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डाइटिंग के नाम पर खुद से दुश्मनी? डॉक्टर से जानें वो 5 गलतियां जो आपको दुबला नहीं, कमजोर बना रहीं

गैस्ट्रोइंट्रोलॉजिस्ट डॉ प‍ियूष रंजन कहते हैं कि इन दिनों डाइटिंग के कई फैशनेबल तरीके फेमस हो रहे हैं. कोई कीटोजेनिक डाइट अपना रहा है तो कोई एटकिन्स डाइट या पैलियो डाइट और वेगन डाइट के गुण गा रहा है. असल में डाइटिंग के दो आम तरीके प्रचलित हैं, इनमें इंटरमिटेंट फास्टिंग (समय-समय पर खाना बंद करना) और कुल कैलोरी कम करना. 

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Dieting for weight loss
Dieting for weight loss

डाइटिंग करने का मतलब फिट और हेल्दी होना है, लेकिन क्या आप जाने-अनजाने अपने शरीर के दुश्मन बन रहे हैं? सोशल मीडिया पर सेलिब्रिटी डाइट्स और जीरो-कैलोरी ट्रेंड्स के चक्कर में पड़कर लोग ऐसी गलतियां कर रहे हैं, जो उन्हें दुबला नहीं, बल्कि कमजोर और बीमार बना रही हैं. कुछ लोग डाइटिंग डाइट‍िंग के नाम पर सिर्फ सूप-सलाद पर जिंदा हैं. अगर आप भी डाइट‍िंग के बल पर वजन घटाने का मन बना रहे हैं तो एक्सपर्ट से समझें कि आख‍िर डाइट‍िंग करने का सही तरीका क्या है. कहीं आप गलत तरीके से वजन घटाने की तो नहीं सोच रहे. 

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सर गंगाराम हॉस्पिटल के वर‍िष्ठ गैस्ट्रोइंट्रोलॉजिस्ट डॉ प‍ियूष रंजन कहते हैं कि इन दिनों डाइटिंग के कई फैशनेबल तरीके फेमस हो रहे हैं. कोई कीटोजेनिक डाइट अपना रहा है तो कोई एटकिन्स डाइट या पैलियो डाइट और वेगन डाइट के गुण गा रहा है. असल में डाइटिंग के दो आम तरीके प्रचलित हैं, इनमें इंटरमिटेंट फास्टिंग (समय-समय पर खाना बंद करना) और कुल कैलोरी कम करना. 

डॉ प‍ियूष रंजन कहते हैं कि अक्सर जो लोग बहुत सख्त डाइटिंग करते हैं, उन्हें जरूरी पोषक तत्वों की कमी हो सकती है. इससे शरीर कमजोर और सुस्त महसूस कर सकता है. विटामिन B12 की कमी से नसों पर असर पड़ सकता है, कैल्शियम और विटामिन D की कमी से हड्डियां कमजोर हो सकती हैं  और ऑस्टियोपोरोसिस की समस्या भी हो सकती है. 

वहीं, कीटोजेनिक डाइट लेने वालों में गुर्दे (किडनी) की पथरी होने का खतरा बढ़ जाता है. अगर वजन बहुत ज्यादा कम हो जाए, तो पित्त की पथरी (गॉल स्टोन्स) हो सकती है. साथ ही, डाइटिंग से मानसिक समस्याएं भी हो सकती हैं, जैसे तनाव या खाने को लेकर चिंता होना एक आप आम बात है. डॉ पियूष रंजन डाइटिंग का सबसे अच्छा तरीका बताते हुए कहते हैं कि हमेशा संतुलित आहार के साथ कुल कैलोरी कम करना ही सबसे अच्छा व‍िकल्प है. 

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अगर डाइट को लंबे समय तक बनाए रखना है, तो इसे सही प्लान के साथ करना जरूरी है. वो कहते हैं कि डाइटिंग हमेशा किसी न्यूट्रीशियन एक्सपर्ट की गाइडेंस में करनी चाहिए और अगर शरीर में कोई अजीब लक्षण दिखें, तो तुरंत डॉक्टर से जांच करानी चाहिए. 

बिना सोचे-समझे डाइटिंग से क्या नुकसान होता है? 
- शरीर को जरूरी पोषक तत्व नहीं मिलते, जिससे एनर्जी लेवल गिर जाता है. 
- मेटाबॉलिज्म धीमा हो जाता है, जिससे वजन कम होने के बजाय बढ़ सकता है. 
- इम्यून सिस्टम कमजोर हो जाता है और बार-बार बीमार पड़ने का खतरा बढ़ जाता है. 
- मसल लॉस होता है, जिससे बॉडी टोनिंग बिगड़ जाती है.  
- मेंटल हेल्थ पर असर पड़ता है  जैसे स्ट्रेस, मूड स्विंग्स और डिप्रेशन बढ़ सकता है. 

