बिहार के दो आईपीएस अफसरों में खींचतान शुरू हो गई है. एक हैं आईपीएस शोभा ओहटकर, जो होम गार्ड एंड फायर सर्विसेस में डीजी हैं. दूसरे हैं आईपीएस विकास वैभव जो आईजी हैं.
आईजी विकास वैभव ने डीजी शोभा ओहटकर पर गाली-गलौज करने के आरोप लगाए हैं. आईजी वैभव ने ट्वीट कर आरोप लगाया है कि डीजी शोभा ओहटकर उनके खिलाफ अभद्र भाषा का इस्तेमाल कर रही थीं. उन्होंने अपने पास कॉल रिकॉर्डिंग होने का दावा भी किया है.
विकास वैभव ने ट्वीट में लिखा, 'मुझे 18 अक्टूबर 2022 को होम गार्ड एंड फायर सर्विसेस में आईजी नियुक्त किया गया था और तब से मैं अपनी ड्यूटी निभाने की हर संभव कोशिश कर रहा हूं. लेकिन हर दिन डीजी मैडम मुझे बेवजह गाली दे रहीं हैं, जिसकी मेरे पास रिकॉर्डिंग भी है.' हालांकि, उन्होंने ये ट्वीट तुरंत ही डिलीट कर लिया था, लेकिन तब ये वायरल हो चुका था.
विकास वैभव के इन आरोपों के बाद डीजी शोभा ओहटकर भी आर-पार के मूड में आ गईं. उन्होंने विकास वैभव को कारण बताओ नोटिस जारी किया है. इसमें उन्होंने पूछा है कि राज्य सरकार से आपको टर्मिनेट की सिफारिश क्यों नहीं की जानी चाहिए? उन्होंने 24 घंटे में जवाब मांगा है.
विकास वैभव ने आईआईटी कानपुर से पढ़ाई की है. इसके बाद उन्होंने सिविल सर्विसेस की परीक्षा पास की. वो 2003 बैच के आईपीएस अफसर हैं. वहीं, डीजी शोभा ओहटकर 1990 बैच की आईपीएस अफसर हैं. शोभा ओहटकर बिहार की पहली महिला डीजी हैं. उनकी छवि 'दबंग' है. उन्हें 'हंटरवाली' भी कहा जाता है.
कौन हैं शोभा ओहटकर?
शोभा ओहटकर तब चर्चा में आई थीं, जब उन्होंने बिहार के 15 विधायकों और सांसदों के खिलाफ चार्जशीट दायर की थी. वो अपने कड़े अनुशासन के लिए जानी जातीं हैं. उनकी छवि 'सख्त' और 'दबंग' पुलिसकर्मी की है.
शोभा ओहटकर का जन्म पुणे में हुआ था. उन्होंने हैदराबाद से पॉलिटिक्स में एमए किया है. इसके बाद सिविल सर्विसेस की परीक्षा पास की. वो 1990 बैच की आईपीएस अफसर हैं. शोभा महज 22 साल की उम्र में ही आईपीएस बन गई थीं.
उन्होंने एक इंटरव्यू में बताया था कि वो पहले पायलट बनना चाहती थीं, लेकिन उनके पिता चाहते थे कि वो किसी भी ऐसी सर्विसेस से जुड़ सकतीं हैं, जिसमें वर्दी मिलती हो. उन्होंने बताया था कि अपने पिता का सपना पूरा करने के लिए उन्होंने कड़ी मेहनत की थी. उनके पिता भी सरकारी अफसर थे.
कोल माफियाओं का किया सफाया
जब वो पटना में एसपी थीं, तब उन्होंने सबसे पहले नकली सामान बेचने वाले रैकेट का भंडाफोड़ किया था. इसके बाद उन्होंने बड़े अपराधियों के खिलाफ अभियान शुरू किया.
एक रिपोर्ट के मुताबिक, उन्होंने देवघर में कोयला माफिया के तौर पर काम कर रहे 400 लोगों को गिरफ्तार किया था. 1995 में उन्होंने दो खतरनाक अपराधियों का एनकाउंटर भी किया था.
इसके बाद उनका ट्रांसफर दरभंगा में कर दिया गया था. वहां उन्होंने बड़ी गैंग्स और अपराधियों का सफाया किया. इतना ही नहीं, अपराध में शामिल राजनेताओं के खिलाफ कार्रवाई करने से भी नहीं चूकीं.
एक इंटरव्यू में उन्होंने बताया था कि वो अपने काम से कभी समझौता नहीं करतीं. उन्होंने कहा था कि वो हमेशा कानून का पालन करतीं हैं और इसलिए कुछ ही महीनों में उनका ट्रांसफर हो जाता है. लेकिन उनका काम छाप छोड़ जाता था और राजनेता उनके काम में दखल नहीं देते थे.
हंटरवाली के नाम से हैं मशहूर
बिहार में अलग-अलग जिलों में एसपी के तौर पर शोभा अहोटकर ने अपराधियों के मन में कानून का खौफ पैदा कर दिया था.
शोभा अहोटकर के बारे में कहा जाता है कि वो किसी से डरतीं नहीं है. फिर चाहे उनके सामने कोई भी हो. इसलिए उन्हें 'हंटरवाली' के नाम से भी जाना जाता है.