सोशल मीडिया पर एक कथित न्यूज रिपोर्ट का वीडियो वायरल हो रहा है. इसे शेयर करते हुए कुछ लोग कह रहे हैं कि सेना में भर्ती के लिए बनाई गई नई अग्निपथ योजना अब वापस ले ली गई है. कहा जा रहा है कि इस फैसले को राज्यपाल की मंजूरी भी मिल गई है.
इस वीडियो के थंबनेल में ‘न्यूज24’ के एंकर संदीप चौधरी की तस्वीर लगी है. इसके साथ ही लिखा है, 'अभी-अभी सरकार का बहुत बड़ा फैसला. ब्रेकिंग न्यूज. रद्द हुई अग्निपथ योजना. राज्यपाल की लगी मुहर. भाजपा में मचा हड़कंप.'
इस वीडियो के वॉयस ओवर में बताया जाता है कि अग्निपथ योजना को लेकर मेघालय के पूर्व राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने अपनी नाराजगी जताते हुए इसे देश के लिए खतरनाक बताया है और इसे वापस लेने की मांग की है.
इंडिया टुडे फैक्ट चेक ने पाया कि सरकार ने अग्निपथ योजना को बंद नहीं किया है और इसके तहत सेना के तीनों अंगों में भर्ती की प्रक्रिया जारी है.
कैसे पता लगाई सच्चाई?
भारत सरकार ने सेना में गैर कमीशंड रैंक्स में भर्ती के लिए पुराने नियमों को बदलकर साल 2022 में अग्निपथ योजना को लागू किया था. इसमें बदलाव लाने या इसे रद्द करने का अधिकार भी भारत सरकार के पास ही है. इसके लिए किसी भी राज्य के राज्यपाल की इजाजत की दरकार नहीं होती. हमने सेना के प्रवक्ता से जब इस बाबत जानकारी ली तो उन्होंने बताया कि सरकार ने ऐसा कोई फैसला नहीं लिया है और इस योजना के तहत भर्ती की प्रक्रिया जारी है.
इंडियन आर्मी की वेबसाइट और रक्षा मंत्रालय की वेबसाइट पर भी इस योजना को वापस लिए जाने से संबंधित कोई जानकारी नहीं है.
हमें कीवर्ड सर्च के जरिए मेघालय के पूर्व राज्यपाल सत्यपाल मलिक का अग्निपथ योजना से संबंधित एक बयान मिला जो उन्होंने 17 नवंबर, 2022 को दिया था. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक उन्होंने जयपुर में इस योजना के बारे में बात करते हुए कहा था, 'केंद्र की मोदी सरकार को नहीं पता है कि वे देश को कितना नुकसान पहुंचा रहे हैं. अग्निपथ एक बहुत ही खतरनाक योजना है. केंद्र को इसे तुरंत वापस लेना चाहिए और पेंशन जैसी सुविधाओं के साथ पूर्णकालिक नौकरी योजना वापस लानी चाहिए.'
इससे पहले भी इस योजना को वापस लेने की अफवाह फैली थी जिसका फैक्ट चेक आजतक ने किया था. इसे यहां पढ़ा जा सकता है.
क्या है अग्निपथ योजना?
भारत सरकार ने साल 2022 में सेना के तीनों अंगों में भर्ती के नियमों को बदलते हुए अग्निपथ योजना लागू की थी. इसके तहत सेना, एयरफोर्स और नेवी की गैरकमीशंड रैंक्स में संविदा पर भर्ती करने का प्रावधान है. इस योजना के तहत भर्ती होने वालों को अग्निवीर कहा जाएगा. ये भर्ती महज चार साल के लिए होगी. चार साल बाद बस 25 फीसदी अग्निवीर ही सेना में नियमित नौकरी पा सकेंगे. इस योजना के लागू होने के बाद देश के कई हिस्सों में इसका विरोध भी हुआ था.