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संक्रमित होने पर बदल जाती है इंसानों की गंध, ज्यादा आकर्षित होते हैं मच्छर, स्टडी में खुलासा

एक नई स्टडी सामने आई है, जिसमें दावा किया गया है कि डेंगू और जीका वायरस से संक्रमित होने के बाद इंसान के शरीर की गंध बदल जाती है. गंध बदलने से मच्छर उनकी ओर और ज्यादा आकर्षित होते हैं. वैज्ञानिकों का कहना है कि इससे वायरस और तेजी से फैल सकते हैं.

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मच्छर अपने साथ कई सारे वायरस लेकर चलते हैं. (प्रतीकात्मक तस्वीर)
मच्छर अपने साथ कई सारे वायरस लेकर चलते हैं. (प्रतीकात्मक तस्वीर)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • डेंगू-जीका का संक्रमण बदल दे रहा शरीर की गंध
  • शरीर की गंध मच्छरों को और आकर्षित कर रही
  • विटामिन ए गंध को बदलने से रोक सकता है

मच्छर इस दुनिया के सबसे घातक इंसेक्ट्स में से है. हर साल 10 लाख से ज्यादा मौतें मच्छरों से फैलने वालीं बीमारियों से हो जाती हैं. इनमें मलेरिया, यलो फीवर, डेंगू, जीका और चिकनगुनिया जैसी बीमारियां शामिल हैं.

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मच्छर अपने साथ कई सारे वायरस लेकर चलते हैं. जब कोई मच्छर किसी इंसान को काटता है, तो उससे वो इंसान संक्रमित हो जाता है और उसके जरिए ये वायरस दूसरे लोगों में फैल सकता है.

इसी बीच एक नई स्टडी सामने आई है, जिसमें दावा किया गया है कि कुछ वायरस से इंसान के शरीर की गंध बदल जाती है, जिससे मच्छर इंसानों के प्रति और ज्यादा आकर्षक हो रहे हैं. ये स्टडी अमेरिका में स्थित यूनिवर्सिटी ऑफ कनेक्टिकट में इम्युनोलॉजी डिपार्टमेंट में असिस्टेंट प्रोफेसर पेंगुआ वैंग ने की है.

मच्छर अलग-अलग तरह के संकेतों से इंसानों को ढूंढते हैं, जिसमें शरीर का तापमान और सांस लेते समय कार्बन डाय ऑक्साइड छोड़ना शामिल हैं. इसके अलावा शरीर की गंध भी अहम होती है. पिछली कुछ लैब रिसर्च में पाया गया था कि मलेरिया से संक्रमित एक चूहे की गंध बदल गई थी, जिससे मच्छर उसके प्रति और ज्यादा आकर्षित होने लगे थे. 

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अब स्टडी में पाया गया है कि डेंगू और जीका जैसे वायरस से संक्रमित होने के बाद इंसानों के शरीर की गंध भी बदल जाती है, जिससे मच्छर उनके प्रति और ज्यादा आकर्षित होने लगते हैं. 

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वैज्ञानिकों ने चूहों पर की थी रिसर्च

ये पता लगाने के लिए वैज्ञानिकों ने एक चैम्बर में कुछ चूहे रखे गए. इनमें कुछ चूहे जीका या डेंगू से संक्रमित थे, जबकि किसी को कोई संक्रमण नहीं था. स्टडी के दौरान पाया गया कि संक्रमित चूहों के प्रति मच्छर ज्यादा आकर्षित हुए.

हालांकि, इसमें ये भी कार्बन डाय ऑक्साइड वाली थ्योरी को खारिज कर दिया. क्योंकि जीका वायरस से संक्रमित चूहे ने स्वस्थ चूहों की तुलना में कम कार्बन डाय ऑक्साइड छोड़ी. इसलिए वैज्ञानिकों का मानना है कि शरीर के तापमान के साथ-साथ शरीर की गंध भी मच्छरों को ज्यादा आकर्षित करती है.

इस बात को और ज्यादा पुख्ता करने के लिए वैज्ञानिकों ने ग्लास चैम्बर में एक फिल्टर लगाया, जिससे चूहों की गंध को मच्छरों तक पहुंचने से रोका जा सके. इस दौरान पाया गया कि संक्रमित और स्वस्थ चूहों की ओर बराबर संख्या में मच्छर आकर्षित हुए.

