अर्थराइटिस सिर्फ जोड़ों की बीमारी नहीं है, यह शरीर के इम्यून सिस्टम से जुड़ी एक इन्फ्लेमेटरी कंडीशन है. ये आंखों पर भी असर डाल सकती है. आंखों में इसके लक्षण पाए जाने पर इसे ऑक्यूलर इंफ्लेमेशन (Ocular Inflammation) कहा जाता है. इसे तीन टाइप में बांटा गया है.
ऑक्यूलर इंफ्लेमेशन का सबसे पहला टाइप यूवाइटिस (Uveitis) कहलाता है जो आंख में सूजन के तौर पर नजर आता है. आंखों में हल्का दर्द, जलन या धुंधला दिखना भी इसके खास लक्षण होते हैं. एम्स दिल्ली के नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ बृजेश लहरी कहते हैं कि आमतौर पर लोग इसे ज्यादा गंभीरता से नहीं लेते. वो सोचते हैं कि बस थोड़ी थकान होगी या स्क्रीन टाइम ज्यादा हो गया होगा. लेकिन अगर ये लक्षण लंबे समय तक बने रहें, तो सावधान हो जाइए. ये यूवाइटिस हो सकता है, जो धीरे-धीरे आपकी आंखों की रोशनी पर भी असर डाल सकता है. यह रहेयूमेटाइड अर्थराइटिस (RA), ल्यूपस, सोरायसिस और एंकायलोज़िंग स्पॉन्डिलाइटिस से जुड़ा हो सकता है.
इसका दूसरा टाइप स्क्लेराइटिस (Scleritis) है जिसमें आंख के सफेद हिस्से (sclera) में सूजन, लाल आंखें और सिरदर्द जैसे लक्षण होते हैं. इसका तीसरा टाइप स्जोग्रेन सिंड्रोम (Sjogren’s Syndrome) कहलाता है. यह असल में एक ऑटोइम्यून डिजीज़ है, जो शरीर के लुब्रिकेशन सिस्टम (आंखों, मुंह और जोड़ों) पर असर डालता है.
यूवाइटिस को समझें, क्या है ये बीमारी
यूवाइटिस असल में आंखों में होने वाली एक सूजन (Inflammation है जो यूवेअ (Uvea) यानी आंख का वो हिस्सा आईरिस (Iris), सिलिअरी बॉडी (Ciliary Body) और कोरॉयड (Choroid) को मिलाकर बनता है, उसे प्रभावित करता है. अगर इनमें से किसी भी हिस्से में सूजन आ जाए तो इसे यूवाइटिस कहा जाता है. ये बीमारी हल्के-फुल्के इंफेक्शन से लेकर ऑटोइम्यून डिसऑर्डर तक किसी भी वजह से हो सकती है. इसका समय पर इलाज बहुत जरूरी है.
ऐसे पहचानें यूवाइटिस के लक्षण
आंखों का लाल होना और दर्द होना
तेज रोशनी में आंखों में चुभन महसूस होना
धुंधला या धूमिल दिखना
आंखों में भारीपन और सिरदर्द महसूस होना
आंखों के अंदर धब्बे या फ्लोटर्स दिखना
कभी-कभी आंख से पानी आना या सूजन बढ़ना
यूवाइटिस होने की कुछ वजहें
इंफेक्शन: टॉक्सोप्लाज्मोसिस (Toxoplasmosis), हर्पीज (Herpes), ट्यूबरकुलोसिस (TB) या सिफलिस (Syphilis) जैसी बीमारियों से भी यूवाइटिस हो सकता है.
ऑटोइम्यून डिसऑर्डर: कई बार शरीर की इम्यून सिस्टम खुद की ही कोशिकाओं पर हमला करने लगती है, जिससे यूवाइटिस हो सकता है. रूमेटॉइड अर्थराइटिस (Rheumatoid Arthritis), ल्यूपस (Lupus), क्रोहन डिजीज (Crohn’s Disease) जैसी बीमारियों में यह ज्यादा देखा जाता है.
आंख में चोट या सर्जरी: किसी दुर्घटना में आंख पर चोट लगने या किसी ऑपरेशन के बाद भी यूवाइटिस हो सकता है.
अन्य बीमारियां: HIV/AIDS, डायबिटीज, बीहसेट डिजीज (Behcet’s Disease) जैसी गंभीर बीमारियों में भी यह देखने को मिलता है.
क्या कहते हैं डॉक्टर
सर गंगाराम अस्पताल, दिल्ली के वरिष्ठ गैस्ट्रोइंट्रोलॉजिस्ट डॉ. पियूष रंजन कहते हैं कि यूवाइटिस एक ऑटोइम्यून कंडीशन भी हो सकता है, जिसमें शरीर की इम्यूनिटी आंखों पर हमला कर देती है. वहीं, नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. बृजेश लहरी बताते हैं कि अगर किसी व्यक्ति को बार-बार आंखों में सूजन हो रही है या रोशनी कम होने लगी है, तो इसे सिर्फ चश्मे का नंबर बढ़ने की समस्या समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए.
डॉ लहरी कहते हैं कि Uveitis का इलाज स्टेरॉइड्स होते हैं, पर इनका बिना डॉक्टर की सलाह के और लंबे समय तक इस्तेमाल आंखों को ग्लूकोमा के कारण गंभीर नुकसान पहुंचा सकता है. स्टीरॉयड के कारण होने वाले ग्लूकोमा (काला मोतिया) से आंखों की रोशनी हमेशा के लिए कम हो सकती है.
कैसे होता है इसका इलाज
स्टेरॉइड्स और एंटी-इंफ्लेमेटरी ड्रग्स
यूवाइटिस के इलाज में डॉक्टर अक्सर स्टेरॉइड आई ड्रॉप्स या एंटी-इंफ्लेमेटरी दवाएं देते हैं, जिससे सूजन कम हो सके.
इम्यूनो-सप्रेसिव थेरेपी
अगर यूवाइटिस ऑटोइम्यून बीमारी की वजह से हुआ है, तो इम्यून सिस्टम को कंट्रोल करने के लिए इम्यूनोसप्रेसिव दवाएं दी जाती हैं.
इंफेक्शन का इलाज
अगर किसी बैक्टीरिया, वायरस या टीबी जैसी बीमारी की वजह से यूवाइटिस हुआ है तो पहले उस बीमारी का इलाज किया जाता है.