दिल्ली की स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ सुरभि सिंह ने जीबी रोड दिल्ली में रह ही प्रॉस्टिट्यूट वर्कर्स को सर्वाइकल कैंसर की वैक्सीन देने का बेड़ा उठाया है. कोरोना के दौरान इस इलाके में सेनेटरी पैड बांटने गई डॉ सुरभि के दिमाग में यह विचार आया था. डॉ सुरभि अपना एनजीओ सच्ची सहेली चलाती हैं, इसी एनजीओ के अंतर्गत उन्होंने ये मुहिम चलाई है.
डॉ सुरभि ने aajtak.in से बताया कि मल्टीपल सेक्स पार्टनर होने से सर्वाइकल कैंसर के खतरे ज्यादा बढ़ जाते हैं. इसकी एक डोज 4000 रुपये की आती है, जिसे इस इलाके की महिलाएं आसानी से अफोर्ड नहीं कर सकतीं. न ही उनमें इस कैंसर को लेकर बहुत जागरूकता है. उसी दौरान मैंने मन में ये ठानी कि मुझे किसी तरह इन्हें कैंसर का वैक्सीन देना है.
इसी मुहिम को आगे बढ़ाते हुए हमारी टीम ने 'प्रोजेक्ट आशा', कैंपेन चलाया और दो दिन पहले जीबी रोड की 30 सेक्स वर्कर्स को एचपीवी वैक्सीन की पहली खुराक (3 खुराक की) दी. इससे पहले इनकी बहुत सारी काउंसिलिंग की जिसके बाद इनकी कैंसर की स्क्रीनिंग की. कैंसर की स्क्रीनिंग के बाद हमने परसों पहली डोज लगाई है.
वायरस से होने वाला इकलौता कैंसर
डॉ सुरभि का कहना है कि ये लोग समाज के हाशिये के लोग हैं, उनके बारे में लोगों की सोच अभी बहुत ज्यादा नहीं बदली है. इन तक कोई सुविधा पहुंचाना भी आसान काम नहीं हैं. उन्हें समझाकर तैयार करना होता है. दो महीने से हम ये काम कर रहे हैं, धीरे धीरे काफी लोगों ने मुहिम को सराहा. लेकिन पहले स्लॉट में अभी केवल 30 लोगों ने ये वैक्सीन लगाई है. लेकिन सिर्फ 30 से दुनिया नहीं बदलेगी, लेकिन लोग आगे नहीं आते. इसके लिए मैं चाहती हूं कि यहां रहने वाली महिलाएं खासकर ये जानें कि से अकेला यही कैंसर है जो वायरस से होता है. ये इंडिया में नंबर वन कैंसर है जो वायरस से होता है. मैं अपनी क्लीनिक में भी महिलाओं को प्रिसक्राइब करती हूं.
कम उम्र वाली महिलाओं को दी गई वैक्सीन
डॉ सुरभि ने बताया कि वहां स्क्रीनिंग में कई महिलाओं को इनफेक्शन की शिकायत मिली है. यहां जांच में 21 से 48 साल तक की महिलाएं थीं, लेकिन अभी अर्ली एज वालों को वैक्सीन दिया गया है. वो कहती हैं कि यहां कई महिलाएं 14 से 15 साल में सेक्सुअली एक्टिव हो चुकी होती हैं. अभी मैं यहां बहुत से लोगों से संपर्क नहीं कर पाईं. यहां काम करने वाली बहन जी लोगों के जरिये हम इतनी पहुंच बना पाए हैं. ये बहनजी लोग एसटीडी एड्स की जानकारी के लिए प्रशिक्षित हैं. अब पहला डोज लगवाने वाली महिलाओं को दूसरा डोज जुलाई के आखिरी सप्ताह में दिया जाएगा.