बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने केंद्रीय बजट को निराशाजनक बताया है. उन्होंने कहा कि इस बजट में दूरदर्शिता का अभाव है. बजट की प्राथमिकताएं हर साल बदली जाती हैं, जो फोकस और फंड की कमी की वजह से पूरी नहीं हो पाती हैं. बिहार को स्पेशल स्टेटस दिए जाने की मांग को एक बार फिर नजरअंदाज किया गया है.
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा संसद में बजट पेश किए जाने के बाद नीतीश कुमार ने एक के बाद लगातार सात ट्वीट किए. इनमें सीएम नीतीश ने कहा कि बिहार को इस बजट से निराशा हाथ लगी है. इसके अलावा युवाओं को रोजगार देने का खाका भी बजट में नहीं दिख रहा है.
नीतीश कुमार ने ट्वीट कर कहा, "केन्द्र सरकार द्वारा पेश किया गया आम बजट निराशाजनक है. इसमें दूरदृष्टि का अभाव है. हर वर्ष बजट की प्राथमिकताएं बदल दी जाती हैं, जो फोकस और निधि के अभाव में पूरी नहीं हो पा रही हैं."
वहीं बिहार को विशेष राज्य का दर्जा नहीं दिए जाने पर नीतीश कुमार ने ट्वीट किया, "बिहार को इस बजट से निराशा हाथ लगी है और एक बार फिर विशेष राज्य का दर्जा देने की मांग की अनदेखी की गई है. समावेशी विकास का सपना बिहार जैसे राज्यों को आगे बढ़ाए बिना संभव नहीं है. समावेशी विकास के तहत बिहार सरकार ने केन्द्रीय बजट (2023-24) में वित्त मंत्रियों की बैठक में राज्य के लिए 20,000 करोड़ रूपये के स्पेशल पैकेज की मांग की थी जिसे बजट में नहीं दिया गया है. युवाओं के लिए रोजगार सृजन को लेकर बजट में कोई खाका दिखाई नहीं दे रहा है."
राज्यों के आर्थिक हालात पर नीतीश ने कहा, "राज्यों की वित्तीय स्थिति को नजरअंदाज किया गया है. राज्य सरकार की ऋण सीमा में वर्ष 2023-24 में कोई छूट नहीं दी गई है. बिहार सरकार ने अपने ज्ञापन में इसे 4.5 प्रतिशत (4% एवं 0.5% सशर्त) तक रखने का आग्रह किया था जो पिछड़े राज्यों के विकास में तथा नए रोजगार सृजन में लाभप्रद होता."
वित्त मंत्री ने बजट भाषण में सप्तऋषि का जिक्र करते हुए प्राथमिकताएं तय की थीं, इस पर सीएम ने कहा, "केन्द्रीय बजट में भारत सरकार ने सात प्राथमिकताओं (सप्तऋषि) का निर्धारण किया है. यह योजना केन्द्र सरकार की पूर्व से चल रही योजनाओं की केवल री-पैकेजिंग है. बिहार सरकार वर्ष 2016 से ही सात निश्चय-1 एवं वर्ष 2021 से सात निश्चय-2 के अन्तर्गत नई योजनाओं को सफलता से क्रियान्वित कर रही है."