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आंखों को ड्राई कर रहा प्रदूषण, एम्स के व‍िशेषज्ञ ने बताया 20:20:20 फार्मूला, जान‍िए ये क्या है? 

क्या आपने हाल ही में आंखों में दर्द, आंखों से पानी आना, आंखों में खुजली, आंखों में किसी बाहरी चीज़ का अहसास जैसे लक्षण देखे हैं? यह सब हमारे आस-पास के वातावरण में बढ़ते वायु प्रदूषण के कारण हो सकता है. आइए जानते हैं कि इनके क्या कारण हैं और इन लक्षणों को नियंत्रित करने तथा जीवन की अच्छी गुणवत्ता बनाए रखने के लिए क्या किया जाना चाहिए?

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27 cities including Delhi, which are struggling for clean air in november 2024
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द‍िल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण आज आम जिंदगी की एक कड़वी सच्चाई बन चुका है. हमारे लिए इससे प्रभावित न होना मुश्कि‍ल है. धूल जैसे कण, वाहनों और कारखानों से निकलने वाली जहरीली गैसें जैसे NO2, SO2, हाइड्रोकार्बन, न केवल फेफड़ों को प्रभावित करते हैं, बल्कि आंखों को भी प्रभावित करते हैं. प्रदूषकों में मौजूद पीएम 2.5 प्रदूषक आंखों को बुरी तरह बीमार कर रहा है. इनमें आंखों का सूखना और इनफेक्शन सबसे कॉमन समस्या के तौर पर दिख रहा है. 

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एम्स के वर‍िष्ठ नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ बृजेश लहरी कहते हैं कि वायु प्रदूषण के कारण आंखें प्रभावित होती हैं क्योंकि वे लगातार आसपास की हवा के संपर्क में रहती हैं. क्या आपने हाल ही में आंखों में दर्द, आंखों से पानी आना, आंखों में खुजली, आंखों में किसी बाहरी चीज़ का अहसास जैसे लक्षण देखे हैं? यह सब हमारे आस-पास के वातावरण में बढ़ते वायु प्रदूषण के कारण हो सकता है. आइए जानते हैं कि इनके क्या कारण हैं और इन लक्षणों को नियंत्रित करने तथा जीवन की अच्छी गुणवत्ता बनाए रखने के लिए क्या किया जाना चाहिए?

अपनाएं ये ट‍िप्स, आंखों को मिलेगा आराम

हाइड्रेटेड रहें: वायु प्रदूषण आंखों में मौजूद टियर यानी आंसू फिल्म के उत्पादन में कमी के कारण सूखी आंखों और एलर्जिक कंजंक्टिवाइटिस के लक्षणों को बढ़ा सकता है और नियमित रूप से पर्याप्त पानी पीने से आपको आंसुओं के उत्पादन में सुधार करने में मदद मिलेगी और इस प्रकार लक्षणों में कमी आ सकती है. 

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प्रदूषकों के संपर्क में आने से बचें: अगर AQI बहुत खराब है, तो बाहर जाने से बचना पर्यावरण प्रदूषकों द्वारा आपकी आंखों को जलन से बचाने का सबसे अच्छा तरीका होगा. लेकिन अगर यह संभव नहीं है तो वायु प्रदूषकों के संपर्क में आने से बचने के लिए सुरक्षात्मक धूप का चश्मा पहनें. 

चेहरे और आंखों को छूने से बचें: अपने हाथों को साफ किए बिना आंखों और चेहरे को छूने से संक्रामक एजेंट आपकी आंखों और पलकों तक पहुंच सकते हैं, जिससे संक्रमण हो सकता है और इससे आंखों में जलन के लक्षण और बढ़ सकते हैं. 

मस्कारा और काजल जैसे आई मेकअप के इस्तेमाल से बचें: मस्कारा और आई मेकअप के इस्तेमाल से आंखों की एलर्जी बढ़ सकती है और कभी-कभी पलकों में संक्रमण भी हो सकता है. 

