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बिहार के समस्तीपुर जिले में सोमवार को एक किसान ने फसल की कम कीमत मिलने की वजह से खेत में ही उसे बर्बाद कर दिया. ओम प्रकाश यादव नाम का यह किसान गोभी का उचित मूल्य नहीं मिलने से इतना टूट गया कि उसने अपनी लहलहाती फसल पर ट्रैक्टर चला दिया. आजतक ने इस खबर को अपने सभी प्लेटफॉर्म पर प्रमुखता से दिखाया. इसका नतीजा यह हुआ कि अब उसकी बाकी गोभी दस रुपये किलो बिकने जा रही है. ओम प्रकाश यादव ने अब दस रुपये किलो के हिसाब से चार टन गोभी बेची है.
उन्होंने बताया कि उन्हें एक फोन कॉल आया था. जिस पर बताया गया कि सीएससी के माध्यम से उनकी फसल खरीदी जा रही है. उन्होंने कहा कि आजतक पर इस खबर के चलने के बाद केंद्रीय मंत्री ने इसे संज्ञान में लिया और तुरंत सीएससी को इसकी जानकारी दी गई. मंत्री के पीए ने मुझसे बात की और पूछा कि सीएससी के लोगों ने मुझसे संपर्क किया है कि नहीं? उन्होंने कहा कि सीएससी जो पेपर मांग रहे हैं वो देकर रजिस्ट्रेशन करवा लें और बची हुई फसल बेच दें.
किसान ओमप्रकाश यादव ने आजतक चैनल को धन्यवाद देते हुए कहा कि आपके चैनल पर इस खबर को जगह मिलने से यह बात चर्चा में आ गई. लेकिन मेरी मांग है कि यह परेशानी सिर्फ मेरी ही नहीं है, इसलिए बाकी के किसानों को भी इसका लाभ मिले.
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इससे पहले समस्तीपुर जिले के मुक्तापुर के किसान ओम प्रकाश यादव ने अपनी गोभी की फसल यह कहते हुए बर्बाद कर दी थी कि खेती में कुल चार हजार रुपये प्रति कट्ठा का खर्च हुआ और मंडी में कीमत एक रुपये किलो भी नहीं मिल रही है. अपनी पीड़ा बताते हुए ओम प्रकाश यादव ने कहा कि पहले तो गोभी को मजदूर से कटवाना पड़ता है, फिर बोरा देकर पैक करवाना होता है और ठेले से मंडी पहुंचाना पड़ता है, लेकिन वहां आढ़तिए एक रुपये प्रति किलो भी गोभी की फसल खरीदने को तैयार नहीं है. मजबूरन उसे अपनी फसल पर ट्रैक्टर चलवाना पड़ रहा है.
किसान ने कहा कि दूसरी बार उसकी फसल बर्बाद हुई है, इससे पहले भी उसकी फसल को कोई खरीदने वाला नहीं था. ओम प्रकाश यादव ने कहा कि अब वे इस जमीन पर गेंहू रोपेंगे. उन्होंने कहा कि सरकार से एक रुपया लाभ नहीं मिल रहा है. इससे पहले उनका काफी गेहूं खराब हो गया था तो सरकार से एक हजार 90 रुपया का मुआवजा मिला था. इस किसान ने कहा कि वह 8 से 10 बीघे में खेती करते हैं और सरकार की ओर से एक हजार रुपया क्षतिपूर्ति मिलता है.
यहां के किसानों का कहना है कि जितने रुपये खर्च कर के वो गोभी को मंडी लेकर जाएंगे वहां पर उसका मूल धन भी वापस नहीं होने वाला है. लिहाजा फसल को खेत में ही नष्ट कर देना सही है. खेत में ट्रैक्टर चलाते देखकर आस-पास के लोग खेत पहुंच गए और खेत से गोभी उठाकर घर ले गए. अपनी फसल की कीमत न पाने वाला किसान फिलहाल लोगों को अपनी गोभी ले जाता देखकर ही संतुष्ट था. इस किसान ने कहा कि ये सब गांव के लोग और मजदूर हैं, सब्जी खाकर खुश होंगे.