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दुनिया की चिंता बढ़ा रहे कोरोना के दो नए खतरनाक वैरिएंट, भारत में भी अक्टूबर-नवंबर में आएगी नई लहर?

ओमिक्रॉन का BA.5 सब-वेरियंट दुनिया भर में फैल चुका है जो 76.2 प्रतिशत मामलों के लिए जिम्मेदार है. वहीं, भारत में XBB वैरिएंट जोर पकड़ रहा है जिसकी वजह से आने वाले तीन से चार सप्ताह में देश में कोरोना के मामले तेजी से बढ़ सकते हैं. हालांकि डॉक्टरों का कहना है कि ये नए वैरिएंट्स कोरोना के मामलों में वृद्धि करेंगे लेकिन इनकी लोगों के लिए खतरनाक साबित होने की संभावना बेहद कम है.

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देश में कोरोना के नए वैरिएंट से बढ़ेंगे कोरोना केस
देश में कोरोना के नए वैरिएंट से बढ़ेंगे कोरोना केस

देश में एक बार फिर कोरोना ने पैर पसारने शुरू कर दिए हैं और पिछले 24 घंटों में कोरोना के 2,060 नए मामले दर्ज किए गए हैं. हालांकि, कोरोना के केस अब तक के सबसे निचले स्तर पर हैं लेकिन पूरी दुनिया में लोगों को तेजी से अपनी चपेट में ले रहे ओमिक्रॉन के सब-वेरिएंट BF.7 और XBB ने भारत में भी खतरे की घंटी बजा दी है. कोरोना का ये नया वैरिएंट ओमिक्रॉन का सब-वैरिएंट है. इसका नाम BF.7 है और ये काफी तेजी से फैलता है 

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भारत में पहले से मौजूद BA.4 और BA.5 सब-वेरिएंट उतने खतरनाक साबित नहीं हुए लेकिन BA.2.75 देश में फैले अधिकांश संक्रमणों की वजह है.

अमेरिका में बीक्यू.1, बीक्यू.1.1, और बीएफ.7 पर नजर रखी जा रही है क्योंकि ये संक्रमण फैलने के लिए जिम्मेदार हो सकते हैं. सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल-यूएसए के आंकड़ों के अनुसार, बीक्यू.1 और बीक्यू.1.1 दोनों ही कोरोना के कुल मामलों के 5.7-5.7 प्रतिशत केसों के लिए जिम्मेदार हैं. जबकि बीएफ.7 वैरिएंट 5.3 प्रतिशत केस के लिए जिम्मेदार है.

ब्रिटेन में BQ.X वैरिएंट और BF.7 पर नजर रखी जा रही है क्योंकि ये दोनों वैरिएंट BA.5 की जगह फैलकर तबाही मचा सकते हैं. यूके की स्वास्थ्य सुरक्षा एजेंसी के अनुसार, BF.7 वैरिएंट की वजह से देश में कोरोना के 7.26 प्रतिशत केस सामने आए हैं और आशंका है कि BA.5 की तुलना में ये ज्यादा तेजी से फैल सकता है.

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वहीं, XBB वैरिएंट जो दो ओमिक्रॉन सब-लीनेज BJ.1 और BA.2.75 का संयोजन है, सिंगापुर में तेजी से संक्रमण फैला रहा है. ये वैरिएंट वहां लोकल लेवल पर फैल रहे 54 प्रतिशत मामलों के लिए जिम्मेदार है.

भारत में भी फैल रहा XBB वैरिएंट
भारत के लिए खतरे वाली बात ये है कि काफी संक्रामक XBB वैरिएंट भारत में भी तेजी से फैल रहा है. 

देश के Sars-CoV-2 संघ से जुड़े एक वैज्ञानिक ने बताया, ''BA.2.75 भारत में पिछले सप्ताह तक लगभग 98 प्रतिशत मामलों के लिए जिम्मेदार था लेकिन अब XBB ने अपने पैर पसारने शुरू कर दिए हैं और ये महाराष्ट्र समेत कुछ राज्यों में 20 से 30 प्रतिशत संक्रमण फैला चुका है. हालांकि देश के अन्य हिस्सों की तुलना में महाराष्ट्र, गुजरात और पश्चिम बंगाल की तीन बड़ी प्रयोगशालाएं अधिक से अधिक नमूनों को इकट्ठा करने और उनकी जांच में जुटी हैं इसलिए वहां नए वैरिएंट्स की पहचान की जा रही है.''

नए वैरिएंट्स कितने खतरनाक

कोरोना के ये नए वैरिएंट्स बड़े पैमाने पर इंफेक्शन्स जरूर पैदा कर रहे हैं लेकिन इनसे मरीजों की मौत होने और अस्पतालों में मरीजों की संख्या का बोझ बढ़ने जैसी स्थिति बनने की गुंजाइश बेहद कम है.

हरियाणा के रीजनल सेंटर ऑफ बायोटेक्नोलॉजी के निदेशक डॉ सुधांशु व्रती ने इंडियन एक्सप्रेस से कहा, ''हमारे सामने जो नए वैरिएंट आ रहे हैं वो अधिक तेजी से फैलने और इंसान की रोग प्रतिरोधक क्षमता को चकमा देने में सक्षम हैं. देश की आबादी का एक बड़ा हिस्सा वैक्सीन या फिर संक्रमण की वजह से वायरस के प्रति इम्युनिटी डेवलप कर चुका है इसलिए वायरस जीवित रहने के लिए खुद को इम्युनिटी के हिसाब से ढालने की कोशिश करेगा. हालांकि, इससे हालात खराब होने और अस्पतालों पर बोझ बढ़ने की संभावना नहीं है. फिलहाल अधिकांश कोविड -19 मामलों में लोगों को गले में खराश, खांसी और बुखार हो रहा है जो तीन दिन में ठीक भी हो जा रहा है.

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क्या सर्दियों में बढ़ेंगे कोरोना के केस

डॉ व्रती ने कहा कि त्योहारों के सीजन में भीड़भाड़ वाली जगहों पर लोगों के इकट्ठा होने की वजह से ऐसा हो सकता है. इन केसेस की किसी वैरिएंट की वजह से नहीं बल्कि लोगों के आपस में ज्यादा मिलने-जुलने की वजह से ज्यादा बढ़ने की संभावना है. अब लोगों ने मास्क लगाना भी छोड़ दिया है, ये एक और बड़ी वजह बन सकती है.

यह पूछे जाने पर कि क्या इस बीमारी ने सीजनल पैटर्न का पालन करना शुरू कर दिया है? इस पर डॉ व्रती ने कहा, ''फिलहाल हमारे पास ऐसा कोई सबूत नहीं है जिससे पता चले कि कोरोना के केस सीजनल पैटर्न की वजह से बढ़ रहे हैं. पहले ऐसा सोचा गया था कि बारिश के मौसम में कोरोना के केसों की संख्या बढ़ेगी और गर्मियों में कम होगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ.''

 

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