धर्मांतरण पर हर दिन एक नई बहस के बीच बिहार के गया और सारण जिले में करीब 2000 हिंदुओं ने बौद्ध धर्म अपना लिया है. बीते गुरुवार को सारण के गड़खा प्रखंड के कुदरबाधा और बैकुंठपुर में दर्जनभर गांवों के करीब डेढ़ हजार दलित हिंदू धर्म छोड़ बौद्ध धर्म के अनुयायी बन गए हैं. इसके अलावा गया के मानपुर प्रखंड में खंजाहापुर गांव में करीब पांच सौ दलितों ने बौद्ध धर्म स्वीकार कर लिया है.
दैनिक जागरण की खबर के मुताबिक, सारण में दो दिवसीय धर्मांतरण कार्यक्रम के लिए मलेशिया और ताइवान से चार प्रतिनिधि गड़खा पहुंचे थे. इनमें एक हिंदी का अनुवादक भी था. बताया जाता है कि प्रतिनिधियों ने बौद्ध धर्म की विशेषता के साथ ही दलित परिवारों को भविष्य में इससे मिलने वाले लाभ के बारे में भी बताया. इसके बाद रविदास और बाबा साहब भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा के साथ गौतम बुद्ध की प्रतिमा रखी गई और अनुष्ठान के लिए कुंड भी बनाया गया.
गुरुवार को कार्यक्रम के अंतिम दिन बौद्ध धर्म स्वीकार करने वालों की सूची तैयार की गई, जो कार्यक्रम समाप्त होने के बाद कुंड में जला दी गई. धर्मांतरण का तानाबाना छह माह पहले ही बुना जा चुका था. उस समय बाहर से आए प्रतिनिधियों ने पहले दलित गांवों की सूची तैयार की, फिर उस गांव के तेजतर्रार युवकों को चुना और आयोजन करवाया.
दूसरी ओर, मानपुर और गया के बाइपास मार्ग पर खंजाहांपुर गांव के बुद्ध मंदिर के पास बीते शनिवार को पांच सौ पुरुष और महिलाओं ने बौद्ध धर्म अपनाया. खंजाहांपुर निवासी दयमंती देवी ने बताया कि घर में अशांति का माहौल था. शांति का कोई रास्ता नहीं दिखाई पड़ रहा था. ऐसे में उन्होंने परेशान होकर बौद्ध धर्म की दीक्षा ली. दयमंती ने बताया कि दीक्षा लेने के बाद से सभी लोग घुल-मिलकर कर रहे हैं. जबकि एक अन्य महिला कंचन देवी का कहना है कि उन्हें भगवान बुद्ध की पूजा और उनके बारे में प्रवचन सुनना अच्छा लगा इसलिए धर्म परिवर्तन कर बौद्ध को अपनाया.