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कैंसर की तरह बढ़ता जा रहा है भ्रष्टाचारः वी के सिंह

पूर्व सेनाध्यक्ष वी के सिंह ने कहा कि भ्रष्टाचार बढता जा रहा है और यह हरेक जगह कैंसर की तरह व्याप्त है.

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जनरल वीके सिंह
जनरल वीके सिंह

पूर्व सेनाध्यक्ष वी के सिंह ने कहा कि भ्रष्टाचार बढता जा रहा है और यह हरेक जगह कैंसर की तरह व्याप्त है.

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‘भ्रष्टाचार उन्मुलन और सामाजिक दायित्व, संभावनाएं एवं चुनौतियां’ विषय पर आयोजित एक राष्ट्रीय सम्मेलन को संबोधित करते हुए सिंह ने भ्रष्टाचार बढता जा रहा है और यह हरेक जगह कैंसर की तरह व्याप्त है.

उन्होंने कहा कि कई बार ऐसा लगता है कि नेता जी सुभाष चंद्र बोस का जो नारा था कि ‘तुम मुझे खून दो मैं तुम्हें स्वराज दूंगा’ आज वह ‘तुम हमें पैसे दो मैं तुम्हें काम दूंगा’ यह हो गया है.

सिंह ने कहा कि इस दुर्दशा को बदलने की आवश्यकता है और यह विडंबना है इसको चलने दे रहे हैं और इसके उन्मुलन के लिए हम ऐसा कुछ नहीं कर रहे हैं, जिससे कि इसे समाप्त किया जा सके.

उन्होंने कहा कि विदेशों में काला धन जमा करने को खत्म किया जा सके और देश में भ्रष्टाचार को खत्म कर नागरिकों को वे सब सुविधाएं दी जा सकती हैं, जिसके बारे में चर्चा की जाती है.

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देश में किसानों की दुर्दशा की चर्चा करते हुए सिंह ने कहा कि वह जो कि आपकी रोटी के लिए खेतों को जोतता है वही आज रोटी के लिए मोहताज है. किसान के फसल की कीमत कोई और तय करता है.

सिंह ने कहा कि इसी के साथ भूमि अधिग्रहण और भूमि सुधार जुड़ा है और आर्थिक उदारीकारण की नीति का असर पर विचार नहीं होता है. उन्होंने कहा कि जब आंकड़े प्रस्तुत किए जाते हैं तो बताया जाता है कि देश बड़ी उन्नति कर रहा है और सकल घरेलू उत्पाद ऊपर पहुंच गया है.

उन्होंने कहा कि जबसे हमने जीडीपी के उपर आंकड़े प्रस्तुत करने शुरू किए और उदारीकरण की नीति अपनाकर अपने आपको ऐसे ढांचे के अंदर डाला तबसे हमारे समाज में गरीब और अमीर के बीच असमानता बढ़ती जा रही है.

सिंह ने कहा कि जब तक किसी भी नीति का विशलेषण नहीं करेंगे कि उसका सामाजिक फायदा क्या है तब तक उस नीति के अच्छाई और बुराई के बारे में नहीं जान सकते.

उन्होंने कहा कि उदारीकरण की नीति के कारण देश में बेरोजगारी, मंहगाई बढ़ी है और देश की स्वायतता एवं स्वावलंबन खत्म हुआ है और एक तरह अपने आप को हमने आर्थिक गुलामी की ओर ढकेल दिया है.

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सिंह ने कहा कि संविधान में मौजूद नीति निर्देशक सिद्धांत जो कहते हैं कि सरकार का दायित्व है कि ये काम होने चाहिए और अगर ये काम होंगे तो काफी समस्याओं का निवारण किया जा सकता है.

सिंह ने देश के प्रजातंत्र को मजबूत बनाने के साथ आर्थिक नीतियों और सामाजिक विकास के अंदर सामंजस्य लाने और जो असमानता बरती जा रही है तथा अमीर एवं गरीब के बीच अंतर बढ़ता जा रहा है उसको कम करने जरूरत है.

सिंह ने कहा कि हमारी समस्याएं बहुमुखी हैं इसलिए देश के सभी बुद्धजीवियों को और खासकर युवा वर्ग को उठकर खड़े होने, इकमहामेधा होने, अपना दिमाग लगाने की ताकि वे रास्ते निकाल सकें, जिससे देश आगे बढ़ सके.

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