5 बड़ी गलतियां जो आपको कमजोर बना रही हैं

1. कार्ब्स को पूरी तरह से काट देना

डॉ पियूष रंजन कहते हैं कि कार्ब्स को पूरी तरह हटाना सबसे बड़ी गलती है. शरीर को एनर्जी के लिए कार्ब्स की जरूरत होती है। जब आप इसे नहीं खाते तो शरीर मांसपेशियों को ब्रेकडाउन करने लगता है, जिससे कमजोरी आ जाती है. NCBI की 2022 की एक स्टडी के अनुसार लो-कार्ब डाइट लंबे समय तक फॉलो करने से शरीर में पोषण की कमी हो सकती है और किडनी पर असर पड़ सकता है. 
सही तरीका क्या है- इसके लिए हमें रिफाइंड कार्ब्स (व्हाइट ब्रेड, मैदा) को अपनी डाइट लिस्ट से हटाना है लेकिन हेल्दी कार्ब्स (ब्राउन राइस, ओट्स, क्विनोआ, फल) लेना है. 

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2. एक्सट्रीम कैलोरी कट करना

क्लिनिकल डायटीशियंस बताते हैं कि बहुत कम कैलोरी लेने से शरीर 'स्ट्रेस मोड' में चला जाता है और मेटाबॉलिज्म धीमा हो जाता है.  इससे वजन कम होने की बजाय बढ़ सकता है. हार्वर्ड मेडिकल स्कूल स्टडी के अनुसार 1500 कैलोरी से कम खाने पर शरीर मसल्स को ब्रेकडाउन करने लगता है, जिससे कमजोरी, लो बीपी और डिहाइड्रेशन हो सकता है. 
सही तरीका क्या है- शरीर की जरूरत के हिसाब से बैलेंस्ड डाइट लें। बहुत ज्यादा कम खाने से फायदे के बजाय नुकसान होगा।  

3. सिर्फ लिक्विड डाइट पर टिके रहना

डॉ प‍ियूष रंजन कहते हैं कि सिर्फ जूस और सूप पर रहने से प्रोटीन और फाइबर की कमी हो जाती है, जिससे शरीर कमजोर पड़ता है. पूरी तरह से लिक्विड डाइट के भरोसे हो जाना वेट लॉस का सही तरीका नहीं है. NCBI स्टडी के अनुसार लिक्विड-ओनली डाइट से ब्लड शुगर लेवल असंतुलित हो सकता है, जिससे एनर्जी क्रैश और इरिटेबिलिटी बढ़ जाती है. 
सही तरीका क्या है- हमें सिर्फ लिक्विड्स नहीं, बल्कि सॉलिड और फाइबर युक्त खाना खाना भी जरूरी है, इसके लिए एक बैलेंस बनाएं. 

4. फैट को पूरी तरह से हटाना

 हार्मोन एक्सपर्ट डॉ एम वली सर गंगाराम कहते हैं कि फैट्स पूरी तरह हटाने से हार्मोनल इंबैलेंस हो सकता है, जिससे महिलाओं में पीरियड्स अनियमित हो सकते हैं और स्किन व हेयर डैमेज हो सकते हैं. स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी की स्टडी के मुताबिक ओमेगा-3 और हेल्दी फैट्स (जैसे एवोकाडो, नट्स, देसी घी) को डाइट में शामिल करना हार्ट और ब्रेन हेल्थ के लिए जरूरी है. 
सही तरीका क्या है- हमें ट्रांस फैट से बचना चाहिए, लेकिन हेल्दी फैट्स को डाइट में रखना जरूरी है. 

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5. सिर्फ कार्डियो करना और स्ट्रेंथ ट्रेनिंग को इग्नोर करना 

स्पोर्ट्स इंजरी सेंटर दिल्ली के प्रो देव‍िंदर सिंह कहते हैं कि अगर आप सिर्फ कार्डियो पर फोकस कर रहे हैं और वेट ट्रेनिंग नहीं कर रहे, तो आप सिर्फ मसल्स खो रहे हैं. इससे बॉडी कमजोर और ढीली लग सकती है. इस पर NCBI की 2023 में हुई स्टडी के अनुसार वेट ट्रेनिंग करने से मेटाबॉलिज्म तेज होता है और वजन कंट्रोल में रहता है. 

जानें- हेल्दी वेट लॉस का सही तरीका
बैलेंस्ड डाइट लें. खाने में प्रोटीन, हेल्दी फैट और कार्ब्स सबकुछ सही मात्रा में लें. 
बहुत कम कैलोरी लेने की गलती न करें क्योंकि हमारी बॉडी को एनर्जी चाहिए. 
स्ट्रेंथ ट्रेनिंग जरूर करें, सिर्फ कार्डियो से काम नहीं चलेगा. 
पर्याप्त पानी पिएं, डिहाइड्रेशन मेटाबॉलिज्म को स्लो कर सकता है. 
नींद पूरी करें, अगर नींद कम होगी, तो वजन कम नहीं होगा. 

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