स्क्रीन का लंबे समय तक इस्तेमाल करने से बचें: ज्यादातर आजकल लोग मोबाइल या लैपटॉप के सामने समय बिताते हैं और उन्हें पलक झपकाने की भी याद नहीं रहती. इससे ड्राई आई डिजीज के लक्षण और भी बढ़ जाते हैं. लंबे समय तक स्क्रीन का इस्तेमाल करने से पलकें कम झपकती हैं, जिससे ड्राई आई की समस्या बढ़ जाती है. 

क्या है 20-20-20 नियम, जिससे बच सकती हैं आंखें 
डॉ बृजेश लहरी बताते हैं कि जब हम स्क्रीन या किताब पढ़ते समय किसी नज़दीकी लक्ष्य को लंबे समय तक देखते हैं, तो हमारी आंखों पर तनाव आ सकता है. इस तनाव को दूर करने के लिए, 20-20-20 नियम का पालन करें यानी हर 20 मिनट में 20 सेकंड के लिए 20 फ़ीट दूर किसी लक्ष्य को देखें. इससे आपकी आंखों को आराम मिलेगा और आंखों में तनाव के लक्षण जैसे आंखों का भारीपन और किसी बाहरी चीज़ का एहसास कम हो सकता है. सबसे महत्वपूर्ण बात, यदि उपरोक्त सुझावों से लक्षण ठीक नहीं होते हैं तो अपने आस-पास के किसी भी नेत्र रोग विशेषज्ञ से संपर्क करें और अपनी आंखों की पूरी जांच करवाएं. याद रखें, जल्दी इलाज ही सबसे अच्छा व‍िकल्प है. 

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प्रदूषण से हुईं 6.7 मिल‍ियन मौतें  
वायु प्रदूषण आज एक ग्लोबल हेल्थ प्रॉब्लम बन चुकी है. विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार निम्न और मध्यम आय वाले देशों के 90% से अधिक शहरों में वायु प्रदूषण का लेवल हाइएस्ट लिमिट को पार कर चुका है. साल 2019 में वायु प्रदूषण के कारण वैश्विक स्तर पर 6.7 मिलियन मौतें हुईं, जिनमें से 4.1 मिलियन मौतें परिवेशी कण (particulate matter यान‍ि PM) वायु प्रदूषण से संबंधित थीं.

कैसे प्रदूषण आंखों को कर रहा बीमार
सभी वायु प्रदूषकों में पार्टिकुलेट मैटर (पीएम) इंसान की आंखों को भी बहुत तेजी से प्रभाव‍ित कर रहे हैं. MDPI में पब्ल‍िश एक लेटेस्ट स्टडी के मुताबिक पीएम तत्व आंखों की सतह के सीधे संपर्क या सांस के जरिए अप्रत्यक्ष संपर्क में आकर आंख के सभी हिस्सों में प्रवेश करता है, जिससे आंखों में कई तरह की समस्याएं हो रही हैं. स्टडी में बताया गया कि कैसे हमारी कॉर्निया, कंजंक्टिवा, कॉर्नियो स्क्लेरल लिम्बस और टियर फिल्म से बनी ऑक्यूलर सतह बाहरी वातावरण के संपर्क में रहती है. 

प्रदूषण से आंखों में आते हैं लक्षण 
ये हमें तमाम तरह के संक्रमण से बचाने में मदद करती है. लेकिन पीएम तत्व इनमें पहुंचकर संक्रमण और जलन पैदा कर सकते हैं. इसी कारण कॉर्निया और कंजंक्टिवल डिसफंक्शन हो सकता है, जिसमें दर्द, खुजली, आंखों में कुछ पड़ गया है जैसी अनुभूत‍ि, दृष्टि में कमी या अंधापन जैसे लक्षण दिखाई देते हैं. तमाम स्टडीज इस बात की पुष्टि कर चुकी हैं कि ऑक्यूलर सरफेस के रोग अब बढ़ रहे हैं. इनके खास लक्षणों में आंखों में सूखापन, चुभन, लालिमा और खुजली जैसे ड्राई आई सिंड्रोम के लक्षण बढ़ने लगे हैं. महीन धूल के संपर्क में आने वाले लोगों में एलर्जिक केराटोकोनजंक्टिवाइटिस के मामले बढ़े हैं.

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