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World AIDS Day 2022: एड्स और एचआईवी में होता है बहुत बड़ा अंतर, जान लें इस बीमारी से जुड़ीं जरूरी बातें

एचआईवी एक वायरस होता है जो शरीर के इम्यून सिस्टम को प्रभावित करता है. ये सफेद रक्त कोशिकाओं पर हमला करता है. एचआईवी पॉज़ीटिव होने के बाद एक मरीज़ के लिए मामूली चोट या फिर किसी भी बीमारी से उबरना कठिन हो जाता है. वहीं, एड्स HIV की एडवांस्ड स्टेज है.

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एड्स और एचआईवी में अंतर
एड्स और एचआईवी में अंतर

भारत में एचआईवी और एड्स के मरीज हर साल बढ़ रहे हैं. नेशनल एड्स कंट्रोल ऑर्गेनाइजेशन (NACO) के अनुसार, असुरक्षित यौन संबंधों के कारण देश में पिछले 10 सालों में 17 लाख से ज्यादा लोग एड्स का शिकार हुए हैं. HIV से संक्रमित होने का सबसे बड़ा कारण असुरक्षित यौन संबंध हैं. लेकिन एचआईवी सिर्फ असुरक्षित यौन संबंध बनाने से ही नहीं फैलता. इसके कई अन्य कारण भी हैं. ये संक्रमित व्यक्ति के खून के संपर्क में आने और बच्चों में संक्रमित मां का दूध पीने से भी होता है.

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HIV और AIDS में क्या है फर्क
एचआईवी एक वायरस होता है जो शरीर के इम्यून सिस्टम को प्रभावित करता है. ये सफेद रक्त कोशिकाओं पर हमला करता है. एचआईवी पॉज़ीटिव होने के बाद एक मरीज़ के लिए मामूली चोट या फिर किसी छोटी सी बीमारी से उबरना कठिन हो जाता है क्योंकि हमारा इम्यून सिस्टम ही बीमारियों से लड़ता है लेकिन एचआईवी संक्रमण की वजह से ये कमजोर होता चला जाता है. इस संक्रमण में शरीर में चोट लगने या कोई बीमारी होने पर, उसे ठीक करने में सामान्य से 10 गुना अधिक समय लगता है. 

वहीं, एड्स (AIDS) इस बीमारी की एडवांस्ड स्टेज है. इसका पूरा नाम एक्वायर्ड इम्यून डेफिशिएंसी सिंड्रोम है. ये ह्यूमन इम्यून डेफिशिएंसी वायरस यानी HIV से होता है. एचआईवी संक्रमित रोगी को अगर सही समय पर और सही तरीके से इलाज नहीं मिलता तो एड्स का शिकार हो जाता है. यानी एड्स एचआईवी की लेटर स्टेज है. ये जरूरी नहीं है कि एचआईवी पॉजिटिव मरीज को एड्स हो. सही इलाज मिलने से एचआईवी मरीज एड्स से बच सकता है. 

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हमारे शरीर को सीडी-4 कोशिकाएं और टी-कोशिकाएं स्वस्थ रखती हैं लेकिन ये वायरस इन्हीं कोशिकाओं पर हमला करता है और उनकी संख्या को कम कर देता है. इससे व्यक्ति बैक्टीरिया और वायरस का जल्दी शिकार बनता है और हल्की-फुल्की बीमारी में भी उसे बहुत ज्यादा दिक्कतें होती हैं. 

डॉक्टरों का कहना है कि किसी व्यक्ति के शरीर में HIV एड्स का वायरस है तो वह बिना दवाओं के करीब तीन साल तक जीवित रह सकता है. लेकिन यदि किसी व्यक्ति को AIDS के कारण स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं अधिक हो रही हैं तो इलाज के बिना उसका एक साल से अधिक जिंदा रहना मुश्किल है. 

एचआईवी के लक्षण क्या हैं?
एचआईवी की शुरुआत में रोगी को ज्यादा दिक्कत महसूस नहीं होती है. उसे हल्का जुकाम या खांसी हो सकती है. इसके अलावा शुरुआती लक्षणों में थकान, सिरदर्द, बुखार, त्वचा पर चकत्ते, रात में पसीना आना और गर्दन व कमर के लिंफ नोड्स में सूजन आना शामिल हैं.

एड्स के लक्षण क्या हैं

एड्स एचआईवी की एडवांस्ड स्टेज होती है. कई बार इसके लक्षण पांच से 10 साल में दिखते हैं. इसमें बुखार, दस्त, मुंह में सफेद चकत्तेदार धब्बे उभरना, शरीर से अधिक पसीना निकलना, बार-बार थकान महसूस होना, अचानक वजन कम होना, तेज गले, जांघों और बगलों की लिम्फ नोड्स (लसिका ग्रंथियां) में सूजन और गांठें इसके लक्षण हो सकते हैं.

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एचआईवी और एड्स का इलाज 

HIV का कोई पुख्ता इलाज नहीं है लेकिन दवाओं के सहारे इसके असर को कम किया जा सकता है जिससे शरीर का इम्युन सिस्टम मजबूत बना रहता है. इसमें मरीज को तुरंत एंटी रेट्रोवायरल थेरेपी दी जाती है क्योंकि HIV शरीर को बहुत कमजोर बना देता है. वहीं, एड्स से बचाव ही सबसे बेहतरीन इलाज एड्स एक जानलेवा बीमारी है.

 

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