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साबिर अली को छह साल के सब्र का तोहफा, बीजेपी में अल्पसंख्यक मोर्चे के महामंत्री बने

बीजेपी अल्पसंख्यक मोर्चा की राष्ट्रीय टीम का ऐलान कर किया गया, जिसमें बिहार से साबिर अली को राष्ट्रीय महामंत्री बनाया गया है. हालांकि, एक समय साबिर अली ने जब बीजेपी में एंट्री की थी तो पार्टी में काफी विरोध हुआ था, लेकिन वो खामोश रहे और अब छह साल के बाद उन्हें सब्र का फल मिला है. 

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साबिर अली बीजेपी की सदस्यता दिलाते भूपेंद्र यादव (फाइल फोटो)
साबिर अली बीजेपी की सदस्यता दिलाते भूपेंद्र यादव (फाइल फोटो)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • साबिर अली बने बीजेपी अल्पसंख्यक मोर्चा के महामंत्री
  • छह साल पहले साबिर अली हुए थे बीजेपी में शामिल
  • साबिर अली का बीजेपी में जमकर हुआ था विरोध

जेडीयू का दामन छोड़कर बीजेपी का दामन थामने के छह साल के बाद अब कहीं जाकर पूर्व राज्यसभा सांसद साबिर अली पार्टी को अल्पसंख्यक मोर्चे की राष्ट्रीय कार्यकारिणी में शामिल किया गया है. सोमवार को बीजेपी अल्पसंख्यक मोर्चा की राष्ट्रीय टीम का ऐलान कर किया गया, जिसमें बिहार से साबिर अली को राष्ट्रीय महामंत्री बनाया गया है. हालांकि, एक समय साबिर अली ने जब बीजेपी में एंट्री की थी तो पार्टी में काफी विरोध हुआ था, लेकिन वो खामोश रहे और अब छह साल के बाद उन्हें इस सब्र का फल मिला है. 

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बीजेपी अल्पसंख्यक मोर्चा ने 20 सदस्यीय राष्ट्रीय कार्यकारिणी की घोषणा की है, जिसमें सबसे अधिक 3 सदस्य उत्तर प्रदेश से हैं. इसके बाद बिहार और दिल्ली से 2-2 सदस्यों को राष्ट्रीय मोर्चा में जगह मिली है. बिहार कोटे से पूर्व राज्यसभा सांसद साबिर अली को राष्ट्रीय महामंत्री और अररिया के मुफ्ती अब्दुल वहाब कासमी को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाया गया है. इस तरह से साबिर अली एक बार फिर से सियासत में सक्रिय नजर आएंगे.

बता दें कि साबिर अली जेडीयू में रहते हुए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के काफी करीबी नेता माने जाते थे, जिसके चलते उन्हें पार्टी ने राज्यसभा भी भेजा था. इसके बाद उनके रिश्ते नीतीश कुमार के साथ बिगड़ गए, जिसके बाद उन्हें जेडीयू से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया था. जेडीयू से निकाले जाने के बाद जब 2014 में साबिर अली ने बीजेपी का दामन था. साबिर अली के बीजेपी में एंट्री होते ही पार्टी के अंदर उनके खिलाफ जबरदस्त विरोध शुरू हो गया था.

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बीजेपी के बिहार नेताओं से लेकर राष्ट्रीय नेताओं तक ने साबिर अली को पार्टी में शामिल किए जाने का खुलकर विरोध किया था. वरिष्ठ बीजेपी नेता और मौजूदा केंद्रीय मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने साबिर अली का विरोध करते हुए ट्वीट कर कहा था, 'आतंकवादी भटकल का दोस्त बीजेपी में शामिल हुआ. शायद जल्दी ही दाऊद भी आएगा.' विरोध के बाद भाजपा को अपना फैसला वापस लेना पड़ा था और साबिर अली को सदस्यता देने के 24 घंटे के अंदर ही पार्टी से बाहर कर दिया था.

बीजेपी से बाहर होने के बाद साबिर अली ने भटकल का दोस्त बताए जाने के चलते मुख्तार अब्बास नकवी पर मानहानि का भी मुकदमा कर दिया था. हालांकि, बाद में दोनों नेताओं में आपसी सुलह होने के बाद साबिर अली ने मुकदमा वापस ले लिया था. 2014 के लोकसभा चुनाव खत्म होने के बाद साबिर अली को बीजेपी में दोबारा से एंट्री मिली. साल 2015 के बिहार विधानसभा चुनाव के पहले अल्पसंख्यक वोट पर नजर रखते हुए बीजेपी बिहार प्रभारी भूपेंद्र यादव ने साबिर अली को पटना स्थित प्रदेश कार्यालय में भाजपा की सदस्यता दिलाई थी. वहीं, अब 6 साल के बाद साबिर अली को बीजेपी अल्पसंख्यक मोर्चा का राष्ट्रीय महामंत्री बनाया गया है. 


 

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