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बिहार के बेगूसराय में उद्घाटन से पहले गिरे पुल की कहानी, 14 करोड़ की लागत से बना था ब्रिज, लोग आ-जा भी रहे थे

बिहार के बेगूसराय में उद्घाटन से पहले 14 करोड़ की लागत से गंडक नदी पर बना पुल ढह गया. पुल का अगला हिस्सा ढहने के बाद नदी में जा गिरा. मुख्यमंत्री नाबार्ड योजना के तहत 206 मीटर लंबा बनाया गया था, लेकिन पुल का उद्घाटन नहीं हो सका था. कुछ दिनों पहले ही पुल के अगले हिस्से में दरार देखी गई थी.

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बेगूसराय में उद्घाटन से पहले ही पुल ढह गया
बेगूसराय में उद्घाटन से पहले ही पुल ढह गया

बिहार के बेगूसराय में गंडक नदी पर करीब 14 करोड़ की लागत से बना एक पुल उद्घाटन से पहले ही ढह गया. पुल का एक हिस्सा टूटकर गंडक नदी की बीच धारा में गिर पड़ा. इस हादसे के बाद नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली सरकार पर सवाल उठ रहे हैं. भ्रष्टाचार को लेकर नीतीश कुमार पर चौतरफा हमले हो रहे हैं. बिहार सरकार सवालों के घेरे में है तो सवाल पुल का निर्माण कराने वाली एजेंसी पर भी उठ रहे हैं.

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गंडक नदी पर बने 206 मीटर लंबे पुल का निर्माण मुख्यमंत्री नाबार्ड योजना के तहत कराया गया था. वित्तीय वर्ष 2012-13 में स्वीकृत इस पुल का निर्माण कार्य 23 फरवरी 2016 को शुरू हुआ था. 1343.32 लाख रुपये की लागत से ये पुल 22 अगस्त 2017 को बनकर तैयार हो गया था. डेढ़ साल में पुल का निर्माण कार्य पूरा हो गया था. हालांकि, एप्रोच मार्ग का निर्माण कार्य चल रहा था.

मां भगवती कंस्ट्रक्शन ने कराया था निर्माण

बेगूसराय जिले के साहेबपुर कमाल में गंडक नदी पर पुल बनाने का टेंडर बेगूसराय की ही एक कंस्ट्रक्शन कंपनी को मिला था. बेगूसराय के मां भगवती कंस्ट्रक्शन ने इस पुल का निर्माण कराया था. पुल के पिलर संख्या दो और तीन के बीच का हिस्सा टूटकर गंडक नदी में गिरने के बाद मां भगवती कंस्ट्रक्शन भी सवालों के घेरे में है.

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महज पांच साल पहले बनकर तैयार हुआ ये पुल ढहने के बाद लोग सरकार के साथ ही निर्माण कराने वाली संस्था पर भी सवाल उठा रहे हैं. लोगों का आरोप है कि निर्माण कार्य के दौरान गुणवत्ता का पालन नहीं किया गया. लूट-खसोट के चक्कर में मानकों का पालन नहीं किया गया. ये पुल भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गया.

उद्घाटन से पहले ही शुरू हो गई थी आवाजाही

गंडक नदी पर बने इस पुल का उद्घाटन भले ही नहीं हुआ था लेकिन आवाजाही शुरू हो गई थी. छोटे वाहन और पैदल यात्री इस पुल से आवागमन करते थे. एप्रोच मार्ग का निर्माण कार्य पूरा नहीं हो पाने के कारण भारी वाहनों का परिचालन नहीं हो रहा था. इस पुल पर पिलर संख्या दो और तीन के बीच बड़ी दरार देखकर लोगों ने इसकी जानकारी संबंधित विभाग को दी थी. पुल के धंसने और गार्डर में दरार की सूचना पाकर पुलिस प्रशासन के अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर मुआयना भी किया था.

हादसे से दो दिन पहले ही रोका गया था आवागमन

पुल गिरने से दो दिन पहले ही पुलिस-प्रशासन ने दोनों तरफ बैरिकेडिंग कर आवाजाही रोक दी थी. पुल के दोनों तरफ चौकीदार की तैनाती भी की गई थी जिससे कोई पुल पर न जाने पाए. गनीमत थी कि प्रशासन ने पुल पर आवाजाही रोकने का निर्णय प्रशासन ने समय रहते ले लिया था. नहीं तो बड़े हादसे की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता था.

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इंजीनियर्स ने किया था निरीक्षण 

पुल के गार्डर में दरार की सूचना के बाद एक्टिव हुए प्रशासन ने इंजीनियर्स की विशेष टीम बुलवाई थी. इंजीनियर्स की टीम पुल की जांच करके लौटी थी जिसके बाद आवागमन पर रोक लगा दी गई थी. पुल टूट जाने से इलाके की 20 हजार से ज्यादा आबादी प्रभावित हुई है. खासकर किसान ज्यादा परेशान हो रहे हैं, जो नदी के दूसरी तरफ से मवेशियों के लिए चारा लाने में इस पुल का इस्तेमाल करते थे. 

मंत्री की पहल पर मिली थी पुल निर्माण की मंजूरी

गंडक नदी पर पुल के निर्माण की मांग लंबे समय से इलाके के लोग करते आ रहे थे. क्षेत्रीय लोगों की मांग, क्षेत्रीय विधायक परवीन अमानुल्लाह की पहल पर पुल निर्माण की मंजूरी मिली थी. परवीन अमानुल्लाह तब बिहार सरकार के समाज कल्याण मंत्री भी थे.

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