वैज्ञानिकों ने इसके बाद संक्रमित चूहों से निकलने वालीं 20 अलग-अलग गैसों के केमिकल कंपाउंड को अलग किया और इनमें से तीन कंपाउंड को इंसानों के हाथ पर लगाया. इससे पता चला कि मच्छर एसिटोफेनन (acetophenone) की ओर ज्यादा आकर्षित हुए. 

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इसी तरह, जब डेंगू मरीज की आर्मपिट से गंध कलेक्ट की गई, तो पता चला कि इसमें स्वस्थ व्यक्ति की तुलना में ज्यादा एसिटोफेनन था. इसके बाद डेंगू मरीज की गंध को एक स्वस्थ व्यक्ति के एक हाथ पर लगाया गया और दूसरे हाथ पर स्वस्थ व्यक्ति की गंध को लगाई गई. इससे पता चला कि डेंगू मरीज की गंध वाले हाथ की ओर मच्छर ज्यादा आकर्षित हुए.

वैज्ञानिकों का कहना है कि इस स्टडी से पता चलता है कि जीका और डेंगू जैसे वायरस इंसान के शरीर में एसिटोफेनन की मात्रा बढ़ा देते हैं, जिससे मच्छर इनकी ओर और ज्यादा आकर्षित होते हैं. जब असंक्रमित मच्छर संक्रमित व्यक्ति को काटते हैं तो वो वायरस को दूसरे इंसानों में भी फैला सकते हैं.

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कैसे बढ़ जाता है एसिटोफेनन?

एसिटोफेनन एक तरह का केमिकल होता है, जो आमतौर पर खुशबू के लिए परफ्यूम में इस्तेमाल होता है. इसके अलावा ये त्वचा पर रहने वाले कुछ बैक्टिरिया में भी होता है. इसके अलावा इंसानों और चूहों की आतें भी एसिटोफेनन को पैदा करतीं हैं.

वैज्ञानिकों ने इसके बाद कुछ संक्रमित चूहों की आतों से और कुछ की त्वचा से एसिटोफेनन पैदा करने वाले बैक्टिरिया को हटा दिया. इसमें भी सामने आया कि जिन संक्रमित चूहों की आंतों से बैक्टिरिया निकाला गया था, उनकी ओर मच्छर ज्यादा आकर्षित हुए, जबकि जिन चूहों की त्वचा से बैक्टिरिया हटाए गए थे, उनकी ओर मच्छर कम आकर्षित हुए. इससे पता चला कि त्वचा के बैक्टिरिया एसिटोफेनन पैदा करने का बड़ा सोर्स है.

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जब वैज्ञानिकों ने संक्रमित और असंक्रमित चूहों की त्वचार पर बैक्टिरिया की तुलना की, तो पता चला कि एक Bacillus नाम का बैक्टिरिया एसिटोफेनन पैदा करने का बड़ा सोर्स है. संक्रमित चूहों की त्वचा में Bacillus की मात्रा काफी ज्यादा थी. इसका मतलब हुआ कि डेंगू और जीका वायरस इंसान के शरीर की गंध बदल सकता है.

फिर इससे बचने का तरीका क्या है?

इस स्टडी ने इस ओर इशारा किया है कि अगर कोई व्यक्ति किसी वायरस से संक्रमित होता है, उसके दोबारा संक्रमित होने का खतरा बढ़ जाता है. ऐसे में वैज्ञानिकों ने इस बात का भी पता लगाया कि संक्रमित होने के बाद एसिटोफेनन की मात्रा को कम कैसे किया जा सकता है?

इसके लिए वैज्ञानिकों ने कुछ चूहों को कुछ दिन तक विटामिन ए की गोलियां दीं और थोड़े दिन बाद जब इन संक्रमित चूहों को स्वस्थ चूहों के साथ रखा गया तो सामने आया कि मच्छर संक्रमित और असंक्रमित दोनों ही चूहों की ओर बराबर आकर्षित हो रहे थे. इससे पता चलता है कि विटामिन ए एसिटोफेनन पैदा करने वाले बैक्टिरिया की मात्रा को कम कर सकता है.

वैज्ञानिकों का कहना है कि दुनिया के कई देशों में विटामिन की कमी आम है. खासतौर से सब सहारा अफ्रीकी और दक्षिण पूर्व एशियाई देशों में, जहां मच्छरों से होने वाली बीमारियां आम है. वैज्ञानिक अब इसका पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि क्या विटामिन ए डेंगू और जीका वायरस से संक्रमित हुए व्यक्तियों की गंध को बदलने से रोकने में मदद कर सकता है, जिससे मच्छरों से होने वाली बीमारियों को रोका जा सके.

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