदाबाद पुलिस ने ट्वीट किया, “जैसा कि मंदिर समिति का कहना है, ये आग एक दुर्घटना थी. मंदिर के अधिकारी जरूरी कार्रवाई कर रहे हैं. स्थानीय पुलिस और प्रशासन सहयोग कर रहा है.” पश्चिम बंगाल पुलिस ने अर्जुन सिंह के ट्वीट का स्क्रीनशॉट भी पोस्ट किया और लिखा, “कानूनी कार्रवाई की जा रही है. कृपया भ्रामक, भड़काऊ और शरारती पोस्ट न फैलाएं.”
— West Bengal Police (@WBPolice) September 2, 2020
मंदिर समिति के अधिकारी और पुलिस दोनों ही इस घटना के सांप्रदायिक होने से इनकार कर रहे हैं. ऐसे में ये निष्कर्ष निकाला जा सकता है कि सोशल मीडिया पर मुसलमानों द्वारा काली की मूर्ति में आग लगाने का जो दावा किया जा रहा है, वह सही नहीं है.